शान्ति की स्थापना ही सबसे बड़ा शौर्य है – स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश/ रोहित उपाध्याय। परमार्थ निकेतन में शौर्य दिवस को शान्ति दिवस के रूप में मनाया गया। मां गंगा के पावन तट पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, विश्व हिन्दु परिषद् के संरक्षक श्री दिनेश जी, संगठन मंत्री श्री तिवारी जी, मनोज वर्मा, क्षेत्रीय संगठन मंत्री नितिन गौतम और परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों ने शान्ति हवन किया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि वर्ष 1992 से 6 दिसम्बर का दिन भारत में लोग शौर्य दिवस के रूप में मनाते आ रहे है। आज हमारे राष्ट्र में शौर्य दिवस को शान्ति दिवस के रूप में मनाने की जरूरत है। 1992 से अभी तक हिन्दू धर्म के लोग 6 दिसम्बर को शौर्य दिवस के रूप में मनाते आ रहे हैं, मेरा तो मानना है कि अब 6 दिसम्बर 2019 से इसे पूरा देश एक साथ शान्ति दिवस के रूप में मनाये क्योंकि शान्ति की स्थापना ही सबसे बड़ा शौर्य है और वीरता है और आज पूरे राष्ट्र को इसकी नितांत आवश्यकता भी है। शान्ति का मंत्र ही पूरे भारत को संगम के सूत्र में बांध कर रखेगा।
स्वामी जी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के सुप्रीम फैसले से भगवान श्री राम मन्दिर निर्माण के द्वार तो खुले परन्तु हमारे दिलों में जो भी छोटी-छोटी दीवारे हैं; दरारे है उन्हे तोड़ते हुये और सभी के दिलों को जोड़ते हुये राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में लग जायें यही आज का संदेश है। स्वामी जी ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अध्यक्ष माननीय मोहन भागवत जी को साधुवाद देते हुये कहा कि उन्होने जिस प्रकार पूरे देेश में अपने उद्बोधनों से एक माहौल बनाया, इसमें भारत के पूज्य संतों और भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेेन्द्र मोदी जी का भी अद्भुत एवं अभूतपूर्व योगदान रहा।
जब सुप्रीम कोर्ट से श्री राम मन्दिर निर्माण के हक में निर्णय आया तो पूरे देश ने उस समय जिस शालीनता और संयम का परिचय दिया इसके लिये स्वामी जी ने विश्व हिन्दू परिषद् परिवार के सभी नेतृत्वकर्ता तथा कार्यकर्ता साथ ही इसमें सबसे अहम भूमिका निभाने वाले संतों का अभिनन्दन करते हुये कहा कि दोनों सम्प्रदायों के लोगों ने उस समय जो शान्ति, सद्भाव, समरसता और एकता का परिचय दिया वह सभी साधुवाद के पात्र है। सभी ने भारत एक है और भारत श्रेष्ठ है का मंत्र सामने रखते हुये शान्ति बनायें रखी इसलिये आज का दिन शान्ति दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिये।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि अब हमारा उद्देश्य शान्ति के आदर्शो पर चलना तथा शान्ति की स्थापना होनी चाहिये। अंहिसा के लिये शान्ति की स्थापना आवश्यक है। अब हम सभी का यही प्रयत्न हो कि हमारा राष्ट्र प्रगति करे तथा उसके निवासी आनन्द, स्वतंत्रता और समानता के साथ मिलकर रहे। अब जातिवाद और सम्प्रदायवाद के आधार पर नहीं बल्कि शान्ति और सौहार्द के साथ आगे बढ़ें। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, माननीय श्री दिनेश जी, तिवारी जी और अन्य विशिष्ट अतिथियों ने विश्व शान्ति हेतु विश्व ग्लोब का जलाभिषेक किया। स्वामी जी ने पर्यावरण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा देकर सभी का अभिनन्दन किया। परमार्थ गंगा आरती में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को जातिवाद और सम्प्रदाय से उपर उठकर शान्तिपूर्वक जीवन जीने का संकल्प कराया।