जन जागरूकता से ही होगा स्वच्छ भारत का निर्माण – स्वामी चिदानन्द सरस्वती

परमार्थ निकेतन में ‘लीव नो वन बिहाइंड समिट’ का समापन, 14 समूहों ने प्रस्तुत की अपनी समीक्षा रिपोर्ट
जीवा, परमार्थ निकेतन, डब्ल्यू एस एस सी सी और एफएनएएसए के संयुक्त तत्वाधान में परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में आयोजित

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में तीन दिवसीय ’लीव नो वन बिहाइंड वैश्विक शिखर सम्मेलन’ का समापन हुआ इस अवसर पर  छः धर्मो के धर्मगुरूओं यथा हिन्दू धर्म, बौद्ध धर्म, सिख धर्म और जैन धर्म, इस्लाम धर्म और क्रिश्चियन धर्म ने सहभाग किया।
इस शिखर सम्मेलन में देश के लगभग 20 राज्यों से आये प्रतिभागियों ने स्वच्छता, स्वच्छ जल, शौचालय, मासिक धर्म सुरक्षा, तरल और ठोस कचरा प्रबंधन जैसे विषयों जमीनी समस्याओं को प्रस्तुत किया। विभिन्न धर्मों के धर्मगुरूओं ने भी अपने विचार और फेथ इन एक्शन के माध्यम से समाधान प्रस्तुत किये।

विभिन्न धर्मो के धर्मगुरूओं ने हरित और सुन्दर विश्व के निर्माण हेतु एकजुट होने के संकल्प के साथ अपने हाथों के छाप देकर एकजुटता का संदेश दिया। लीव नो वन बिहाइंड वैश्विक शिखर सम्मेलन में अपने देश को स्वच्छ करने के लिये क्या हिन्दू, क्या मुस्लिम सभी स्वच्छता के रंग में रंगे नजर आ रहे थे। विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग यहां पर रिलिजन नहीं बल्कि स्वच्छता के रीजन के लिये एकत्र हुये है।
जीवा, डब्ल्यू एस एस सी और फेन्सा के अधिकारियों ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत भारत सरकार द्वारा प्रदान की जा रही सुविधाओं के विषय में जानकारी दी। साथ ही 2020 की स्वैच्छिक राष्ट्रीय समीक्षा रिपोर्ट तैयार की ताकि “लीव नो वन बीहाइंड’’ तथा भारत सरकार के ओडीएफ प्लस के मौजूदा लाॅच को पूर्ण सहयोग किया जा सके।

लीव नो वन बिहाइंड शिखर सम्मेलन में युवा, महिलायें, बच्चे, दलित, आदिवासी, ट्रांसजेंडर और लेस्बियन, प्रवासियों, शहरी गरीब, विकलांग लोग,  बुजुर्ग, किशोर, किसान, झोंपड़ीवासी, बेघर, मैला ढोने वाले, यौनकर्मी आदि को भारत के विभिन्न राज्यों से 250 से अधिक लोगो को आंमत्रित किया गया है। तीन दिनों तक उन्हें वॉटर, सैनिटेशन और हाइजीन, मासिक धर्म स्वच्छता, स्वास्स्थ्य, ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन (जैविक, प्लास्टिक, ग्रे वॉटर और मल, कीचड़ प्रबंधन) प्रशिक्षित किया गया तथा उनसे तीन दिवसीय सम्मेलन के माध्यम से जो ग्रहण किया उस की रिपोर्ट प्रस्तुत की।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन ने भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की संकल्पना को साकार किया है। इस अभियान ने समग्र और उल्लेखनीय परिवर्तन किये है। महात्मा गांधी जी ने स्वच्छता के महत्व को समझाते हुये कहा था कि ’स्वच्छता, स्वतंत्रता से अधिक महत्वपूर्ण है।’ उन्होने यह भी संदेश दिया कि सभी को अपने शौचालय की सफाई स्वयं करनी चाहिये। स्वच्छता न केवल उत्तम स्वास्थ्य के लिये जरूरी है बल्कि एक सम्मानजनक जीवन के लिये भी आवश्यक है। स्वामी जी ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन ने स्वच्छता के स्तर को बढ़ाने के लिये बहु आयामी प्रयास किये है अब जनसमुदाय का कर्तव्य है कि वे अंगीकार करे और देश को स्वच्छ रखने में मदद करे क्योकि जमीनी स्तर पर परिवर्तन जन जागरूकता के माध्यम से ही हो सकता है।
‘लीव नो वन बिहाइंड समिट’ के समापन सत्र में डब्ल्यू एस एस सी के विशेषज्ञ  जिनेवा से आये जेम्स विंच, एनरिको, श्री विनोद मिश्रा, मेघा जी संचालन समीति, अनिल शर्मा निदेशक, स्वच्छ भारत, जल शक्ति मंत्रालय, संतोष मेहरोत्रा, विभागाध्यक्ष, जेएनयू, पूर्व योजना आयोग, श्री इंद्रजीत, फिनिश सोसाइटी, जे रावा मदुकुरी, मैत्रेयी, अवनीश चन्द्र मिश्रा, प्रो शंकर सान्याल जी, मुफ़्ती नसीहुर, आशीष अग्रवाल, रूबल नागी औ अन्य विशेषज्ञों ने सहभाग किया। इस सम्मेलन के माध्यम से अनेक स्वच्छ भारत अभियान को और सफल बनाने के लिये अनेक सुझाव प्राप्त हुये।                                                                                                                                        

शिखर सम्मेलन में सहभाग हेतु उत्तराखण्ड, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, कर्नाटक, तेलंगाना, पंजाब, महाराष्ट्र, हरियाणा, बिहार, गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान व अन्य राज्यों के 250 से अधिक प्रतिभागी और कनाडा, संयुक्त राष्ट्र, जिनेवा से आये विशेषज्ञों ने सहभाग किया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के सान्निध्य में सभी ने विश्व स्तर पर स्वच्छ जल की आपूर्ति हेतु वॉटर ब्लेसिंग सेरेमनी सम्पन्न की। सभी धर्मगुरूओं और प्रतिभागियों ने एकल उपयोग प्लास्टिक का उपयोग न करने का संकल्प लिया। सभी पूज्य संतों एंव धर्मगुरूओं को पर्यावरण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया गया। तत्पश्चात सभी ने विश्व विख्यात गंगा आरती में सहभाग किया।
रात्रिकालीन कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण और महिलाओं के सामने आने वाली बाधाओं को दर्शता नृत्य ‘अग्निपरीक्षा’ अनीता बाबू और उनके समूह द्वारा प्रस्तुत किया गया। परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों ने एकल उपयोग प्लास्टिक का उपयोग न करने का संदेश देने वाला नृत्य प्रस्तुत किया। दोनों की प्रस्तुतियां बहुत ही मनमोहक और प्रेरणादायक थी।