छत्तीसगढ़ के मरौदा गांव में एक ऐसा शिवलिंग जिसका रोजाना बढ़ता है आकार

मरौदा गांव, छत्तीसगढ़/ कंचन उपाध्याय। देवों के देव अर्थात् महादेव को महादेव, भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ के नाम से भी जाना जाता है। शिवलिंग, भगवान शिव का ही स्वरुप है। इन्हे लिंग कहा जाने का कारण  शून्य, आकाश, अनन्त, ब्रह्माण्ड और निराकार परमपुरुष का प्रतीक होना है। पुराणों में शिवलिंग को कई अन्य नामों से भी संबोधित किया गया है जैसे: प्रकाश लिंग, अग्नि लिंग, उर्जा लिंग, ब्रह्माण्डीय लिंग इत्यादि।

हम जिस शिवलिंग की बात कर रहे है वह ‘भूतेश्वर नाथ शिवलिंग’ के नाम से जाना जाता है, जो विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग है। यह शिवलिंग घने जंगलों के बीच बसे मरौदा गांव, छत्तीसगढ़ में स्थित है। अगर इसके आकार की बात की जाए तो यह जमीन से 18 फीट ऊंचा और 20 फीट गोलाई में है। इसकी ऊंचाई और गोलाई हर साल बढ़ती रहती है। मान्यता है कि अगर शिवरात्री के दिन कोई व्यक्ति पद यात्रा करके इस शिवलिंग के दर्शन करने आए तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।

क्या है भूतेश्वर नाथ शिवलिंग की प्रचलित कथा

प्राचीन काल की बात है जिस समय जमींदारों का पृथ्वी पर बसेरा हुआ करता था, पारागांव का रहने वाला एक जमींदार शोभा सिंह संध्या के समय अपने खेतों में भ्रमण करने जाता था। उसके खेत के पास एक विशेष टीला था और उसे हमेशा उस टीले से सांड तथा शेर के गरजने की आवाज़ आती थी, उन्होंने इस चीज़ को अनसुना किया और वहां से चले गए। परन्तु जब उन्हें ये आवाज़े बार बार आने लगी तो उन्होंने गांववासियों को बताने का सोचा।

गांववासियों ने शोभा सिंह की बात सुनी और उस स्थान पर गए, और उन्हें भी वैसी आवाज़े सुनने को मिली। गांव वालो ने शेर और सांड की तलाश जारी कर दी, परन्तु वे असमर्थ रहे। किसी जानवर के न मिलने पर और लगातार शाम को उस टीले के पास आवाज़े आने के कारण लोगों की श्रद्धा उस टीले को लेकर अधिक होती रही। लोगों के द्वारा वह टीला कोई आम टीला नहीं बल्कि एक चमत्कार था। तभी सबने उस छोटी आकृति के दिखने वाले टीले को शिवलिंग का रूप माना। ग्रामवासियों ने बताया कि दिन पर दिन इसकी ऊचाई एवं गोलाई बढ़ती रही। ये बढ़ोतरी का प्रचलन आज तक भी जारी है। कहा जाता है की इस टीले की आकृति शिवलिंग जैसी थी व साथ ही ये चमत्कारिक भी था, इसलिए गांव के लोगों की श्रद्धा इस टीले के प्रति दिन बढती गई। इस टीले का नाम भूतेश्वर इसलिए रखा गया क्योंकि इस टीले भूतों के स्वामी शिव शंकर का वास है। आज भी अगर आप इसे देखे तो ये टीला निरंतर बढ़ता जा रहा है व लोगों में इसके प्रति आस्था व श्रद्धा भी बढ़ती जा रही है।