देवभक्ति से पहले देशभक्ति इसलिए सैनिक किसी संत से कम नहीं – स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश/ रोहित उपाध्याय। परमार्थ निकेतन में एयर वाईस मार्शल भानो जी राव पधारे। परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों ने शंख ध्वनि से एयर वाईस मार्शल का स्वागत किया। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने पर्यावरण एवं जल सुरक्षा, वृक्षारोपण, नदियों को प्रदुषण मुक्त करने में संत, सेना और समाज का योगदान जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला। उसके बाद सभी ने परमार्थ गंगा आरती में सहभाग किया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी एवं एयर वाईस मार्शल भानो जी राव ने विश्व शान्ति हवन में देश के शहीदों की आत्मा की शान्ति के लिये विशेष आहूतियां समर्पित की। आज परमार्थ गंगा तट ’’राष्ट्रगान और वंदेमातरम्’’ के संगीत से गूंज रहा था।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि अब देव भक्ति से पहले देश भक्ति होनी चाहिये। भारत का एक मजबूत लोकतंत्र है इसे और मजबूत बनाने के लिये हर दिल में देश भक्ति का दीप जलाना होगा। भारत, देश सभी संस्कृतियों, वर्गो, वर्णो, भाषाओं, वेशभूषाओं एवं परम्पराओं का सुन्दर बगीचा है इसमें सबके साथ और सबके विकास की खुशबू सदैव फैलती रहे।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि हम सभी भेदभाव से ऊपर उठकर सब एक होकर यह सोचे कि हम सभी भारतीय है तथा सभी एक परमात्मा की संतान है। हम सभी मिलकर देश की एकता, अखण्डता, समरसता और सद्भाव के लिये काम करें। आज इस देश को वास्तव में किसी चीज की आवश्यकता है तो वह है स्वच्छता, समरसता और सजगता यह सद्भाव बना रहे यही इस देश का संगम है। उन्होने देश की रक्षा करने वाले सैनिकों को प्रणाम करते हुये कहा कि भारत के प्रत्येक सैनिकों की हर धड़कन और हर श्वास इस देश के लिये धड़कती है इसलिये हमारा तिरंगा लहराता है। स्वामी जी ने कहा कि हमारे देश के सैनिक, किसी संत से कम नहीं है, जब तक वो जिंदा है तब तक इस देश की अस्मिता जिंदा है,

एकता, अखण्डता और इस देश की सुरक्षा ज़िंदा है। आज इस देश को उत्तर, दक्षिण, पर्व और पश्चिम के संगम की आवश्यकता है।
स्वामी जी महाराज ने कहा कि ’’भारत एक भूमि का टुकडा नहीं है बल्कि भारत, तो एक जीता जागता राष्ट्र है, भारत, शान्ति की धरती है और शान्ति का  पैगाम देती है। हमारा तो मंत्र भी ऊँ शान्तिः, शान्तिः, शान्तिः है और ये शान्ति सब के लिये है। उन्होने कहा कि इस देश की रक्षा हमारे सैनिक करते हैं, वे देश के प्रथम रक्षक हैं।

देश की संस्कृति की रक्षा करने वाले हमारे पूज्य संत हैैं जो हमारी संस्कृति को बनाये रखते हैं और उसकी रक्षा करते है, बिना संस्कृति के कोई भी देश जीवित नहीं रह सकता। एक ओर सैनिक और दूसरी ओर संत दोनों से ही भारत की सीमाएँ और संस्कृति बची हुई है। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने एयर वाईस मार्शल भानो जी राव को पर्यावरण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट करते हुये कहा कि स्वच्छ और स्वस्थ राष्ट्र ही प्रगति के पथ पर आगे बढ़ सकता है अतः हम सभी को इस ओर मिलकर कार्य करना होगा।। स्वामी जी महाराज ने गंगा आरती में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को जल एकल उपयोग प्लास्टिक का उपयोग न करने का संकल्प कराया।