रोहिंग्या मुसलमानों के बसाए जाने के मुद्दे पर घुसपैठियों की वकालत करने वालों को जवाब देती रचना

    भारत का माहौल बुरा है,सब हैं नफरत भरे हुए,

    दाढ़ी वाले चीख रहे हैं,मुसलमान हैं डरे हुए,

    मुल्ला मौलाना रोते हैं,अब सुख दायक नही रहा,

    ये भारत अब मुसलमान के रहने लायक नही रहा,

    मुंह में भरकर सत्ता की वो पान सुपारी,बोल गए,

    मुसलमान है डरा हुआ हामिद अंसारी बोल गए,

    अब जब सब ने मान लिया है,नही सुरक्षित भारत है,

    20 करोड़ मुसलमानों के सर पर नाची आफत है,

    अरे तभी तो कहता हूँ मैं,कायम सबके नूर रहें,

    रोहिंगया जितने मुस्लिम है,वो भारत से दूर रहें,

    बसना है तो जाकर बस लो,बंगलादेश पडोसी है,

    इंडोनिशिया बुआ तुम्हारी,और मलिशिया मौसी है,

    फूफा था सद्दाम तुम्हारा,उस बग़दाद चले जाओ,

    या फिर बगल सीरिया में करने जेहाद चले जाओ,

    हज के खाली टेंट पड़े हैं,उनमे जाकर पिल जाओ,

    या अफगानिस्तान पहुँच कर तालिबान से मिल जाओ,

    अगर शिया से दिक्कत ना हो तो ईरान चले जाओ,

    और कहीं ना मिले जगह तो पाकिस्तान चले जाओ,

    लेकिन भारत में बसने का ख्वाब देखना बंद करो,

    राशन कार्ड न बनने देंगे,जाकर कहीं प्रबंध करो,

    47 की भूलों को साकार नही बनने देंगे,

    वोटर पत्र भूल जाओ,आधार नही बनने देंगे,

    घुसपैठी को भाई कह दें,नही रही अब चाहत है,

    नेहरू वाला देश नही,ये मोदी वाला भारत है,

    ओवैसी के जेहादी अरमान नही पलने देंगे,

    ममता की वोटो वाली ये दाल नही गलने देंगे,

    धर्म सनातन की पीढ़ी पर दाग नही लगने देंगे,

    भारत के आंचल में फिर से आग नही लगने देंगे,

    जाग चुका है भारत,भगवा खोल नयन लहराया है,

    रग रग में केसरिया का रंग और अधिक गहराया है,

    दुनिया सुन ले,ये भारत खैराती बिस्तर नही रहा,

    हर ऐरे गैरे की खातिर खाला का घर नही रहा,

    कवि गौरव बोले, लहज़ा स्वच्छंद कर दिया भारत ने,

    हर कुत्ते को रोटी देना बंद कर दिया भारत ने,

     

    रचनाकार- कवि गौरव चौहान इटावा उ प्र 9557062060