आदर्श एवं अनुकरणीय व्यक्तित्व के धनी हैं राम महेश मिश्र

    नई दिल्ली। मूलतः ग्राम ओदरा नेवलिया, सुरसा, हरदोई (यूपी) के निवासी आदरणीय राम महेश मिश्र जी से मेरा परिचय अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा हरिद्वार में संचालित देव संस्कृति विश्वविद्यालय में वर्ष 2004 में हआ था। तब आप सब-रजिस्ट्रार के रूप में वहाँ सेवारत थे। वैसे तो आपके बारे में लम्बे समय से सुनता आ रहा था, क्योंकि उत्तर प्रदेश गायत्री परिवार के  सबसे प्रखर, ओजस्वी व सक्रिय कार्यकर्ताओं में आपका नाम सबसे ऊपर था। सरकारी सेवा में रहते हुए एक आदर्श आफिसर के रूप में सेवा देते हुए, बिना आफ़िस कामों का नुकसान किये आप कई कार्यकर्ताओं के बराबर आउटपुट देने वाले अपने समय के विलक्षण व्यक्तित्व के धनी एक योद्धा के समान कार्य करने वाले कार्यकर्ता रहे।

    युगऋषि की पुकार पर आप कच्चे परिवार को ख़तरों में डालकर अपना सब कुछ छोड़कर प्रशासनिक अधिकारी पद से त्यागपत्र देकर पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में DSVV में आ गए। वहाँ पर आपकी कार्यशैली देखकर सभी अचंभित हो जाते थे । चाहे कितने लोग मिलने को आ जायें, आप सबसे मिलते थे , सबको पूरा समय देते थे। परम पूज्य गुरुदेव की भाँति एक साथ कई कार्य कुशलतापूर्वक गुणवत्ता के साथ सम्पन्न करने में उनके इन मानस पुत्र को महारत हासिल है। आपकी तमाम विशेषताओं में एक ख़ास बात यह है कि जो भी एक बार मिलता है वह हमेशा के लिए आपके मन मस्तिष्क में अंकित हो जाता है ।

    सात साल की कुशलतापूर्वक सेवा के बाद आपने किंचित परिस्थितिवश पुनः दूसरा बड़ा निर्णय लिया और देव संस्कृति विश्वविद्यालय को छोड़कर तीर्थनगरी ऋषिकेश स्थित अन्तरराष्ट्रीय आध्यात्मिक आश्रम परमार्थ निकेतन में निदेशक के रूप से सेवा करने पहुँचे, जहाँ आपने पाँच वर्ष सेवाएँ दीं। उनकी सेवाओं से परमार्थ का एक उज्ज्वल चेहरा देश और दुनिया के सामने आया। उसके बाद ख्यातिप्राप्त अध्यात्मवेत्ता आचार्य सुधांशु जी महाराज ने आग्रहपूर्वक उनकी सेवाएँ ले लीं। वर्तमान में आप विश्व जागृति मिशन, आनन्दधाम, नयी दिल्ली में ‘निदेशक’ के रूप में सेवा दे रहे हैं । मेरी नजरों में श्री राम महेश जी मिश्र एक प्रयोगवादी सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जो  बेहतर करने को हर स्तर पर उत्सुक व जागरूक हैं। सबको साथ लेकर चलने की आपकी कला और आपकी रचनाधर्मिता अद्भुत है।

    58 साल की आयु में भी आपकी कार्यक्षमता व कार्यशैली किसी 25 साल के उत्साही नौजवान जैसी है। बिल्कुल धारदार वाक् शैली वाले श्री मिश्र एक कुशल वक्ता एवं प्रभावी क़लम के धनी लेखक हैं। कुशल चिंतक और कुशल संगठक के साथ आप अत्यंत सरल व लोककल्याण की भावना से ओतप्रोत एक ऐसे विभूतिवान आदर्श ब्राह्मण हैं, जिनका जीवन आत्मकल्याण के साथ ही   लोककल्याण व वसुधैव कुटुंम्बकम के लिए पूरी तरह समर्पित है। ख़ास बात यह है कि अपने दीक्षा गुरुदेव युगऋषि आचार्य श्रीराम शर्मा में तथा उनके विचारों के प्रति उनकी श्रद्धा यथावत बनी हुई है।
    भारतवर्ष की टॉप 100 हस्तियों में लगभग 95 लोग किसी न किसी रूप में आपसे भलीभांति परिचित हैं। सभी क्षेत्रों की शीर्ष प्रतिभाओं से मिलना, मिलाना व मेलजोल बढ़ाना और उन्हें देशहित के कामों के लिए प्रोत्साहित करना आपके स्वभाव का सहज अंग है। जहाँ भी आपको तनिक भी लोक कल्याण की संभावना नजर आती है, उसे बेहतर करने के लिए आप जरूर प्रयास करते हैं। जो भी व्यक्ति आपके पास जाता है कभी निराश नहीं लौटता। आप अपनी क्षमता-अनुसार उसकी मदद अवश्य करते हैं। प्रेम और स्नेहादर से सराबोर आपका आध्यात्मिक व्यक्तित्व हम सभी के लिए प्रेरणादायक  है । समय-समय पर आपका मार्गदर्शन , स्नेह व आशीर्वाद गायत्री परिवार के हम स्वजनों को मिलता रहता है । यह प्रवाह सतत् बना रहे, यही कामना है। आपसे आग्रह है कि अपने लखनऊ आवास के माध्यम से आप हम यूपी वालों से अवश्य जुड़े रहें।

    प्रस्तुति- हरगोविन्द प्रवाह, गोरखपुर (उ. प्र.)