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जन जागरूकता से ही होगा स्वच्छ भारत का निर्माण – स्वामी चिदानन्द सरस्वती

परमार्थ निकेतन में ‘लीव नो वन बिहाइंड समिट’ का समापन, 14 समूहों ने प्रस्तुत की अपनी समीक्षा रिपोर्ट
जीवा, परमार्थ निकेतन, डब्ल्यू एस एस सी सी और एफएनएएसए के संयुक्त तत्वाधान में परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में आयोजित

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में तीन दिवसीय ’लीव नो वन बिहाइंड वैश्विक शिखर सम्मेलन’ का समापन हुआ इस अवसर पर  छः धर्मो के धर्मगुरूओं यथा हिन्दू धर्म, बौद्ध धर्म, सिख धर्म और जैन धर्म, इस्लाम धर्म और क्रिश्चियन धर्म ने सहभाग किया।
इस शिखर सम्मेलन में देश के लगभग 20 राज्यों से आये प्रतिभागियों ने स्वच्छता, स्वच्छ जल, शौचालय, मासिक धर्म सुरक्षा, तरल और ठोस कचरा प्रबंधन जैसे विषयों जमीनी समस्याओं को प्रस्तुत किया। विभिन्न धर्मों के धर्मगुरूओं ने भी अपने विचार और फेथ इन एक्शन के माध्यम से समाधान प्रस्तुत किये।

विभिन्न धर्मो के धर्मगुरूओं ने हरित और सुन्दर विश्व के निर्माण हेतु एकजुट होने के संकल्प के साथ अपने हाथों के छाप देकर एकजुटता का संदेश दिया। लीव नो वन बिहाइंड वैश्विक शिखर सम्मेलन में अपने देश को स्वच्छ करने के लिये क्या हिन्दू, क्या मुस्लिम सभी स्वच्छता के रंग में रंगे नजर आ रहे थे। विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग यहां पर रिलिजन नहीं बल्कि स्वच्छता के रीजन के लिये एकत्र हुये है।
जीवा, डब्ल्यू एस एस सी और फेन्सा के अधिकारियों ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत भारत सरकार द्वारा प्रदान की जा रही सुविधाओं के विषय में जानकारी दी। साथ ही 2020 की स्वैच्छिक राष्ट्रीय समीक्षा रिपोर्ट तैयार की ताकि “लीव नो वन बीहाइंड’’ तथा भारत सरकार के ओडीएफ प्लस के मौजूदा लाॅच को पूर्ण सहयोग किया जा सके।

लीव नो वन बिहाइंड शिखर सम्मेलन में युवा, महिलायें, बच्चे, दलित, आदिवासी, ट्रांसजेंडर और लेस्बियन, प्रवासियों, शहरी गरीब, विकलांग लोग,  बुजुर्ग, किशोर, किसान, झोंपड़ीवासी, बेघर, मैला ढोने वाले, यौनकर्मी आदि को भारत के विभिन्न राज्यों से 250 से अधिक लोगो को आंमत्रित किया गया है। तीन दिनों तक उन्हें वॉटर, सैनिटेशन और हाइजीन, मासिक धर्म स्वच्छता, स्वास्स्थ्य, ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन (जैविक, प्लास्टिक, ग्रे वॉटर और मल, कीचड़ प्रबंधन) प्रशिक्षित किया गया तथा उनसे तीन दिवसीय सम्मेलन के माध्यम से जो ग्रहण किया उस की रिपोर्ट प्रस्तुत की।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन ने भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की संकल्पना को साकार किया है। इस अभियान ने समग्र और उल्लेखनीय परिवर्तन किये है। महात्मा गांधी जी ने स्वच्छता के महत्व को समझाते हुये कहा था कि ’स्वच्छता, स्वतंत्रता से अधिक महत्वपूर्ण है।’ उन्होने यह भी संदेश दिया कि सभी को अपने शौचालय की सफाई स्वयं करनी चाहिये। स्वच्छता न केवल उत्तम स्वास्थ्य के लिये जरूरी है बल्कि एक सम्मानजनक जीवन के लिये भी आवश्यक है। स्वामी जी ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन ने स्वच्छता के स्तर को बढ़ाने के लिये बहु आयामी प्रयास किये है अब जनसमुदाय का कर्तव्य है कि वे अंगीकार करे और देश को स्वच्छ रखने में मदद करे क्योकि जमीनी स्तर पर परिवर्तन जन जागरूकता के माध्यम से ही हो सकता है।
‘लीव नो वन बिहाइंड समिट’ के समापन सत्र में डब्ल्यू एस एस सी के विशेषज्ञ  जिनेवा से आये जेम्स विंच, एनरिको, श्री विनोद मिश्रा, मेघा जी संचालन समीति, अनिल शर्मा निदेशक, स्वच्छ भारत, जल शक्ति मंत्रालय, संतोष मेहरोत्रा, विभागाध्यक्ष, जेएनयू, पूर्व योजना आयोग, श्री इंद्रजीत, फिनिश सोसाइटी, जे रावा मदुकुरी, मैत्रेयी, अवनीश चन्द्र मिश्रा, प्रो शंकर सान्याल जी, मुफ़्ती नसीहुर, आशीष अग्रवाल, रूबल नागी औ अन्य विशेषज्ञों ने सहभाग किया। इस सम्मेलन के माध्यम से अनेक स्वच्छ भारत अभियान को और सफल बनाने के लिये अनेक सुझाव प्राप्त हुये।                                                                                                                                        

शिखर सम्मेलन में सहभाग हेतु उत्तराखण्ड, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, कर्नाटक, तेलंगाना, पंजाब, महाराष्ट्र, हरियाणा, बिहार, गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान व अन्य राज्यों के 250 से अधिक प्रतिभागी और कनाडा, संयुक्त राष्ट्र, जिनेवा से आये विशेषज्ञों ने सहभाग किया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के सान्निध्य में सभी ने विश्व स्तर पर स्वच्छ जल की आपूर्ति हेतु वॉटर ब्लेसिंग सेरेमनी सम्पन्न की। सभी धर्मगुरूओं और प्रतिभागियों ने एकल उपयोग प्लास्टिक का उपयोग न करने का संकल्प लिया। सभी पूज्य संतों एंव धर्मगुरूओं को पर्यावरण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया गया। तत्पश्चात सभी ने विश्व विख्यात गंगा आरती में सहभाग किया।
रात्रिकालीन कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण और महिलाओं के सामने आने वाली बाधाओं को दर्शता नृत्य ‘अग्निपरीक्षा’ अनीता बाबू और उनके समूह द्वारा प्रस्तुत किया गया। परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों ने एकल उपयोग प्लास्टिक का उपयोग न करने का संदेश देने वाला नृत्य प्रस्तुत किया। दोनों की प्रस्तुतियां बहुत ही मनमोहक और प्रेरणादायक थी।

गीता के उपदेशों को युवा पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक – आचार्य लोकेश

कुरुक्षेत्र मे
हरियाणा सरकार एवं गीतामनीषी स्वामी ज्ञानानंदजी द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय
गीता महोत्सव के दौरान विराट संत सम्मेलन का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम में केन्द्रीय
मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक जैन आचार्य डा. लोकेशजी, स्वामी प्रमात्मानन्दजी, भानुपीठाधीश्वर शंकराचार्य ज्ञानानन्दतीर्थजी, बाबा भूपिंदर सिंह जी, स्वामी हरिचेतनानंद जी,  स्वामी धर्मदेवजी, आचार्य
ब्रहमस्वरूपजी व इस्कॉन के स्वामीजी ने संबोधित किया।

शांतिदूत आचार्य लोकेशजी ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा कि आज से पांच हजार साल पहले भगवान श्रीकृष्ण ने हरियाणा के कुरुक्षेत्र में जीवन जीने की कला का उपदेश दिया था। जिसे आज पूरा संसार अपने जीवन पद्धति में शामिल करने के इच्छुक है। गीता एक ग्रंथ ही नहीं बल्कि बेहतर जीवन जीने का सिद्धांत भी है। उन्होंने कहा कि गीता के सिद्धांतों को युवा पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है। गीता जीवन को समझने और समस्याओं को सुलझाने मे सहायक सिद्ध होती है। गीता ने दर्शन और विज्ञान में अनेक सिद्धांत स्थापित किए हैं।

इस अवसर पर केन्द्रीय मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के आयोजन ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इसके कारण भारत का नाम विश्व में रोशन हुआ है और कुरुक्षेत्र को एक नई पहचान मिली है। उन्होंने कहा कि गीता के उपदेशों को अपनाने से मानव जाति का कल्याण संभव है। गीता एक सर्वांगीण व्यक्तित्व और संतुलित समाज ने निर्माण मे सहयोग देती है।

उल्लेखनीय है कि
मंत्रोच्चारण और शंखनाद के बीच कुरुक्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2019  का आगाज हुआ। इस महोत्सव में 18 हजार विद्यार्थियों के साथ वैश्विक
गीता पाठ, ध्वनि और प्रकाश शो उत्तर क्षेत्र
सांस्कृतिक कला केन्द्र पटियाला द्वारा 12 से ज्यादा राज्यों
के कलाकारों के सांस्कृतिक कार्यक्रम, अंतर्राष्ट्रीय
गीता सेमिनार,
विराट संत सम्मेलन, ब्रह्मसरोवर की महाआरती, गीता शोभा यात्रा आदि मुख्य आकर्षण का
केन्द्र रहे।

21 वीं सदी का एक मंत्र स्वच्छता के लिये एकजुटता आवश्यक – स्वामी चिदानन्द सरस्वती

  • परमार्थ निकेतन में ‘लीव नो वन बिहाइंड समिट’ का विधिवत उद्घाटन
  • वॉटर, सैनिटेशन और हाइजीन के क्षेत्र में कोई पीछे न छुट जाये
  • जीवा, परमार्थ निकेतन, डब्ल्यू एस एस सी सी और एफएनएएसए के संयुक्त तत्वाधान में परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में आयोजित
  • यूनाइटेड नेशन के साथ यूनाइटेड क्रिएशन की जरूरत

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में तीन दिवसीय ’लीव नो वन बिहाइंड वैश्विक शिखर सम्मेलन’ का आज विधिवत उद्घाटन छः धर्मो के धर्मगुरूओं यथा हिन्दू धर्म, बौद्ध धर्म, सिख धर्म और जैन धर्म, इस्लाम धर्म और क्रिश्चियन धर्म ने किया।
इस शिखर सम्मेलन में परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, उलेमा फाउंडेशन ऑफ इंडिया के प्रमुख, मौलाना कोकब मुज़तबा जी, जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी, सरदार परमजीत चंडोक, दिल्ली गुरूद्वारा बंगला साहिब, ईसाई धर्मगुरू बैंगलोर से पादरी फिलिप, बिहार  से साध्वी शिलाची जी, असम से मुफ़्ती नसीहुर रहमान जी, किन्नर अखाड़ा महामण्डलेश्वर श्री लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी जी तथा विभिन्न धर्मों के धर्मगुरूओं ने सहभाग किया। डब्ल्यू एस एस सी सी के भारत में समन्वयक श्री विनोद मिश्रा जी, नई दिल्ली से आये एनरिको, अध्यक्ष हरिजन सेवक संघ प्रो शंकर सान्याल जी, श्री आशीष अग्रवाल जी, श्री प्रियवरन मित्रा जी, रूबल नागी, उर्मिला श्रीवास्तव जी, फेन्स के प्रतिनिधि श्रीधर जी, स्नेहलता जी, मुरली जी और अन्य विशिष्ट अतिथियों और विभिन्न धर्मों के धर्मगुरूओं ने दीप प्रज्जवलित कर वाटर, सैनिटेशन और हाइजीन के लिये एकजुट होने का संदेश दिया।

परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में जिनेवा से आये श्री जेम्स, जीवा, डब्ल्यू एस एस सी सी और एफएनएएसए के संयुक्त तत्वाधान में इस शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य विशेष रूप से महिलाओं, युवाओं और विभिन्न क्षेत्रों के लोगो के सामाजिक जुड़ावों को बढ़ावा देने हेतु योगदान प्रदान करना तथा भारत सरकार के प्रयासों और स्वच्छ भारत मिशन को सहयोग और समर्थन प्रदान करना है एवं ’’लीव ’’लीव नो वन बीहाइंड’’ तथा भारत सरकार के ओडीएफ प्लस के मौजूदा लॉंच को पूर्ण सहयोग प्रदान करना है। साथ ही  भारत सरकार की संयुक्त राष्ट्र टीम को वर्ष 2020 की स्वैच्छिक राष्ट्रीय समीक्षा हेतु भारत सरकार को समर्थन और सहयोग प्रदान करना है। इस शिखर सम्मेलन में केन्द्र और राज्य सरकार, नागरिक समाज, निजी क्षेत्रों, मीडिया, खेल आदि के अलावा सभी सम्बंधित संस्थानों और संगठनों के 10 से 15 सदस्यों ने सहभाग किया। इन्हें 15 समूहों में वर्गीकृत किया गया। इस 15 समूहों के सदस्यों को सतत विकास लक्ष्य, एसडीजी 6 तथा संयुक्त राष्ट्र टीम के दिशानिर्देशों और विभिन्न समूहों के लिये तैयार संचरित प्रश्नावली का उपयोग करके वॉटर, सैनिटेशन और हाइजीन के क्षेत्र में आने वाली चुनौतियों के समाधान हेतु दिशानिर्देश दिये जा रहे है।

लीव नो वन बिहाइंड शिखर सम्मेलन में युवा, महिलायें, बच्चे, दलित, आदिवासी, ट्रांसजेंडर और लेस्बियन, प्रवासियों, शहरी गरीब, विकलांग लोग,  बुजुर्ग, किशोर, किसान और भ्प्ट से पीड़ित लोग, झोंपड़ीवासी, बेघर, मैला ढोने वाले, यौनकर्मी आदि को भारत के विभिन्न राज्यों से 250 से अधिक लोगो को आंमत्रित किया गया है। तीन दिनों तक उन्हें वॉटर, सैनिटेशन और हाइजीन, मासिक धर्म स्वच्छता, स्वास्स्थ्य, ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन (जैविक, प्लास्टिक, ग्रे वॉटर और मल, कीचड़ प्रबंधन) प्रशिक्षित किया जायेगा। वास्तव में यह शिखर सम्मेलन स्वच्छ भारत मिशन को और आगे ले जाने में सहायक सिद्ध होगा।
श्री विनोद मिश्रा जी ने लीव नो वन बिहाइंड समिट के विषय में जानकारी देते हुये कहा कि इसमें भारत के 20 राज्यों के 20 से अधिक संगठनों ने सहभाग किया है। जुलाई 2020 में पूरे विश्व की एसडीजी रिपोर्ट (जिसमें वाटॅर, सैनिटेशन और हाईजीन शामिल है) जानी है। इसमें भारत सरकार भी अपनी रिपोर्ट भेंजेगा। इस सम्मेलन का उद्देश्य है कि समाज के ये 14 समूहों के लोगों के प्रतिनिधियों से जानकारी प्राप्त करना कि सरकार द्वारा जारी की गयी स्वच्छ भारत मिशन की योजनाओं का लाभ मिल रहा है और कितना मिल पा रहा है इस पर रिपोर्ट लेना और इन योजनाओं तक सब की पहुंच बनाना। ओडीएफ के माध्यम से जो भी स्वच्छता के क्षेत्र में पीछे रह गये है उन्हें समाज की मुख्य धारा में लाना है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि “मानव-मानव एक समाज सबके कहा कि कल शाम को मेरे पास सेक्सवर्कर सलमा, सरनसाना बहन आयी मुझसे बात की और कहा कि दुनिया में परमार्थ निकेतन एक ऐसी जगह है जहां आकर लगा की हम अपने मायके में है। लगता है हमें जब भी जरूरत होगी हमारे लिये इसके द्वार खुले है।  स्वामी जी ने कहा कि सब के दर्द को अपना दर्द समझें। ईशावास्यमिंद सर्वम्, ’’ये पहला सबक है किताबे खुदा का कि मखलूक सारी है कुनबा खुदा का’’ को अपने जीवन का मंत्र बनाना होगा। हम सभी एक पिता की सन्तान हैं और इसके लिये हमें अपनी सोच को बदलना होगा। भय के साथ नहीं भाव के साथ जीना होगा। उन्होने कहा कि समाज में जो लोग पीछे छुट गये है उन्हें देखकर हमारे दिल में दर्द होना चाहिये। शौचालय सब के लिये बने लेकिन हम भी सब के लिये बने तो परिणाम और सुखद प्राप्त होंगे।
साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि हम सभी का मंत्र हो एकता और एकजुटता। हम सभी जो एकत्र हुये है वह पार्टनर बाद में पहले एक परिवार हैं। धर्म हमें मार्गदर्शन देता है; रास्ता दिखाता है। हम जो भी करते हैं पहले उसका विचार आता है फिर शब्द, कार्य और फिर संगठन के रूप में परिभाषित होता है तो हमें सबसे पहले अपने विचारों से भेदभाव को मिटाना होगा और इस दुनिया को स्वर्ग बनाने के लिये एकजुट होकर कार्य करें।

मौलाना कोकब मुज़तबा जी, ने कहा कि जल और स्वच्छता की प्रत्येक मनुष्य और सभी प्राणियों को जरूरत है। सफाई, ईमान का हिस्सा है अतः स्वच्छता की जिम्मेदारी संस्थाओं, सरकार और संगठनों की है इस जिम्मेदारी को हम सभी पूरा करे तो स्वच्छ भारत मिशन और उन्नति करेगा।
श्री परमजीत सिंह चंडोक जी ने कहा कि एक पिता एकस के हम वारिस अतः हमें जल और स्वच्छता के लिये मिलकर कार्य करना होगा। ऐसा कहा जा रहा है कि आने वाले कुछ समय में जल की समस्यायें बढ़ सकती है इसलिये हम सभी को वॉटर हार्वेस्टिंग पर अधिक ध्यान देना होगा।
किन्नर अखाड़ा महामण्डलेश्वर श्री लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी जी ने कहा कि आत्मा का कोई लिंग नहीं होता। दुनिया में कोई व्यक्ति ऐसा नहीं है जो चाहे कि हम पीछे छुट जायें, ऐसा कोई नहीं चाहता। सरकार सभी को लिये प्रयास करती है लेकिन कई बार लोगों तक कुछ नहीं पहुंचता। उन्होने कहा कि सभी को अपने अधिकर और हक के बारे में पता होना चाहिये। हमें एकजुट होकर अपनी आवाज को उठाना होगा। उन्होने कहा कि हमें भी भारत में समान स्तर चाहिये। प्रत्येक फार्म पर हमारे जेन्डर का भी उल्लेख हो।

पादरी फिलिप ने कहा कि अब समय ’फेथ इन एक्शन’ का है। वैसे तो धर्म और धर्मगुरूओं का कार्य लोगों को भगवान के पास जाने का रास्ता दिखाना है। ईसाई धर्म की पुस्तक में लिखा है कि प्रभु ने सबसे पहले आकाश और धरती को बनाया तब वह स्वच्छ थी परन्तु अब मैली हो गयी है अतः हम सभी का कर्तव्य है कि हम इसे स्वच्छ, सुन्दर और पहले जैसा बनाये। हम अपने चारो ओर जो समस्यायें देख रहे हैं वह मानव निर्मित है अतः हमें अपनी सोच को बदलना होगा तभी हम इनका समाधान कर सकते हैं।

साध्वी शिलाची जी, ने कहा कि अक्सर मैने देखा है कि सन्यासी की दृष्टि मोक्ष प्राप्ति की होती है परन्तु स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, धरती की समस्याओं के समाधान का जो कार्य कर रहे हैं वास्तव में विलक्षण कार्य है। उन्होने कहा कि ईश्वर एक है मान्यतायें अलग-अलग हो सकती हैं अतः धरती से जुड़ी समस्याओं के लिये हम सभी को एकजुट होना होगा और एक साथ आना होगा। 
मुफ़्ती नसीहुर रहमान जी, ने कहा कि “दिल बदल सकते है ज़ज्बात बदल सकते हैं, यारो तुम बदलो तो दुनिया बदल सकती है।’’ परमार्थ निकेतन की धरती मुझे मेरी माँ जैसी लगती है।

डब्ल्यू एस एस सी सी जिनेवा से आये जेम्स ने लीव नो वन बिहाइंड समिट में आये सभी प्रतिभागियों को धन्यवाद दिया। साथ पूज्य स्वामी जी, साध्वी जी एवं जीवा की पूरी टीम को धन्यवाद देते हुये कहा कि इस सम्मेलन के लिये परमार्थ निकेतन सबसे उपयुक्त स्थान है। हम सभी मिलकर, एकजुट होकर इन वैश्विक समस्याओं पर विजय प्राप्त कर सकते हैं।
शिखर सम्मेलन में सहभाग हेतु दिल्ली, उत्तरप्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, कर्नाटक, तेलंगाना, पंजाब, महाराष्ट्र, उत्तराखण्ड, हरियाणा, बिहार, गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान व अन्य राज्यों के 250 प्रतिभागी और कनाडा, संयुक्त राष्ट्र, जिनेवा से आये विशेषज्ञों ने सहभाग किया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के सान्निध्य में सभी ने विश्व स्तर पर स्वच्छ जल की आपूर्ति हेतु वॉटर ब्लेसिंग सेरेमनी सम्पन्न की। सभी धर्मगुरूओं और प्रतिभागियों ने स्वच्छता और स्वच्छ जल के लिये मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया। सभी पूज्य संतों एंव धर्मगुरूओं को पर्यावरण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया गया। तत्पश्चात सभी ने विश्व विख्यात गंगा आरती में सहभाग किया।

छत्तीसगढ़, रायपुर से “सबके लिए विकास” महाअभियान का शुभारंभ होगा – आचार्य लोकेश

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल व मुख्यमंत्री करेंगे राजभवन मे ‘सभी के लिए विकास’ सम्मेलन का उदघाटन

महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर अहिंसा विश्व भारती द्वारा छत्तीसगढ़ राजभवन में विशेष कार्यक्रम

नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ की राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उइके एवं मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल रायपुर मे अहिंसा विश्व भारती संस्था द्वारा आयोजित ‘सभी के लिए विकास’ राष्ट्रीय सम्मेलन का उदघाटन करेंगे। गृह व सार्वजनिक निर्माण मंत्री ताम्रध्वज साहू समारोह के विशिष्ट अतिथि होंगे। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जन्म जयंती वर्ष के उपलक्ष में अहिंसा, शांति, सद्भावना और समानता के संदेश को जन जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से शांतिदूत आचार्य लोकेशजी के मार्गदर्शन मे अहिंसा विश्व भारती संस्था 20 दिसम्बर को सुबह 11:30 बजे छत्तीसगढ़ राजभवन के दरबार हाल में सम्मेलन का आयोजन करने जा रही है। उल्लेखनीय है कि पूरे भारत मे इस प्रकार के 25 सम्मेलनों का आयोजन अहिंसा विश्व भारती द्वारा किया जा रहा है।

अहिंसा विश्व भारती संस्था के संस्थापक आचार्य लोकेशजी ने बताया कि ‘सभी के लिए विकास’ राष्ट्रीय सम्मेलन जनमानस को जाति, धर्म व संप्रदाय से ऊपर उठकर सभी के लिए विकास की एक नई दिशा दिखाएगा। संस्था 25 सम्मेलनों का आयोजन करने जा रही है जिसके माध्यम से महात्मा गांधी की शिक्षाएं जन जन तक प्रसारित होंगी।  यह न केवल एक ऐतिहासिक कदम है बल्कि राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका भी निभाएगा।

आचार्य लोकेश
ने बताया कि छत्तीसगढ़ के एतिहासिक शहर रायपुर में ‘सभी के लिए विकास’ राष्ट्रिय
सम्मेलन विचार-मंथन प्रदेश के लिए उपयोगी सिद्ध होगा। उन्होने कहा कि विकास के
समान अवसर जब सभी को नहीं मिलते है तब समाज मे असंतोष उत्पन्न होता है समाज मे
व्याप्त हिंसा और खासकर नक्सलवादी हिंसा का एक बड़ा कारण है गरीबी, अभाव और
असंतुलित विकास है इसके कारण से हमारे समाज में दो वर्ग उत्पन्न हो गए है एक गरीब
और दूसरा अमीर किन्तु स्वस्थ समाज के लिए गरीबी व अभाव बाधक तो है ही किन्तु
अत्यंत विलासितापूर्ण जीवन शैली भी समस्या उत्पन्न करती है। उन्होने कहा कि हिंसा
और आतंक किसी समस्या का समाधान नहीं है हिंसा प्रतिहिंसा को जन्म देती है विकास के
लिए शांति आवश्यक है समाज मे शांति व सद्भावना पूर्ण माहौल नहीं होगा तो निवेशक भी
नहीं आएंगे। उन्होने अहिंसा विश्व भारती के कार्यकर्ताओ को आह्वान करते हुए कहा कि
वे ऐसी कार्य-योजना तैयार करें जिससे प्रदेश मे कोई भी शिक्षा और चिकित्सा के लिए
वंचित न रहे तथा आजीविका के संसाधन भी उन्हे संतुलित ढंग से मिल सके। ऐसा करके ही
हम महात्मा गांधी के स्वस्थ  समाज संरचना
के स्वप्न को साकार कर सकते है।

भारत के
महामहिम राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविन्द ने 26 सितम्बर को राजधानी दिल्ली में
अहिंसा विश्व भारती संस्था द्वारा महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर आयोजित इन 25
कार्यक्रम की शृंखला का उदघाटन किया था । संस्था ने अब तक महाराष्ट्र के मुंबई, गुजरात के
सूरत, पंजाब के चंडीगढ़ मे कार्यक्रम आयोजित कर चुकी है महाराष्ट्र में
केन्द्रीय मंत्री रामदास आठवले, गुजरात में राज्यपाल ओ. पी. कोहली एवं
पंजाब में राजपाल वी.पी. सिंह बदनोर द्वारा उदघाटन किया गया था।

अहिंसा विश्व
भारती द्वारा आगामी कार्यक्रमों के अनुसार जनवरी माह में मध्य प्रदेश राजभवन मे
राज्यपाल लाल जी टंडन एवं फ़रवरी माह में केरल राजभवन मे राज्यपाल आरिफ़ मोहम्मद खान
एवं मणिपुर राजभवन में राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला द्वारा उदघाटन किया जाएगा।  संस्था इसी तरह,
उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरयाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, असम, ओड़ीशा, कर्नाटक, तमिलनाडू, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना सहित
देश के लगभग सभी प्रांतो में एवं अंतिम कार्यक्रम में न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त
राष्ट्र संघ के मुख्यलाय पर आयोजित होगा।

सम्मेलन के
संयोजक श्री प्रकाश लोढ़ा ने बताया कि रायपुर मे राष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारियां
ज़ोर शोर से चल रही है। आपसे निवेदन है कि 20 दिसम्बर को प्रात:
11:30 बजे राजभवन के दरबार हाल मे संगोष्ठी को कवर करने की कृपा करें।

परमार्थ निकेतन में हो रहे ‘नो वन बिहाइंड समिट’ के जरिए वॉटर, सैनिटेशन और हाइजीन के क्षेत्र में कोई पीछे न छुट जाये

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में तीन दिवसीय ’नो वन बिहाइंड वैश्विक शिखर सम्मेलन’ का आयोजन किया जा रहा है। इस शिखर सम्मेलन में अनेक धर्मो के धर्मगुरू, भारत में संयुक्त राष्ट्र की टीम के सदस्य, राज्य सरकार से मंत्रीगण व अधिकारीगण, नागरिक समाज, निजी क्षेत्रों, मीडिया, खेल जगत, फिल्म जगत और अन्य गणमान्य अतिथि सहभाग कर रहे हैं।
इस शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य विशेष रूप से महिलाओं, युवाओं और विभिन्न क्षेत्रों के लोगो के सामाजिक जुड़ावों को बढ़ावा देने हेतु योगदान प्रदान करना तथा भारत सरकार के प्रयासों और स्वच्छ भारत मिशन को सहयोग और समर्थन प्रदान करना है एवं ’’लीव नो वन बीहाइंड’’ तथा भारत सरकार के ओडीएफ प्लस के मौजूदा लॉंच को पूर्ण सहयोग प्रदान करना है। साथ ही  भारत सरकार की संयुक्त राष्ट्र टीम को वर्ष 2020 की स्वैच्छिक राष्ट्रीय समीक्षा हेतु भारत सरकार को समर्थन और सहयोग प्रदान करना है। संयोगवश वर्ष 2020 में संयुक्त राष्ट्र संघ और एचआरसी द्वारा जल और स्वच्छता के मानवाधिकारों की मान्यता की 10 वीं वर्षगांठ और एजेंडा 2030 की 5 वीं वर्षगांठ भी मनायी जायेगी।
इस शिखर सम्मेलन में केन्द्र और राज्य सरकार, नागरिक समाज, निजी क्षेत्रों, मीडिया, खेल आदि के अलावा सभी सम्बंधित संस्थानों और संगठनों के 10 से 15 सदस्यों को आमंत्रित किया गया है। इन्हें 15 समूहों में वर्गीकृत किया जायेगा। इस 15 समूहों के सदस्यों को सतत विकास लक्ष्य 6 तथा संयुक्त राष्ट्र टीम के दिशानिर्देशों और विभिन्न समूहों के लिये तैयार संचरित प्रश्नावली का उपयोग करके वॉटर, सैनिटेशन और हाइजीन के क्षेत्र में आने वाली चुनौतियों के समाधान हेतु दिशानिर्देश प्रदान किये जायेंगे।
लीव नो वन बिहाइंड शिखर सम्मेलन में युवा, महिलायें, बच्चे, दलित, आदिवासी, ट्रांसजेंडर और लेस्बियन, प्रवासियों, शहरी गरीब, विकलांग लोग,  बुजुर्ग, किशोर, किसान और भ्प्ट से पीड़ित लोग, झोंपड़ीवासी, बेघर, मैला ढोने वाले, यौनकर्मी आदि को भारत के विभिन्न राज्यों से 250 से अधिक लोगो को आंमत्रित किया गया है। तीन दिनों तक उन्हें वॉटर, सैनिटेशन और हाइजीन, मासिक धर्म स्वच्छता, ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन (जैविक, प्लास्टिक, ग्रे वॉटर और मल, कीचड़ प्रबंधन) प्रशिक्षित किया जायेगा। वास्तव में यह शिखर सम्मेलन स्वच्छ भारत मिशन को और आगे ले जाने में सहायक सिद्ध होगा।
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी ने भारत के विभिन्न राज्यों से आ रहे प्रतिभागियों का गंगा के पावन तट और हिमालय की गोद  में स्थित परमार्थ निकेेतन में सभी का स्वागत किया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि लीव नो वन बिहाइंड शिखर सम्मेलन के माध्यम से संयुक्त रूप से किया गया यह प्रयास मानव और प्रकृति के कल्याण के नये मार्ग खोलेगा तथा पर्यावरण को समावेशी और सतत बनाने में मदद करेगा। उन्होने कहा कि भारत की जनता ने अनेक अवसरों पर एकजुटता का परिचय दिया अब हम सभी को पर्यावरण एवं जल संरक्षण के लिये एकजुट होना है।
स्वामी जी ने परमार्थ गंगा आरती में सभी प्रतिभागियों को जल संरक्षण का संकल्प कराया। शिखर सम्मेलन में सहभाग हेतु दिल्ली, उत्तरप्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, कर्नाटक, तेलंगाना, पंजाब, महाराष्ट्र, उत्तराखण्ड, हरियाणा, बिहार, गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान से अब तक 150 प्रतिभागी और कनाडा, संयुक्त राष्ट्र से विशेषज्ञों ने सहभाग किया

विराट भक्ति सत्संग महोत्सव में सुधांशु जी महाराज ने दिए तीनों शरीरों को स्वस्थ रखने के मन्त्र

भक्ति में प्रीत हो और मन में श्रद्धा व विश्वास हो तो मनुष्य चढ़ जाता है जीवन की अद्भुत ऊँचाइयाँ

”कोई हंस-हंस के जीता है, कोई मरता है रो-रोकर”

भिलाई। भक्ति में
प्रीत हो, मन में सच्ची
श्रद्धा और विश्वास हो तो व्यक्ति की सफलता में कोई सन्देह नहीं रह जाता। ऐसा
व्यक्ति जीवन में सफलता की अनुपम ऊँचाइयाँ चढ़ता चला जाता है। न केवल वह जिंदगी की
लौकिक जगत की यानी भौतिक उपलब्धियाँ हस्तगत कर लेता है बल्कि अलौकिक क्षेत्र में, आत्मिक जगत में
निरन्तर ऊँचा उठता चला जाता है। ऐसे व्यक्ति इस सृष्टि के नियन्ता के, परमपिता परमात्मा
के अतिप्रिय होते हैं, उनके सन्निकट होते हैं।

यह बात आज यहाँ
आनन्दधाम नयी दिल्ली से भिलाई आये राष्ट्र के जाने-माने मनीषी एवं विश्व जागृति
मिशन के संस्थापक-संरक्षक आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज ने कही। वह मिशन के
भिलाई-दुर्ग मण्डल द्वारा आयोजित तीन दिनी विराट भक्ति सत्संग महोत्सव के तीसरे
दिन के पूर्वाह्नकालीन सत्र में उपस्थित जनसमुदाय को सम्बोधित कर रहे थे।
इस्पातनगरी भिलाई के आईटीआई ग्राउण्ड में हजारों की संख्या में मौजूद स्वास्थ्य
जिज्ञासुओं को उन्होंने स्वस्थ-वृत्त के भी अनेक फार्मूले दिए। उन्होंने उन्हें
ध्यान की गहराइयों में उतारा तथा ध्यान के माध्यम से अपने भीतर प्रसुप्त पड़ी
क्षमताओं को जागृत करने की विविध विधि प्रेरणाएँ दीं। इसके पूर्व आचार्य अनिल झा
द्वारा सभी ध्यान साधकों को योगासनों की सूक्ष्म क्रियाएँ भी करायी गयीं। इस बीच
औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान के पावर ग्राउण्ड में अद्भुत प्राण ऊर्जा के प्रवाहमान
होने की अनुभूति सभी स्त्री-पुरुषों को हो रही थी।

श्री सुधांशु जी
महाराज ने कहा कि धरती का प्रत्येक व्यक्ति सुखी रहना चाहता है, उसका जीवन लक्ष्य
होता है-आनन्द पाना, आनन्दित रहना। इस आनन्द की प्राप्ति
के लिए वह हर उपाय करता है, हर उद्यम करता है। आनन्द किस चीज में
है, यह तय करने के लिए
एक समझ की आवश्यकता पड़ती है, विवेक की जरूरत होती है। यह विवेक, यह समझ देता है
अध्यात्म। जब व्यक्ति आध्यात्मिक बनता है, तब वह अपने शरीर की स्वस्थता पर पूरा
ध्यान देता है, अपने को खुश रखने के सही उपाय करता है, वह स्थूल, सूक्ष्म व कारण इन
तीनों शरीरों को स्वस्थ रखने के हर सम्भव प्रयास करता है और उसके ये सभी प्रयत्न
निश्चित ही सफल होते हैं।

श्रद्धेय महाराजश्री ने कहा कि यह सफलता तब मिलती है, जब व्यक्ति हर आदत को जीवन में पक्का करने के लिए न्यूनतम 21 दिन या अधिकतम 40 दिन का अभ्यास करता है। यह अभ्यास करने से वे आदतें सुदृढ़ आकार लेती जाती है। यही आदतें एक दिन ‘संस्कार’ बन जाती है। ये संस्कार व्यक्ति की पीढ़ी-दर-पीढ़ी में हस्तातंरित होते हैं। अतः हर किसी को इस ‘संस्कार-यात्रा-पथ’ पर अवश्य चलना चाहिए। ऐसा बन जाना ही वास्तव में आध्यात्मिक बन जाना है, अच्छा बन जाना है। उन्होंने सभी से अपने जीवन को श्रेष्ठ से श्रेष्ठतर बनाने का आह्वान किया।

आज मध्याहनकाल में सभा स्थल पर ‘दीक्षा संस्कार’ का आयोजन किया गया। इस मौके पर बड़ी संख्या में स्त्री-पुरुषों ने गुरु-दीक्षा ग्रहण की। विश्व जागृति मिशन के भिलाई-दुर्ग मण्डल के प्रधान श्री चमन लाल बंसल ने बताया कि भिलाई ज्ञान यज्ञ महोत्सव आज सायंकाल छः बजे सम्पन्न हो जाएगा।

उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य पहुंचीं परमार्थ, पुष्प वर्षा और वेद मंत्रों से ऋषिकुमारों ने किया दिव्य स्वागत

परमार्थ गंगातट पर भारतीय पाश्र्वगायक श्री सुरेश वाडेकर जी मधुर आवज में संगीत संध्या का आयोजन
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में उत्तराखण्ड की राज्यपाल महामहिम बेबी रानी मौर्य जी और भारतीय प्लेबैक सिंगर सुरेश वाडेकर ने शिरकत की। परमार्थ गंगा तट पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या का उद्घाटन उत्तराखण्ड राज्यपाल श्रीमती बेबी रानी मौर्य, परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती, जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती ने दीप प्रज्जवलित कर किया।
स्टार कलाकार बालीवुड प्लेबैक सिंगर सुरेश वाड़ेकर ने परमार्थ निकेतन में दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। उनके संगीत पर विदेशियों ने भी खूब नृत्य किया। उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य अपने परिवार के साथ परमार्थ निकेतन पहुंचीं उन्होंने मां गंगा की पूजा अर्चना की। साथ ही स्वामी चिदानन्द सरस्वती के पावन सान्निध्य और आशीर्वाद से उन्होंने अपने पोते का नामकरण संस्कार किया। बच्चे का नाम शिवांग रखा गया।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि नाम का व्यक्ति के जीवन पर बहुत गहरा असर पड़ता है। बच्चे का जो नाम होता है उन गुणों की अनुभूति उसे होती रहती है। नामकरण संस्कार के विषय में स्मृति संग्रह में लिखा है
‘आयुर्वर्चोअभिवृध्दिश्च सिध्दिव्र्यवहृतेस्तथा। नामकर्मफलं त्वेतत् समुद्दिष्टं मनीषिभिः।’
अर्थात नामकरण संस्कार से आयु तथा तेज की वृद्धि होती है और लौकिक व्यवहार में नाम की प्रसिद्धि से व्यक्ति का अलग अस्तित्व बनता है। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज और महामहिम बेबी रानी मौर्य की महिला सशक्तिकरण, एकल उपयोग प्लास्टिक का उपयोग न करने, पर्यावरण और हिमालय संरक्षण के विषय में विस्तृत चर्चा हुई।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि उत्तराखण्ड जैव विविधता से समृ़द्ध राज्य है। यह राज्य प्रकृति की जींवतता को दर्शाता है तथा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी समृद्ध है। हिमालय और गंगा के सौन्दर्य और पवित्रता को बनाये रखने के लिये एकल उपयोग प्लास्टिक का उपयोग बंद किया जाना चाहिये।

महिला सशक्तिकरण पर चर्चा करते हुये स्वामी जी ने कहा कि भारत में महिलाओं की भूमिका बदल रही है वे अपने अधिकारों और स्वतंत्रता के विषय में जागरूक हो रही है परन्तु कुछ क्षेत्रों में अभी भी इस ओर कार्य करने की जरूरत है। वर्तमान समय में हो रहे पर्यावरणीय प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य और जीवन स्तर पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुये कहा कि हमारे राज्य को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिये चरणबद्ध और सतत विकास की आवश्यकता है, उसमें भी अगर विकास पर्यावरण संरक्षण के जरिये प्राप्त किया जाये तो बेहतर होगा।
स्वामी जी ने कहा कि संगीत एक ऐसी विधा है जिसके तार हृदय से जुड़ते है। सभी संगीतज्ञों का आहवान करते हुये स्वामी जी ने कहा कि संगीत के मंच से पर्यावरण और जल संरक्षण का संदेश प्रसारित किया जाये तो हमें इसके प्रभावी परिणाम प्राप्त हो सकते है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने प्लेबैक सिंगर सुरेश वाड़ेकर, महामहिम बेबी रानी मौर्य को पर्यावरण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया। सभी ने परमार्थ गंगा तट पर होने वाले विश्व शान्ति हवन में आहुति प्रदान कर गंगा आरती में सहभाग किया।  

अहिंसा विश्व भारती का समाज निर्माण मे विशिष्ट योगदान – भूपेश बघेल, मुख्यमंत्री

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल व मुख्यमंत्री अहिंसा विश्व भारती के समारोह मे भाग लेंगे

महात्मा
गांधी की 150वीं जयंती वर्ष पर छत्तीसगढ़ राजभवन  मे होगा विशेष समारोह

नई
दिल्ली
अहिंसा
विश्व भारती के संस्थापक आचार्य डॉ. लोकेशजी ने छतीसगढ़ के मुख्यमंत्री से श्री
भूपेश बघेल एवं गृह व सर्वजनिक निर्माण मंत्री श्री ताम्रध्वज साहू से भेंट कर
महात्मा गाँधी के 150वें जन्म जयंती के उपलक्ष्य मे 20 दिसम्बर को छत्तीसगढ़ राजभवन
मे आयोजित होने वाले कार्यक्रम “सभी के
लिए विकास: सवच्छ भारत
, समृद्ध भारत की जानकारी
दी  उन्होने बताया कि राज्यपाल सम्मेलन का उदघाटन करेंगी।  आचार्य लोकेश
ने मुख्यमंत्री को अहिंसा विश्व भारती द्वारा महात्मा गाँधी के 150वें जन्म जयंती
वर्ष पर देश विदेश में किये जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों के बारे में भी चर्चा की। छत्तीसगढ़
के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल एवं गृह व सर्वजनिक निर्माण मंत्री श्री ताम्रध्वज साहू ने छत्तीसगढ़ राजभवन में आयोजित हो रहे समारोह मे भाग लेने की सहर्ष
स्वीकृति प्रदान की।

आचार्य
लोकेश ने इस अवसर पर कहा कि भगवान महावीर के अहिंसा के उपदेश को महात्मा गाँधी ने
जीवन में उतारा। अहिंसा के माध्यम से उन्होंने देश को आजादी दिलाई और राष्ट्र को
विकास की ओर अग्रसर किया। महात्मा गाँधी जन्म जयंती वर्ष के अवसर पर अहिंसा विश्व
भारती संस्था देश के हर प्रदेश में कार्यक्रम आयोजित कर रही है और इसी श्रृंखला 
में छत्तीसगढ़ में भी कार्यकम का आयोजन किया जा रहा है।

छतीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा कि भारत
तेज गति से विकास कर रहा है  लेकिन हमें यह भी
नहीं भूलना चाहिए कि देश की 20 फीसदी
आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन बिता रही है और उनमें से 20 प्रतिशत निरक्षर हैं।  आज देश के सामने ये
चुनौतियां हैं और विकास के जरिए ही गरीबी, निरक्षरता आदि से निबटा जा सकता है। उन्होने
आचार्य लोकेश के नेतृत्व में अहिंसा विश्व भारती संस्था द्वारा किए जा रहे कार्यों
कि सराहना करते हुए कहा कि संस्था द्वारा देश भर में इस तरह के कार्यक्रमों से
समाज को नई दिशा मिलेगी ।

समय की कीमत समझने वाले होते हैं सफल, वे बनते हैं महान – सुधांशु जी महाराज

सत्संग स्थल पर लगे एक दर्जन स्टॉल दे रहे हैं विजामि गतिविधियों की जानकारियाँ

विराट भक्ति सत्संग महोत्सव में मची सार्थक प्रेरणाओं की धूम

”वो योग्यता दो सत्कर्म कर लूँ, हृदय में अपने सदभाव भर लूँ”

भिलाई। विश्व जागृति मिशन के भिलाई-दुर्ग मण्डल
द्वारा आयोजित तीन दिवसीय विराट भक्ति सत्संग की के आज के पूर्वाह्नकालीन सत्र में
मिशन प्रमुख आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज ने सार्थक सफल एवं आनन्ददायी जीवन की
दिशाधारा के अनेक महत्वपूर्ण सूत्र सत्संग सभागार में उपस्थित जनसमुदाय को दिए।
भारी संख्या में मौजूद ज्ञान-जिज्ञासुओं से उन्होंने कहा कि जो लोग समय की कीमत
समझ लेते हैं वे जीवन के हर क्षेत्र में सफल होते हैं और वे महानता के पथ पर
निरन्तर बढ़ते चले जाते हैं। उन्होंने सभी से समय की कद्र करने को कहा और जिंदगी की
विभिन्न गतिविधियों में समय का सही एवं समुचित ढंग से नियोजन करने के अनेक मंत्र
दिए। कहा कि समय का संयम करने में सफल हो गए व्यक्तियों से इन्द्रियों का संयम सहज
ही सध जाता है। उन्होंने वाणी के संयम के अलावा अर्थ (धन) के संयम की बातें भी सभी
को बतायीं।

प्रखर अध्यात्मवेत्ता श्री सुधांशु जी महाराज
ने जनमानस को कई जीवन सूत्र सिखलाए। कहा कि जीवन की व्यथाओं को दूर करने के लिए
जीवन की व्यवस्थाओँ को ठीक करना पड़ता है। चिन्ताओं को दूर करने के लिए चिन्तन को
ठीक करना पड़ता है। कहा कि चिन्ताएं खुद-ब-खुद आ जाती है लेकिन चिन्तन के लिए
प्रयास करना होता है। चिन्ता की कोई दिशाधारा नहीं होती, चिन्तन में उसके
बिन्दु सम्मिलित होते हैं। उन्होंने जीवन को सुव्यवस्थित बनाने के लिए गीता को
आधार बनाकर ज्ञान-जिज्ञासुओं को अनेक जीवन मन्त्र दिए।

आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज द्वारा गाये गए
गीत ”हे नाथ अब तो ऐसी दया हो जीवन निरर्थक जाने न पाए” को
जब सैकड़ों व्यक्तियों ने एक साथ गाया, तब सत्संग सभा स्थल का वातावरण बड़ा ही
सुचितापूर्ण व सुरम्य बन उठा। उधर मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की ननिहाल
स्थली ‘ॐ नमः शिवाय’ के अद्भुत समूह गायन से भी गूँजी।
उपस्थित जनसमुदाय ने अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण की सभी
बाधाओं के हट जाने पर प्रसन्नता जतायी और राजा रामचंद्र के जयकारे सोल्लास लगाए।

इसके पूर्व सर्वश्री हर्षवीर गुप्ता, केकेएन
सिंह, महेन्द्र देवांगन तथा शेखर जोशी ने सपत्नीक सत्संग मंच पर जाकर
व्यासपूजन का विशेष अनुष्ठान सम्पन्न किया। नई दिल्ली से भिलाई आये विश्व जागृति
मिशन के अधिकारी श्री प्रयाग शास्त्री ने बताया कि सत्संग स्थल पर एक दर्जन से
ज्यादा स्टॉल लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से जनसेवा की अनेक
गतिविधियों का प्रदर्शन किया गया है। इन स्टॉलों में साहित्य, वृद्धजन
सेवा, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा सेवा, गौ सेवा,
कैलाश
यात्रा, अनाथ शिक्षा सेवा, धर्मादा सेवा, गुरुकुल आदि के
स्टॉल शामिल हैं।

आनन्दधाम नई दिल्ली से भिलाई पहुँचे मिशन
निदेशक श्री राम महेश मिश्र के मुख्य मंचीय समन्वयन में चले सत्संग समारोह के
मुख्य आयोजक एवं मिशन के भिलाई-दुर्ग मण्डल के प्रधान श्री चमन लाल बंसल ने बताया
कि  सत्संग महोत्सव में दूर-दूर से भारी
संख्या में ज्ञान-पिपासु भिलाई आ रहे हैं।

वरिष्ठ समाजसेवी तथा विश्व जागृति मिशन रायपुर
मण्डल के प्रधान श्री सुनील सचदेव ने बताया कि मार्च 2018 में लिए गए
संकल्प के अनुसार यहाँ परसदा के समीप स्थित मिशन के ब्रह्मलोक आश्रम में कैलाश
मानसरोवर की प्रतिकृति का निर्माण किया जा रहा है। इसका निर्माण जल्द से जल्द
कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। कहा कि यह मन्दिर अपने आपमें विश्व का अनूठा
मन्दिर होगा।

भक्ति सत्संग महोत्सव में सुधांशु जी महाराज ने कहा, ”सांसों की तार-तार में गुरु नाम को पिरो लो”

भक्ति सत्संग महोत्सव में गुरु की समर्थ सत्ता पर हुई भावपूर्ण चर्चा

आएंगे वो जायेंगे राजा रंक फ़क़ीर। एक सिहांसन चढ़ चले, बांध चले जंजीर।।

भिलाई। शुक्रवार
शाम से चल रहे विराट भक्ति सत्संग महोत्सव में आज सन्ध्याकाल राष्ट्र के प्रख्यात
चिन्तक, विचारक एवं
अध्यात्मवेत्ता आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज ने हजारों की संख्या में उपस्थित
ज्ञान-जिज्ञासुओं का सशक्त मार्गदर्शन किया। विश्व जागृति मिशन के भिलाई-दुर्ग
मण्डल द्वारा आयोजित तीन दिवसीय सत्संग समारोह में उन्होंने गुरु महिमा पर विस्तार
से प्रकाश डाला। उन्होंने समर्थ मार्गदर्शक के सान्निध्य में विकसित कुछ चुनिन्दा
व्यक्तियों के इतिहास-प्रसंग सुनाए और बताया कि किस तरह वे सामान्य मानव से
महापुरुष बनते हुए चले गए।

आचार्यवर सुधांशु
जी महाराज ने कहा कि वे व्यक्ति बड़े सौभाग्यशाली होते हैं जो एक तपस्वी ऋषि से, महान साधक गुरु से, परमज्ञानी पारखी
अनुभवी जौहरी से जुड़ पाते हैं। शिष्य की उर्वर आन्तरिक भूमि में ही गुरु का
शक्तिशाली बीज पड़ता है और गुरु उसे वटवृक्ष बनाकर उसकी कीर्ति को सदा-सदा के लिए
अमर बना देते हैं। उन्होंने ठाकुर रामकृष्ण परमहंस-स्वामी विवेकानंद, समर्थ गुरु
रामदास-शिवाजी, श्रीकृष्ण-अर्जुन जैसे इतिहास प्रसिद्ध गुरुओं और शिष्यों का विशेष
उल्लेख किया और कहा कि मनुष्य की प्रथम गुरु माता होती है। पिता और शिक्षकों से
गुजरती हुई शिष्य की यात्रा जब सामर्थ्यशाली सदगुरु तक पहुँचती है तब मानव के
सौभाग्य के द्वार खुल जाते हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग अपनी माँ, पिता, शिक्षकों तथा
सदगुरु का सम्मान करते हैं और उनके निर्देशनों का अनुपालन करते हैं, तब उन पर परमात्मा
का सबल संरक्षण सदा-सर्वदा साथ रहता है।

विश्व जागृति मिशन
के भिलाई-दुर्ग मण्डल के प्रधान श्री चमन लाल बंसल ने बताया कि रविवार-15 दिसम्बर की
सन्ध्याकाल का अन्तिम सत्र 4 से 6 बजे तक सम्पन्न होगा। उन्होंने बताया
कि इस दिन मध्याह्नकाल में आयोजित गुरुदीक्षा कार्यक्रम के लिए बड़ी संख्या में
श्रद्धालु पंजीयन करा रहे हैं।