परमार्थ निकेतन में हो रहे ‘नो वन बिहाइंड समिट’ के जरिए वॉटर, सैनिटेशन और हाइजीन के क्षेत्र में कोई पीछे न छुट जाये

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में तीन दिवसीय ’नो वन बिहाइंड वैश्विक शिखर सम्मेलन’ का आयोजन किया जा रहा है। इस शिखर सम्मेलन में अनेक धर्मो के धर्मगुरू, भारत में संयुक्त राष्ट्र की टीम के सदस्य, राज्य सरकार से मंत्रीगण व अधिकारीगण, नागरिक समाज, निजी क्षेत्रों, मीडिया, खेल जगत, फिल्म जगत और अन्य गणमान्य अतिथि सहभाग कर रहे हैं।
इस शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य विशेष रूप से महिलाओं, युवाओं और विभिन्न क्षेत्रों के लोगो के सामाजिक जुड़ावों को बढ़ावा देने हेतु योगदान प्रदान करना तथा भारत सरकार के प्रयासों और स्वच्छ भारत मिशन को सहयोग और समर्थन प्रदान करना है एवं ’’लीव नो वन बीहाइंड’’ तथा भारत सरकार के ओडीएफ प्लस के मौजूदा लॉंच को पूर्ण सहयोग प्रदान करना है। साथ ही  भारत सरकार की संयुक्त राष्ट्र टीम को वर्ष 2020 की स्वैच्छिक राष्ट्रीय समीक्षा हेतु भारत सरकार को समर्थन और सहयोग प्रदान करना है। संयोगवश वर्ष 2020 में संयुक्त राष्ट्र संघ और एचआरसी द्वारा जल और स्वच्छता के मानवाधिकारों की मान्यता की 10 वीं वर्षगांठ और एजेंडा 2030 की 5 वीं वर्षगांठ भी मनायी जायेगी।
इस शिखर सम्मेलन में केन्द्र और राज्य सरकार, नागरिक समाज, निजी क्षेत्रों, मीडिया, खेल आदि के अलावा सभी सम्बंधित संस्थानों और संगठनों के 10 से 15 सदस्यों को आमंत्रित किया गया है। इन्हें 15 समूहों में वर्गीकृत किया जायेगा। इस 15 समूहों के सदस्यों को सतत विकास लक्ष्य 6 तथा संयुक्त राष्ट्र टीम के दिशानिर्देशों और विभिन्न समूहों के लिये तैयार संचरित प्रश्नावली का उपयोग करके वॉटर, सैनिटेशन और हाइजीन के क्षेत्र में आने वाली चुनौतियों के समाधान हेतु दिशानिर्देश प्रदान किये जायेंगे।
लीव नो वन बिहाइंड शिखर सम्मेलन में युवा, महिलायें, बच्चे, दलित, आदिवासी, ट्रांसजेंडर और लेस्बियन, प्रवासियों, शहरी गरीब, विकलांग लोग,  बुजुर्ग, किशोर, किसान और भ्प्ट से पीड़ित लोग, झोंपड़ीवासी, बेघर, मैला ढोने वाले, यौनकर्मी आदि को भारत के विभिन्न राज्यों से 250 से अधिक लोगो को आंमत्रित किया गया है। तीन दिनों तक उन्हें वॉटर, सैनिटेशन और हाइजीन, मासिक धर्म स्वच्छता, ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन (जैविक, प्लास्टिक, ग्रे वॉटर और मल, कीचड़ प्रबंधन) प्रशिक्षित किया जायेगा। वास्तव में यह शिखर सम्मेलन स्वच्छ भारत मिशन को और आगे ले जाने में सहायक सिद्ध होगा।
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी ने भारत के विभिन्न राज्यों से आ रहे प्रतिभागियों का गंगा के पावन तट और हिमालय की गोद  में स्थित परमार्थ निकेेतन में सभी का स्वागत किया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि लीव नो वन बिहाइंड शिखर सम्मेलन के माध्यम से संयुक्त रूप से किया गया यह प्रयास मानव और प्रकृति के कल्याण के नये मार्ग खोलेगा तथा पर्यावरण को समावेशी और सतत बनाने में मदद करेगा। उन्होने कहा कि भारत की जनता ने अनेक अवसरों पर एकजुटता का परिचय दिया अब हम सभी को पर्यावरण एवं जल संरक्षण के लिये एकजुट होना है।
स्वामी जी ने परमार्थ गंगा आरती में सभी प्रतिभागियों को जल संरक्षण का संकल्प कराया। शिखर सम्मेलन में सहभाग हेतु दिल्ली, उत्तरप्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, कर्नाटक, तेलंगाना, पंजाब, महाराष्ट्र, उत्तराखण्ड, हरियाणा, बिहार, गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान से अब तक 150 प्रतिभागी और कनाडा, संयुक्त राष्ट्र से विशेषज्ञों ने सहभाग किया