क्या आपको पता है इंद्रजाल का असल सच

वाराणसी/ डॉ आनंद के पांडेय। इंद्रजाल का नाम सुनते ही जेहन में एक भयानक जाल आता है इस जाल को आप लोग अलग अलग तरह से जानते हैं। मायावी खेल, तंत्र-मंत्र, काला जादू, वशीकरण, जादू। लेकिन हम आप को बताएंगे कि आखिर इस इंद्रजाल की असलियत क्या है।

इंद्रजाल एक प्राचीन विद्या है जो भारत से शुरू हुई और अब पश्चिमी देशों में भी लोकप्रिय हो गयी है। इंद्रजाल को जादू-विद्या कहना गलत नहीं होगा। हालांकि इस विद्या का गलत इस्तेमाल भी बहुत हुआ है और आज तक भी होता आ रहा है। इसके अंतर्गत मंत्र, तंत्र, मोहन, उच्चाटन, वशीकरण, नाना प्रकार के कौतुक, प्रकाश एवं रंग आदि के प्रयोजनीय वस्तुओं के आश्चर्यजनक खेल, तामाशे आदि कई चीज़े आती हैं। लेकिन काला जादू का ही सबसे ज़्यादा प्रचलन है।

इंद्रजाल जो नाम से ही पता चल रहा है कि ये देवराज इंद्र से जुड़ा है। इंद्र को छल-कपट या चकम देने वाला मन जाता है। इसिलिए इस विद्या का नाम इंद्रजाल पड़ा। रावण, मेघनाद समेत कई राक्षस इस विद्या के ज्ञाता थे। इंद्रजीत तो इस विद्या का महाज्ञानी था क्योंकि वह युध्क्षेत्र में भी बादलों में छिपकर प्रहार करता था। इस विद्या से किसी को भी भ्रमजाल में फसाया जा सकता है और जो इस विद्या का अभ्यास करते हैं उन्हें ऐंद्रजालिक कहते हैं। आज कल इसे जादू का खेल कहते हैं जैसे सर्कस में करतब दिखने वाले, सड़क पर जादू के तमाशे दिखने वाले आदि।

मेघान्धाकार वृष्टकयग्नि पर्वतादभुत दर्शनम। दूरस्थाानानां च सैन्या‍नां दर्शनं ध्व्जमालिनाम।। च्छिन्नापाटितभिन्ना‍नां संस्रुतानां प्रदर्शनम। इतीन्द्र जालं द्विषतां भीत्यगर्थमुपकल्पायेत।।

चाणक्य के शिष्य कामंदक का मानना है कि पूरी सभा में अपनी बात को रख पाना और सभी को अपने तर्क के लिए राज़ी करना बहुत कठिन है। इसलिए उन्होंने इंद्रजाल के राजनीति में प्रयोग के बारे में सुझाव दिए। उनके सुझाव के अनुसार कुछ ऐसा होना चाहिए जिससे दुश्मन की सेना में डर पैदा हो जाए, आसमान में अँधेरा छा जाए, ध्वज अपने आप उड़ने लगे। यह इंद्रजाल से ही हो सकता है। असल में इंद्रजाल वह है जिस पर हमारी आँखे, दिल और दिमाग विश्वास करने के लिए राज़ी न हो। अक्सर हमें लगता है कि यह हमारी आंखों का धोखा है लेकिन यह दिमाग की चतुराई से होता है। जादूगरों के हाथ हमारी नज़रों और दिमाग से कई तेज़ होते हैं इसी कारण हम जादू को समझ नहीं पाते।

आप यह सुन कर चौंक जाएंगे कि इंद्रजाल नाम की एक जड़ी भी है। यह अमूमन समुद्री इलाके में पाई जाती है। माना जाता है कि यदि इसे साफ कपड़े में लपेटकर पूजा घर या मंदिर में रखे तो अनेक प्रकार के लाभ होते हैं। इस जड़ी के बारे में यह भी कहा जाता है कि यह किसी भी टोन-टोटके को बेअसर कर सकती है। आजकल जो वर्चुअल टेक्नोलॉजी, वीडियो गेम और थ्रीडी मूवी चल रही हैं वह सभी इंद्रजाल की विद्या का ही नतीजा है।