भक्ति सत्संग महोत्सव में सुधांशु जी महाराज ने कहा, ”सांसों की तार-तार में गुरु नाम को पिरो लो”

भक्ति सत्संग महोत्सव में गुरु की समर्थ सत्ता पर हुई भावपूर्ण चर्चा

आएंगे वो जायेंगे राजा रंक फ़क़ीर। एक सिहांसन चढ़ चले, बांध चले जंजीर।।

भिलाई। शुक्रवार शाम से चल रहे विराट भक्ति सत्संग महोत्सव में आज सन्ध्याकाल राष्ट्र के प्रख्यात चिन्तक, विचारक एवं अध्यात्मवेत्ता आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज ने हजारों की संख्या में उपस्थित ज्ञान-जिज्ञासुओं का सशक्त मार्गदर्शन किया। विश्व जागृति मिशन के भिलाई-दुर्ग मण्डल द्वारा आयोजित तीन दिवसीय सत्संग समारोह में उन्होंने गुरु महिमा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने समर्थ मार्गदर्शक के सान्निध्य में विकसित कुछ चुनिन्दा व्यक्तियों के इतिहास-प्रसंग सुनाए और बताया कि किस तरह वे सामान्य मानव से महापुरुष बनते हुए चले गए।

आचार्यवर सुधांशु जी महाराज ने कहा कि वे व्यक्ति बड़े सौभाग्यशाली होते हैं जो एक तपस्वी ऋषि से, महान साधक गुरु से, परमज्ञानी पारखी अनुभवी जौहरी से जुड़ पाते हैं। शिष्य की उर्वर आन्तरिक भूमि में ही गुरु का शक्तिशाली बीज पड़ता है और गुरु उसे वटवृक्ष बनाकर उसकी कीर्ति को सदा-सदा के लिए अमर बना देते हैं। उन्होंने ठाकुर रामकृष्ण परमहंस-स्वामी विवेकानंद, समर्थ गुरु रामदास-शिवाजी, श्रीकृष्ण-अर्जुन जैसे इतिहास प्रसिद्ध गुरुओं और शिष्यों का विशेष उल्लेख किया और कहा कि मनुष्य की प्रथम गुरु माता होती है। पिता और शिक्षकों से गुजरती हुई शिष्य की यात्रा जब सामर्थ्यशाली सदगुरु तक पहुँचती है तब मानव के सौभाग्य के द्वार खुल जाते हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग अपनी माँ, पिता, शिक्षकों तथा सदगुरु का सम्मान करते हैं और उनके निर्देशनों का अनुपालन करते हैं, तब उन पर परमात्मा का सबल संरक्षण सदा-सर्वदा साथ रहता है।

विश्व जागृति मिशन के भिलाई-दुर्ग मण्डल के प्रधान श्री चमन लाल बंसल ने बताया कि रविवार-15 दिसम्बर की सन्ध्याकाल का अन्तिम सत्र 4 से 6 बजे तक सम्पन्न होगा। उन्होंने बताया कि इस दिन मध्याह्नकाल में आयोजित गुरुदीक्षा कार्यक्रम के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पंजीयन करा रहे हैं।