इन 10 मंत्रों के जाप से मिलती है हर कष्ट से मुक्ति

ऋषिकेश। भागदौड़ भरी जिंदगी में हर इंसान परेशान है। लोगों को अपने जीवन में कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए व्यक्ति क्या नहीं करता। अगर इंसान इन 10 मंत्रों को पूर्ण समर्पण और श्रद्धा से तप करे, तो वह हर संकट से मुक्ति पा सकता है।

इन मंत्रों के तप करने से कुछ सिद्धियां प्राप्त होती हैं परन्तु इन सिद्धियों को पाना इतना आसान नहीं है। सबसे पहला कार्य अपने शरीर को शुद्ध करना है। इसके पश्चात पूजा के स्थान की शुद्धि करना आवश्यक है। अब पूर्ण एकाग्रता से उस शक्ति का तन और मन से ध्यान किया जाना चाहिए। तभी जाकर हमे फल की प्राप्ति होगी। चलिए जानते है इन मंत्रों के बारे में….

सबसे पहली विद्या देवी कलिका की है। इस विद्या के अंतर्गत काले हकीक की माला से 9 फिर 11 और फिर 21 बार मंत्र का जाप करना होता है।  फलस्वरूप किसी भी बीमारी एवं अकाल मृत्यु से बचा जा सकता है। काली की आराधना कर दुष्ट आत्माओं या क्रूर ग्रहों से भी बचाव किया जा सकता है।

मंत्र- ॐ क्रीं क्रीं क्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं स्वाहा:

दूसरी सिद्धि मां तारा से प्राप्त होती है, जिन्हें श्मशान तारा के नाम से भी पुकारा जाता है। जो व्यक्ति मां तारा की आराधना करता है उसका जीवन सदैव खुशियों से भर जाता है। उस व्यक्ति को मां तीव्र बुद्धि और रचनात्मक क्षमता प्रदान करतीं  हैं। शत्रुओं को खत्म करने के लिए भी श्मशान माता की पूजा होती है। इनकी आराधना के लिए मूंगा, स्फटिक या काले हकीक की माला से जाप होता है। 

मंत्र- ॐ हीं स्त्रीं हुं फट

जो भोग और मोक्ष एक साथ प्रदान करे, वे हैं माता त्रिपुर सुंदरी। कोई भी काम जो सफल या सम्पन्न नहीं हो पा रहा है, वह माता की आराधना से सम्पन्न किया जा सकता है। इस सिद्धि को पाने के लिए रुद्राक्ष की माला का 10 बार जाप करना चाहिए। 

मंत्र- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नम:

मां भुवनेश्वरी सबकी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। उन्हें प्रसन्न करने के लिए स्फटिक की माला से कम से कम 11 या 21 बार जाप करना चाहिए। 

मंत्र- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं नम:

मां छिन्नमस्ता की आराधना से रोज़गार की समस्या, कोर्ट-कचेहरी की समस्या, पति-पत्नी के बीच की समस्याओं से छुटकारा मिलता है। छिन्नमस्ता देवी की पूजा रुद्राक्ष या स्फटीक की माला से होती है। नीचे दिए हुए मंत्र का 11 या 20 बार जाप करना चाहिए। 

मंत्र- श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्र वैरोचनीयै हूं हूं फट स्वाह

तांत्रिक समस्याओं का एक ही साधन है मां त्रिपुर भैरवी। मां की आराधना करने से विवाह में आई बाधाओं से भी मुक्ति मिलती है। मां को प्रसन्न करने के लिए मूंगे की माला का जाप करना चाहिए। 

मंत्र- ॐ ह्रीं भैरवी कलौंह्रीं स्वाहा:

बुरी नजर, तंत्र-मंत्र, जादू-टोने, भूत-प्रेत से मुक्ति पाने के लिए धूमावती मां की सिद्धि प्राप्त की जाती है। कम से कम 9 बार इस मंत्र का जाप मोती या काले हकीक की माला से करें।

मंत्र-  “ॐ धूं धूं धूमावती देव्यै स्वाहा:

बगलामुखी हर समस्या का समाधान निकालने वाली मां हैं। इनकी आराधना में हल्दी की माला का उपयोग होता है क्योंकि पीला धातु इन्हे बहुत पसंद है। इस मंत्र का जाप 8, 16 या 21 बार करना चाहिए।

मंत्र- ॐ ह्लीं बगलामुखी देव्यै ह्लीं ॐ नम:

घर-ग्रहस्थी की हर समस्या का समाधान मां मातंगी की आराधना करके निकला जा सकता है। माता को प्रसन्न करने के लिए स्फटिक की माला से 12 बार जाप करना चाहिए।

मंत्र- ॐ ह्रीं ऐं भगवती मतंगेश्वरी ह्रीं स्वाहा:

धन एवं सुंदरता की देवी जिनकी वजह से आज भी इंद्र को देवराज कहा जाता है, वे हैं देवी कमला। इनकी आराधना कमलगट्टे की माला से 10 या 21 बार जाप करने से होती है।

 मंत्र- ॐ हसौ: जगत प्रसुत्तयै स्वाहा: