योग, जीवन ही नहीं बल्कि सारे जहाँ’ में शाश्वत शान्ति की स्थापना का आधार-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश। क्वालिटी काउंसिल ऑफ इन्डिया एवं इण्डियन योग एसोसिएशन के संयुक्त तत्वाधान में परमार्थ निकेतन आश्रम ऋषिकेश में दो दिवसीय राष्ट्रीय योग कार्यशाला का आयोजन किया गया। योग कार्यशाला का शुभारम्भ परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज एवं इंटरनेशनल योग फेस्टिवल, परमार्थ निकेतन की संयोजक, साध्वी भगवती सरस्वती ने दीप प्रज्जवलित कर किया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ’इण्डियन योग एसोसिएशन’ बोर्ड के प्रमुख सदस्यों में है इस बोर्ड में बाबा रामदेव जी महाराज, श्री श्री रविशंकर जी महाराज, जग्गी वसुदेव जी महाराज एवं श्री डॉ प्रणव पण्ड्या जी है। साध्वी भगवती सरस्वती जी इस बोर्ड की कार्यकारी सदस्य है।
इस दो दिवसीय कार्यशाला का उद्देश्य है उत्कृष्ठ योग शिक्षक तैयार करना जो देश-और विदेश में जाकर भारतीय विद्या योग को सही रूप में प्रस्तुत कर स्वस्थ समाज का निर्माण कर सके। इस कार्यशाला में भारत के विभिन्न प्रांतों से आये 100 से अधिक योग शिक्षकों ने प्रतिभागियों के रूप में  सहभाग किया तथा प्रशिक्षण देने हेतु क्वालिटी कौंसिल ऑफ इन्डिया से आये योग विशेषज्ञ डॉ कृष्णमुर्ति जी, डॉ गणेश राव जी, मनीष पान्डे, डॉ रजनीश शर्मा, महेश त्रिपाठी, सुश्री अंकिता पाण्डे ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया। विशेषज्ञों ने जानकारी दी भारत सहित विश्व के सभी देशों में योग को सराहा जा रहा है एवं जनसमुदाय योग की ओर आकर्षित हो रहा है इसलिये योग शिक्षकों की मांग बढ़ी है। योग का जन्म भारत में ही हुआ है इसलिये भारत सरकार ने उत्कृष्ठ योग शिक्षक तैयार करने हेतु क्वालिटी काउंसिल ऑफ इन्डिया एवं इण्डियन योग एसोसिएशन का गठन किया यहां से प्रशिक्षित एवं प्रमाणपत्र लेने वाले योग शिक्षक उच्च गुणवत्ता एवं उत्कृष्ठ प्रदर्शन करने वाले होंगे।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि ’योग सर्वभौमिक है एवं भारत योग का जन्मदाता है। योग, शरीर, आत्मा और परमात्मा के संयोग का माध्यम है; तनाव से मुक्ति का सबसे कारगर इलाज है ’योग’।  योग के माध्यम से ’जीवन ही नहीं बल्कि सारे जहाँ’ में शाश्वत शान्ति एवं स्वस्थ मानसिकता को स्थापित किया जा सकता है। उन्होनेे सभी देश वासियों से योग को अपनाने का आहृवान किया।

साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि ’योग केवल एक अभ्यास नहीं बल्कि जीवन की प्रक्रिया है; जीवन जीने का विज्ञान है। मानसिक और शारीरिक संतुलन की प्रक्रिया है एवं स्वस्थ जीवन की कुंजी है।

क्वालिटी कौंसिल ऑफ इन्डिया (भारतीय गुणवत्ता परिषद) एवं इण्डियन योग एसोसिएशन की सदस्य अंकिता पाण्डे जी ने जानकारी दी कि यह प्रशिक्षण दो लेवल (स्तर) के रूप में तैयार किया गया है प्रथम स्तर योग इण्सट्रक्टर के लिये होगा इसके लिये किसी प्रमाण-पत्र की आवश्यकता नहीं है परन्तु प्रतिभागियों को क्वालिटी कौंसिल ऑफ इन्डिया की दो चरणों में होने वाली परीक्षा देनी होगी जिसमें थ्योरी एंड प्रैक्टिकल होगा इसमें 70 प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य है। दूसरा चरण योग शिक्षकों के लिये है जिन प्रतिभागियों ने कम से कम 200 घण्टे का योग शिक्षक प्रशिक्षण लिया है वे इसमें भाग ले सकते है उन्हे थ्योरी एंड प्रैक्टिकल परीक्षा देना होगा इसमें 70 प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य है।

इस दो दिवसीय कार्यशाला में सहभाग करने आये गुरूकुल कांगडी विश्वविद्यालय, परमार्थ निकेतन, पंतजलि योगपीठ एवं देव संस्कृति विश्व विद्यालय के प्रोफेसर एवं सहायक प्रोफेसर सहित देश के विभिन्न प्रांतों से आये प्रशिक्षकों को भी दो चरणों वाली परीक्षा को उर्त्तीण करना होगा तत्पश्चात वे योग शिक्षकों के परीक्षक बनकर पूरे देश के विश्वविद्यालय एवं स्कूलों में जा सकते है। वास्तव में आज की कार्यशाला का उद्देश्य योग के प्रति जागरूकता के साथ उत्कृष्ठ प्रशिक्षक तैयार करना है। उन्होने बताया कि विद्यालय एवं विश्व विद्यालय भी क्वालिटी कौंसिल ऑफ इन्डिया के मानकों को पूरा कर इससे जुड़ सकते है।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि आन्तरिक स्वच्छता के लिये योग एवं बाह्म स्वच्छता के लिये पौधा रोपण नितांत आवश्यक हैं अतः जहां पर भी जाकर आप योग की पताका फहरायें वहां पर एक पौधा अवश्य रोपित करें, इस संदेश को चरितार्थ करते हुये पूज्य स्वामी जी ने क्वालिटी कौंसिल ऑफ इन्डिया( भारतीय गुणवत्ता परिषद ) एवं इण्डियन योग एसोसिएशन के सदस्यों को रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया। स्वामी जी के साथ सभी प्रतिभागियों एवं प्रशिक्षको ने वाटर ब्लेसिंग सेेरेमनी सम्पन्न की साथ ही स्वामी जी ने जल संरक्षण का संकल्प कराया।