योग शिक्षक बनें प्रकृति के रक्षक-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में योग टीचर ट्रेनिंग कोर्स का समापन हुआ। योग प्रशिक्षण लेने हेतु भारत सहित विश्व के अनेक देशों यथा स्पेन, चीन, इटली बेल्जियम, बोलीविया, इंडोनेशिया, साउथ कोरिया एवं अन्य देशों से आये योग शिक्षकों ने परमार्थ निकेतन के दिव्य वातावरण में रहकर आभा माताजी एवं डॉ इन्दू शर्मा के मार्गदर्शन में योग, प्राणायाम, ध्यान एवं मंत्र उच्चारण की विद्याओं को सीखा।
योग शिक्षकों ने परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज एवं जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती के सानिध्य में एक माह तक रहकर आध्यात्मिक सत्संग एवं पर्यावरण संरक्षण के विषयों पर आधारित जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
योग कोर्स के समापन अवसर पर स्वामी जी ने सभी योग शिक्षकों को संकल्प कराया ’योग शिक्षक बने प्रकृति के रक्षक’, ’जहां भी जायेंगे योग सिखायेंगे और प्रकृति को बचायेंगे’। सभी योग शिक्षकों को विदाई के समय शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का एवं ’जय गंगे’ अंगवस्त्र भेंट किया।
योग साधकों को सम्बोधित करते हुये स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि ’योग, आन्तरिक वातावरण को स्वच्छ एवं स्वस्थ करता है और प्राणायाम के द्वारा मस्तिष्क को तनाव रहित कर सकारात्मक विचारों का सृजन किया जा सकता है। उन्होने सभी से आहृवान किया कि इस दिव्य तीर्थ से प्राप्त ऊर्जा एवं सृजनशक्ति को प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण में लगाये।’
स्वामी जी ने कहा कि ’प्राणायाम की सार्थकता तभी सिद्व हो सकती है जब प्राणों को ऑक्सीजन मिले और इसके लिये पहले प्रकृति की शरण में जाना होगा; पौधा रोपण करना होगा। उन्होने कहा कि एक मनुष्य जीवन पर्यान्त तक जितनी ऑक्सीजन ग्रहण करता है उसके लिये लगभग 24 से 25 पेड़ों की जरूरत होती है और प्रकृति से हमें यह उपहार स्वरूप प्राप्त होता है। अब यह हम सभी का कर्तव्य है कि भावी पीढियों के लिये भी यह उपहार सुरक्षित रखे इसलिये जहां जायें पौधों का रोपण अवश्य करें।’
साध्वी भगवती सरस्वती ने ’योग, ध्यान एवं जीवन में आध्यात्म एवं दर्शन की उपयोगिता के विषय में योग शिक्षकों से चर्चा करते हुयेे कहा कि योग एवं आध्यात्म की शक्ति से जीवन में विलक्षण परिवर्तन हो सकता है। उन्होने सभी को सात्विक आहार, व्यवहार एवं विचारों के साथ जीवन जीने की प्रेरणा दी।’
योग प्रशिक्षण लेने आये स्पेन से मालिया, भारत से सगन कुशवाह, भूमिका चौहान, रितिका, मुक्ता, मुकेश, कल्पना, चीन से आयेे फू टिंग टिंग, इटली से एलिस बीटा रीटा, बेल्जियम से नैन्सी डेब्यू, बेलीवीया से पटिकनिया विममीना, पामिकीया ओचोआ, इण्डोनेशिया से औरर लोम्बार्ड एवं साउथ कोरिया से वू जिन जांग ने वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी में सहभाग किया तथा पूज्य स्वामी जी का आशीर्वाद प्राप्त कर प्रकृति की रक्षा का संकल्प लिया।