साधना सप्ताह में ध्यान, योग, प्राणायाम के साथ संतों ने दिया वेदान्त पर आख्यान

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के पावन प्रांगण में सात दिनों से( 29 अक्टूबर से 4 नवम्बर) चल रहे साधना सप्ताह का समापन हुआ। महामण्डलेश्वर स्वामी असंगानन्द सरस्वती जी महाराज के पावन सानिध्य में बनारस से आये योगाचार्य श्री रमेश पाण्डे जी ने सात दिनों तक भारत के विभिन्न प्रांतों से आये साधकों को योग, ध्यान एवं प्राणायाम की शिक्षा सहज विद्याओं के माध्यम से दी।

महामण्डलेश्वर जी ने जानकारी दी कि साधना सप्ताह का आयोजन परमार्थ निकेतन के स्थापना वर्ष से ही पूज्य संतों के द्वारा किया जा रहा है। इस अवसर पर महामण्डलेश्वर जी महाराज ने साधकों को वेदान्त के विषय में जानकारी देते हुये कहा कि ’वेदान्त एवं उपनिषद ज्ञानयोग की धारायें है। उन्होने कहा कि जीवन में संयम नितांत आवश्यक है; साधना के साथ जीवन में आहार-विहार एवं विचारों में संयम और संतुलन की जरूरत है। वेदान्त, मनुष्य को संयम और संतुलन की शिक्षा देता है; वेदान्त अध्ययन का विषय नहीं बल्कि जीवन जीने का शास्त्र है।’ योगाचार्य रमेश पाण्डे जी ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान और साधना का समापन विशेष पुण्यदायक होता है।

साधना सप्ताह के समापन और कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन में विशेष पुजन एवं भण्डारे का आयोजन किया गया जिसमें अनेक संतों स्वामी सनातन तीर्थ जी, स्वामी केशवानन्द जी, स्वामी प्रेमवर्णी जी ने सहभाग किया। इस पावन अवसर पर परमार्थ परिवार से राजेश दीक्षित, आचार्य संदीप शास्त्री, हरिओम शर्मा एवं परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमार तथा भारत के विभिन्न प्रांतों से आये साधकगण उपस्थित थे।