’योग करे और सहयोग करे’ -स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश/ धनंजय राजपूत। परमार्थ निकेतन आश्रम में तीन सप्ताह से संचालित योग प्रशिक्षण शिविर में आज उच्च शिक्षा मंत्री उत्तराखण्ड राज्य डाॅ धनसिंह रावत जी ने सहभाग किया। परमार्थ प्रांगण में माननीय मंत्री डाॅ धनसिंह रावत जी का परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों ने भव्य स्वागत किया। योग शिविर में चीन और फ्रांस के योग जिज्ञासुओं ने सहभाग किया। योग शिविर के साथ आज सांस्कृतिक आदान-प्रदान समारोह में परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज एवं उच्च शिक्षा मंत्री डाॅ धनसिंह रावत जी ने योग जिज्ञासुओं को सम्बोधित किया। चीन और फ्रांस से आये योग जिज्ञासु परमार्थ निकेतन में रहकर डाॅ विकास गोखले, श्री प्रकाश बिष्ट, डाॅ एम एम गौर, श्री रविन्द्र ममगाई, एवं श्री विनोद नौटियाल के निर्देशन में योग क्रियाओं के साथ ध्यान, प्राणायाम एवं भारतीय संस्कृति को आत्मसात कर रहे है।

योग जिज्ञासुओं को परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस के संस्थापक एवं गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के सानिध्य में योग, भारतीय संस्कृति, दर्शन एवं अध्यात्म से सम्बधित अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने उपस्थित सभी योग साधकों को सम्बोधित करते हुये कहा ’योग करे और सहयोग करे’ यही सबसे बड़ा योग है। योग अर्थात जीवंत अनुभव। जीवन को अनुशासित करने कि विधा है योग। सच्चे अर्थों में जब जीवन में योग का समावेश होता है तब जीवन योगमय हो जाता है। योग का सम्बंध किसी धर्म से नहीं है बल्कि सम्पूर्ण मानवता से है। योग की कोई थ्योरी नहीं है बल्कि योग तो विज्ञान है, एक ऐसा विज्ञान जिसके द्वारा जीवन ऊर्जावान बनाता है। योग, स्व से जोड़ता है; मैं को जीवन से निकालकर वसुधैव कुटुम्बकम के भावों को जाग्रत करता है। किसी भी काम के प्रति स्वयं का समर्पण अवश्यक है। जहां भी हम अपना सौ प्रतिशत डाल देते है वही  ‘योगः कर्मसु कौशलम्’  हो जाता है। हमें योग करना ही नहीं बल्कि योगी होना भी है। स्वामी जी ने कहा कि आज हमें देश में नये तरह के ’’इनफर्मेशन के साथ इन्स्परेशन और ट्रान्सफर्मेशन’’ आईआईटी बनाने की जरूरत है। स्वामी जी ने सभी का 4 टी प्रोग्राम ’’टाइम, टैलेंट, टेक्नोजाॅजी तथा टिनैसिटी’’ के लिये आह्वान किया। डाॅ धनसिंह रावत जी ने कहा कि ’योगमय जीवन पद्धति ही श्रेष्ठ जीवन पद्धति है। उन्होने संस्कृत के अध्ययन पर भी जोर दिया।’

साथ ही न सिंह रावत ने सभी योग साधकों एंव योग जिज्ञासुओं ने परमार्थ गंगा तट पर होने वाली भव्य गंगा आरती में सहभाग किया। पूज्य स्वामी जी महाराज ने उपस्थित सभी को पर्यावरण एवं नदियों के संरक्षण का संकल्प कराया। इस अवसर पर चीन और फ्रांस से आये यान कै, दुन जुआनली, झाओ यिंग, शूंग, लियू झांेग्जी, यू यिंगफी, अंकी लीउ वे मो, टिंगटिंग यू, यानियन वांग, मेन्ग्यूयू पैन, जियाओवेई हुआंग और अन्य योग साधक उपस्थित रहे।