योग को विश्व पटल पर पहचान दिलाने में शिवानंद कुटीर की भूमिका अहम

उत्तर काशी। आज दुनियाभर में योग के नाम पर बहुत कुछ हो रहा है, लेकिन उन सबका वास्तविक योग से शायद ही कोई लेना-देना हो। लेकिन योग के सही मायने और उसके प्रभाव को दुनियाभर में पहचान दिलाने वाला एक ऐसा स्थान है उत्तरकाशी के नेताला स्थित शिवानंद कुटीर योग। यह संस्थान योग को दुनियाभर में प्रचारित करने के लिए योग शिक्षक तैयार करने में बेहद अहम भूमिका निभा रहा है। साल 1957 में स्तित्व में आए इस इस आश्रम में साल 2002 से योगा टीचर्स ट्रेनिंग प्रोग्राम के तहत हजारों योग प्रशिक्षक तैयार किए जा चुके हैं। इस संस्थान से प्रशिक्षित बड़ी तादाद में स्थानीय युवा दुनिया के कोने कोने में योग के गुर सिखा रहे हैं।

योग को अंतर्राष्ट्रीय पटल पर पहचान दिलाने वाले स्वामी शिवानंद और उनके शिष्य स्वामी विष्णुदेवानंद का उत्तरकाशी से गहरा नाता रहा है। उन्होंने यहां आकर योग साधना की और वर्ष 1957 में यहां गंगोत्री हाईवे के निकट नेताला में शिवानंद कुटीर की स्थापना की। उसके बाद योग का सिलसिला लगातार परवान चढ़ने लगा।

योग की मुद्रा में देसी विदेशी साधक

इस संस्थान से योग शिरोमणि की उपाधि ले चुके बौंगा गांव के कृष्णानंद बिजल्वाण, कोटबंगला के पीयूष बलूनी, धनारी के हरीश नौटियाल, नेताला की मीरा आदि युवा भारत के साथ-साथ दुनिया के कई देशों में जाकर लोगों को योग के गुर सिखाने की मुहिम में जुटे हैं। शिवानंद कुटीर नेताला की निदेशक स्वामी परमेश्वरी आनंद के मुताबिक यहां साल में पांच टीचर्स ट्रेनिंग कोर्स और एक प्राणायाम साधना शिविर चलता है। यहां बड़ी तादाद में विदेशी साधक योग सीखने आते हैं

आप को बतादें कि आजादी से पहले यानि 1947 के आस पास मलेशिया में डॉक्टर की नौकरी छोड़कर ऋषिकेश आए स्वामी शिवानंद ने यहां दिव्य जीवन संघ के जरिए लोगों की सेवा शुरू की। यहां उन्होंने योग, ध्यान एवं साधना का प्रसार शुरू किया। साल 1957 में उन्होंने अपने शिष्य स्वामी विष्णुदेवानंद को योग के प्रसार के लिए विदेश भेजा। उसके बाद साल 1963 में स्वामी शिवानंद के ब्रह्मलीन होने के बाद उनके शिष्य ने दुनिया के अलग अलग देशों में शिवानंद योग वेदांत केंद्रों की स्थापना कर योग को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाई। वर्तमान में भारत के साथ ही विभिन्न देशों में 41 शिवानंद योग वेदांत केंद्र संचालित हैं।

हिमालय की गोद में बसे उत्तरकाशी में योग साधना के लिए अच्छी जगह है। यहां स्वच्छ आबोहवा, कलकल बहती गंगा का उद्गम, हिमाच्छादित चोटियां और आध्यात्मिक शांति सदियों से लोगों को साधना के लिए आकर्षित करती रही हैं। यही कारण है कि स्वामी शिवानंद एवं स्वामी विष्णुदेवानंद के अलावा हिमालयन इंस्टीट्यूट के संस्थापक स्वामी राम, योग गुरु बाबा रामदेव, महर्षि महेश योगी आदि कई ख्यातिप्राप्त संतों ने गंगोत्री उत्तरकाशी क्षेत्र में साधना की है। अब भी हर साल बड़ी तादाद में देशी-विदेशी साधक यहां योग साधना के लिए आते हैं।