आखिर क्यों मनाई जाती है हरतालिका तीज?

नई दिल्ली/ रवि शर्मा। त्योहारों का देश है और साल के हर दिन कोई न कोई त्योहार यहां मनाया जाता है। बहुत-से त्योहार खुशियां बांटने और पूरे समाज को जोड़ने का काम करते हैं, लेकिन कुछ त्योहार सिर्फ महिलाओं से जुड़े हैं, जो अपने परिवार, बच्चों और पति की दीर्घायु और खुशियों की कामना के साथ उपवास रखकर मनाए जाते हैं। ऐसा ही एक त्योहार है हरतालिका तीज, जिसे आमतौर पर उत्तर भारत के राज्यों राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मनाया जाता है। साल में तीज का त्योहार तीन बार मनाया जाता है, जिनमें हरतालिका तीज के अलावा हरियाली तीज और कजरी तीज भी शामिल हैं, लेकिन हरतालिका तीज को तीनों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण तीज माना जाता है। हरितालिका तीज के पावन पर्व पर महिलाओं ने निर्जला व्रत रखकर शिव-पार्वती की विधि पूर्वक पूजा-अर्चना कर अखण्ड सुहाग की मंगलकामना की। पर्व के चलते गंगा घाटों पर श्रद्धालु महिलाओं की भीड़ जुटी रही। साथ ही देवाधिदेव भगवान शिव के मंदिरों में दर्शन-पूजन कर व्रती महिलाओं ने सुहाग के मंगल कामना के लिए भगवान से मन्नतें मांगी और पुजारी से व्रत कथा का श्रवणकर आशीर्वाद लिया।

क्या है हरितालिका तीज

भाद्र पद माह के शुक्ल पक्ष में जब चन्द्रमा कन्या राशि और हस्त नक्षत्र में प्रवेश करता है, तो इस दिन को हरितालिका तीज कहते हैं। इस व्रत का यह महत्व है कि अगर कुंवारी कन्या इस व्रत को विधि विधान से पूजन करती है, तो उसे सुयोग्य वर मिलता है और अगर सुहागिनें इस व्रत को करती हैं, तो उनके पति को लम्बी उम्र की प्राप्ति होती है। माता पार्वती ने भगवान शंकर को पाने के लिए जंगल में जाकर घोर तपस्या की थी। इसपर भगवान भोलेनाथ ने वर दिया कि जो महिला इस व्रत को श्रद्धाभाव के साथ करेगी, उसका सुहाग दीर्घकाल तक जीवित रहेगा। इसी मान्यता को लेकर सभी महिलाएं पर्व पर निर्जला व्रत रहती हैं।

कैसे मनाया जाता है यह त्योहार
1- हरतालिका तीज के दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर नहाने के बाद श्रंगार करती हैं। कुछ जगहों पर 19 श्रंगार किए जाते हैं। इसके बाद वह मंदिर जाती हैं, जहां वह एक दीपक जलाती हैं जिसे रात भर जलाए रखा जाता है। कुछ महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत भी रखती हैं। रात में महिलाएं शिव-पार्वती का श्रंगार करती हैं और तीज के दिन गाए जाने वाले गाने गाती हैं। वहीं कुछ जगहों पर महिलाओं के उनके सास-ससुर, माता-पिता की ओर से परंपरिक उपहार भी दिए जाते हैं। इन उपहारों को सिंधारा या श्रिजनहारा भी कहते हैं।
2- महिलाएं 24 घंटे तक कुछ भी खाती-पीती नही हैं। लेकिन फल-मिठाइयां, घेवर-पेड़े आदि शादी-शुदा महिलाओं को खिलाती हैं जो देवी पार्वती के रूप में देखी जाती हैं।

विधिपूर्वक हुआ पूजन-अर्चन

पति की दीर्घायु के लिये महिलाओं ने निर्जला व्रत रखा। मंदिरों में व घर में भोलेनाथ व माता पार्वती की विधिविधान से पूजन अर्चन की गयी। मंदिरों में मत्था टेका और पति की लम्बी उम्र के लिये कामना की। शिव मंदिरों में दर्शन पूजन करने का क्रम देर शाम तक चलता रहा।

बुजुर्गों का लिया आशीर्वाद

हरतालिका तीज पर व्रती सुहागिन महिलाएं विभिन्न मंदिरों में गंगा स्नान कर दर्शन पूजन की और बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया। हरतालिका तीज पर व्रती महिलाओं ने गंगा घाट, ताड़ीघाट, भगीरथपुर, मलसा, मतसा आदि गंगा घाट पर पहुंचकर भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा की।