’जल आन्दोलन बने जन आन्दोलन’ तथा ’नदी आन्दोलन बने नारी आन्दोलन – स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में पद्म श्री डॉ अनिल जोशी, संचालक हिमालयन एन्वायमेंटल स्टडीज एंड कंजर्वेशन ऑर्गेनाइजेशन के प्रमुख सपरिवार पधारे। उन्होने परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष एवं ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस के संस्थापक स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया।

स्वामी जी एवं डॉ अनिल जोशी की पर्यावरण एवं नदियों के संरक्षण विषयों पर चर्चा हुई। डॉ अनिल जोशी जी ने परमार्थ तट पर होने वाली गंगा आरती की सराहना करते हुये कहा कि आध्यात्मिक प्रसार के साथ गंगा आरती का नदी संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होने स्वामी जी के मार्गदर्शन एवं संरक्षण में भारत के अन्य दूसरे शहरों एवं नदियों के किनारे जो आरती का क्रम शुरू कराया गया और आगे भी इस पर जो कार्य किया जा रहा है इस की प्रशंसा करते हुये कहा कि यह समाज में जागरण तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश प्रसारित करने का बेहतर माध्यम है। उन्होने पूरे भारत की नदियों के लिये बेहतर योजना बनाने पर जोर दिया और कहा कि एक विशाल कार्यक्रम बने ताकि पूरे भारत में एक भारतीय जन जागरण आंदोलन खड़ा हो सकें।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा ’पर्यावरण संरक्षण के लिये जो भी संस्थायें कार्य कर रही है उन्हें वृक्षारोपण, स्वच्छता, प्लास्टिक कचरा नियंत्रण एवं प्रबन्धन, शौचालय निर्माण और प्रयोग, कूडे के निस्तारण के लिये सभी को मिलकर कार्य करने पर जोर दिया और कहा कि इस अभियान को पहले उत्तराखण्ड में चलाया जायें और फिर इस स्वच्छता की मशाल पूरे देश में जलाई जाये।  यह ’जल आन्दोलन बने जन आन्दोलन’ तथा ’नदी आन्दोलन बने नारी आन्दोलन’।

स्वामी चिदानन्द  सरस्वती जी ने वर्ष 1997 में परमार्थ निकेतन में विशाल रूप से आरती का क्रम विश्व विख्यात कथाकार, पूज्य मोरारी बापू जी, इस्लाम के विश्व में जाने माने विद्वान मौलाना वहीदुद्दिन खान साहब एव विश्व प्रसिद्ध कथाकार संत श्री रमेश भाई ओझा जी के पावन सानिध्य में आरम्भ किया था। वर्ष 2001 में कुम्भ मेला के पावन अवसर पर प्रयाग, इलाहबाद में सनातन धर्म के यशस्वी एवं तपस्वी काँची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती जी महाराज, बौद्ध धर्म के विश्व प्रसिद्ध पूज्य दलाई लामा जी एवं पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने मिलकर आरती की। वर्ष 1999 के अंत में, सहस्राब्दि की शुरूआत में वाराणसी में पूज्य दलाई लामा जी, प्रसिद्ध भजन सम्राट अनूप जलोटा जी, प्रसिद्ध भजन गायिका अनुराधा पौड़वाल जी, संगीतकार श्री रविन्द्र जैन एवं देश के अनेक गणमान्य हस्तियों ने मिलकर लाखों दीप जलाकर हजारों लोगो ने मिलकर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज की प्रेरणा एवं नेतृत्व में आरती की शुरूआत हुई। अब अतुल्य भारत (इनके्रेडिबल इन्डिया) में उस आरती को स्थान प्राप्त हुआ है। उसके पश्चात गंगोत्री, उत्तरकाशी, रूद्रप्रयाग, देवप्रयाग, बिठूर एवं ज्वालापुर आदि स्थानों पर आरती का क्रम आरम्भ किया।

इस आरती क्रम से प्रेरणा लेकर अब पटना, कलकत्ता, यमुना जी दिल्ली और विदेशों में भी कई स्थानों पर आरती आरम्भ हुयी और अब इस अभियान को गंगा के हर तट पर चाहे वह गांव हो या शहर यह अभियान जागरूकता अभियान बनें इस विषय पर स्वामी जी एवं डाॅ अनिल जी की चर्चा हुईं और कहा कि गंगा स्वच्छता एवं संरक्षण के विभिन्न मुद्दों पर विभिन्न संगठनों एवं माननीय मुख्यमंत्री जी के साथ भी बैठक होगी तथा इस विषय पर एक विश्वस्तरीय सम्मेंलन के आयोजन की भी योजना बनायी जा रही है ताकि ये आरती करोड़ों लोगो के लिये प्रेरणा एवं स्वच्छता जागरण अभियान का केन्द्र बन सके।

स्वामी जी ने कहा कि गंगा ने जिस प्रकार सभी नदियों को जोडते हुये आगे बढ़ते हुये गंगा सागर बन गयी उसीप्रकार हम सभी को मिलकर इस लक्ष्य को प्राप्त करना है ताकि स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत एवं समृद्ध भारत बन सके और इसकी शुरूआत हमें ’अपने घर और अपने घाट से करनी है’ और इस अभियान को ’घर से गली, गली से गांव, गांव से शहर, शहर से प्रदेश, प्रदेश से देश की ओर अग्रसर करना’ होगा और इसके लिये एक चरणबद्ध योजना तैयार करनी होगी तब हम विलक्षण परिवर्तन होता देख सकते है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने परमार्थ निकेतन की भव्य गंगा आरती में संकल्प का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा डॉ अनिल जोशी जी को भेंट करते हुये कहा कि अब हमें रूद्राक्ष की तरह एकमुखी होकर कार्य करना होगा तभी समुन्नत भारत का निर्माण सम्भव है।