वर्तमान युग की आवश्यकता आईये विवेकानन्द बने – स्वामी चिदानन्द सरस्वती

प्रयागराज/ देवेश दुबे। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने स्वामी विवेकानन्द जी की जयंती यानि युवा दिवस पर देश के युवाओं को संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान युग की आवश्यकता है आईये विवेकानन्द बने और अपनी जवानी को देश सेवा में लगाये और पानी को बचाये। स्वामी जी महाराज ने कहा कि पानी है तो प्रयाग है, पानी है तो प्राण है, पानी है तो पृथ्वी है अतः पानी की रक्षा के लिये लगाये अपनी जवानी युवाओं के जीवन की यही सार्थकता है। स्वामी विवेकानन्द जी ने जिस संस्कृति को बचाने के लिये अपना जीवन लगा दिया आज अपनी प्रकृति को बचाने के लिये जवानों को आगे आना होगा, हर एक को स्वामी विवेकानन्द बनना होगा तथा उनसे प्रेरणा लेनी होगी; दिशा लेनी होगी
परमार्थ परिवार के सदस्यों ने प्रयागराज कुम्भ मेला कैम्प शिविर में स्वच्छता के संकल्प के साथ प्रवेश किया। यूनिसेफ, परमार्थ निकेतन, गंगा एक्शन परिवार और ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस के तकनीक विशेषज्ञों ने स्वच्छता टेªनिग के साथ कुम्भ परिसर में कल्पवास का श्री गणेश किया।
कुम्भ की पावन धरती पर आज स्वामी अवधेशानन्द जी महाराज, स्वामी ज्ञानानन्द जी महाराज, स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज एवं डॉ कृष्ण गोपाल जी, पद्म श्री डॉ दयाल सिंह बिष्ट, डॉ अश्विन मेहता, निदेशक एम्स, ऋषिकेश ने नेत्र कुम्भ का उद्घाटन किया। नेत्रकुम्भ में निःशुल्क नेत्र जांच एंव चश्मा वितरण किये गये।
प्रयागराज कुम्भ की धरती पर परमार्थ परिवार के सदस्यों एवं ऋषिकुमारों ने स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज का दिव्य स्वागत किया। ऋषिकुमारों ने भगवान श्रीराम जी की स्तुति श्री रामचन्द्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारूणम्। नवकंज लोचन कंज मुख करकंज पद कन्जारूणम्। कंदर्प अगणित अमित छबि नव नील नीरज सुन्दरम् से कल्पवास का शुभारम्भ किया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, साध्वी भगवती सरस्वती जी, परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमार एवं परमार्थ परिवार के देशी-विदेशी सेवकों ने तुलसी पूजन, जल अर्पण और भगवान नटराज की स्तुति के साथ स्वच्छता ट्रेनिग का शुभारम्भ किया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि ये कल्पवास है, इस कल्पवास में हम सभी साधना की तरह से; स्वच्छता ही धर्म है; स्वच्छता ही संस्कार है इसकी सेवा करे इस भाव से कुम्भ की धरती पर रहे। उन्होने कहा कि भीतर की स्वच्छता और बाहर की स्वच्छता पर पूरे कुम्भ मेला में हमें ध्यान रखना होगा तथा इसी को लक्ष्य बनाकर हमें आगे बढ़ना होगा।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने प्रयागराज और आसपास के क्षेत्रों से आये युवाओं सम्बोधित करते हुये कहा कि उपभोगतावादी संस्कृति ने प्राकृतिक संसाधनों का बेहिसाब और अवैज्ञानिक दोहन हो रहा है। एक ओर भौतिक विकास दु्र्र्रत गति से हो रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रकृति का संतुलन खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है जिसका परिणाम वैश्विक तपन के रूप में हर तरफ दिखायी दे रहा है अतः प्रकृति, पर्यावरण और जल की स्वच्छता के लिये सभी के भगीरथ प्रयास की आवश्यकता है। वर्तमान समय में हम न्यू इंडिया की ओर बढ़ रहे है साथ ही हमें नये भारत को प्रदूषण से मुक्त रखने का प्रयास भी करना होगा। स्वामी जी महाराज ने कहा कि कुम्भ परिसर को स्वच्छ रखने का साथ हमें अपने विचारों को भी स्वच्छ रखना होगा।
स्वामी जी महाराज ने सभी से आह्वान किया कि वे बाहरी और भीतरी स्वच्छता का ध्यान रखे।
इस अवसर पर सुश्री पावनी जी, सुश्री नन्दिनी जी, स्वामिनी आदित्यनन्दा जी, क्लाउडीन, आचार्य देवेन्द्र जी, आचार्य संदीप जी, आचार्य दीपक शर्मा जी, आचार्य अनिल शर्मा जी, आचार्य दीलिप जी एवं ऋषिकुमार उपस्थित थे।