विराट भक्ति सत्संग महोत्सव का दूसरे दिन ॐ नमः शिवाय के मन्त्र से गूंजा वीर हक़ीक़त राय ग्राउंड

पटियाला। विश्व जागृति मिशन द्वारा आयोजित विराट भक्ति सत्संग महोत्सव के दूसरे दिवस सन्तश्री सुधांशु जी महाराज को सुनने पटियालावासी उमड़ पड़े। महाराजश्री ने अपने प्रवचन में श्रद्धा एवं विश्वास को त्रिपुरारी शंकर की संज्ञा दी और कहा कि इन दोनों में ही भोलेशंकर सदाशिव बसते हैं। शिव को कल्याण का पर्याय बताते हुये उन्होंने शिवारचन  का एक भजन भी उपस्थित जनसमुदाय को सुनाया। ‘’शरण में आ पड़ा तेरी प्रभु मुझको भुलाना ना’ को सुनकर सभी श्रोता प्रभु भक्ति में भीतर तक अभिभूत हो उठे।

इसके पूर्व विश्व जागृति मिशन के पटियाला मण्डल के प्रमुख सक्रिय कार्यकर्ताओं ने सुधांशु जी महाराज का माल्यार्पण कर अभिनंदन किया। श्री केसी जोशी एवं अलका जोशी ने जब सत्संग मंच पर जाकर व्यास पूजन किया, तब पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा।

एकाग्रता को मानव जीवन की असल शक्ति बताते हुये श्री सुधांशु जी महाराज ने देश-विश्व के चुनिंदा वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों, विद्वानों तथा संगीतज्ञों का उल्लेख किया और कहा कि एकाग्रता से ही श्रेष्ठ विचार जन्मते हैं और लोग नयी-नयी रचनाएँ करने में सफल होते हैं।उन्होंने कार निर्माता हेनरी फ़ोर्ड एवं रतन टाटा के उद्घरण देते हुये कहा कि उनके मस्तिष्क में जन्में एक विचार ने फ़ोर्ड एवं नैनों जैसी कारें देश-दुनिया को दीं।उन्होंने कहा कि अच्छे विचार सात्विक, संवेदनशील और नम्र अन्त:करण के मस्तिष्क में ही पैदा होते हैं। उन्होंने यूनिवर्स से सम्बन्ध जोड़ने की कला सिखाते हुये ध्यान एवं योग का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी उपस्थित जनसमुदाय को दिया।

श्रीसुधांशु जी महाराज ने अंग्रेज़ों के विपरीत परिस्थितियों वाले शासनकाल में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय तथा गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय जैसे महान शिक्षा संस्थानों की स्थापना करने वाले महामना पण्डित मदन मोहन मालवीय और स्वामी श्रद्धानन्द को श्रद्धापूर्वक याद किया और बताया कि उन्होंने ख़ाली हाथ इन शिक्षा संस्थानों की स्थापना का स्वप्न देखा था, जो उनकी प्रबल इच्छाशक्ति एवं परमार्थ की भावना से सफलतापूर्वक पूरा हुआ।

सायंक़ालीन सत्र में श्री सुधांशु जी महाराज ने मानव जीवन की महत्ता पर विशेष प्रकाश डाला और सत्संग में आए श्रद्धालुओं व जिज्ञासुओं की आध्यात्मिक जिज्ञासाओं को शांत किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन विधाता से मिली सबसे बड़ी सौग़ात है, इसका महत्व सभी को समझना ही चाहिए। उन्होंने कहा कि मनुष्य में दो वृत्तियाँ होती है। पहली देवत्व की वृत्ति तथा दूसरी राक्षसत्व की वृत्ति। इन वृत्तियों को जगाया जाता है, क्योंकि वे सुसुप्त अवस्था में होती हैं। संगीत से, सत्संग से, उपदेशों से, सात्विक खानपान से देवत्व की वृत्तियाँ बढ़ाई जाती हैं। उधर अप्राकृतिक खानपान, आचरण और व्यवहार से राक्षसी वृत्तियां विकसित होती हैं। यह हमारे ऊपर निर्भर है कि हम अपने भीतर संव्याप्त किस तत्व का विकास करना चाहते हैं। उन्होंने सभी से अपने अन्दर छिपे देवत्व को विकसित करने के लिए अध्यात्मवादी जीवन जीने को कहा। महाराजश्री ने इसके लिए अनेक आध्यात्मिक सूत्र समझाए। उन्होंने सभी देवत्ववादी शक्तियों से एक मंच पर आने का आह्वान किया। श्रद्धेय महाराजश्री ने ॐ नमः शिवाय’ का सामूहिक मन्त्रजप सभी से कराया।

इस अवसर पर दिल्ली से आयीं श्रीमती शारदा वर्मा ने डॉ. अर्चिका फ़ाउण्डेशन की गतिविधियों, यथा-विधवा कल्याण योजना, नारी सशक्तिकरण, बेटी सुरक्षा जागरूकता अभियान, बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ कार्यक्रम, योग एवं ध्यान आदि कार्यक्रमों की जानकारी विस्तार से दी।

आज सायंकाल हरियाणा राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के चेयरमैन जस्टिस एस.एन. अग्रवाल सत्संग स्थल पहुँचे और उन्होंने श्री  सुधांशु जी महाराज का अभिनंदन किया।पटियाला के विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भी विजामि प्रमुख का स्वागत किया। सत्संग सभा का समन्वयन-संचालन विजामि निदेशक श्री राम महेश मिश्र ने किया।