देवी मां का इकलौता ऐसा धाम जहां एक ही जगह मां के दिव्य तीन स्वरूपों का होता है दर्शन

विंध्याचल। विंध्यवासिनी धाम एक ऐसा जागृत शक्तिपीठ है जिसका अस्तित्व सृष्टि आरंभ होने से पूर्व की है और जिसका अस्तित्व प्रलय के बाद भी कायम रहेगा। देवी मां का इकलौता ऐसा धाम है जहां एक ही जगह भक्तों को मां के दिव्य तीन स्वरूपों के दर्शन का सौभाग्य मिलता है।
पुराणों में विंध्य क्षेत्र का महत्व तपोभूमि के रूप में वर्णित है। मां विंध्यवासिनी देवी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केन्द्र है। देश के 51 शक्तिपीठों में से एक हैं विंध्याचल की देवी मां विंध्यवासिनी विंध्याचल की पहाड़ियों में गंगा की पवित्र धाराओं की कल-कल करती ध्वनि, प्रकृति की अनुपम छटा बिखेरती है।
त्रिकोण यंत्र पर स्थित विंध्याचल निवासिनी देवी लोकहिताय, महालक्ष्मी, महाकाली तथा महासरस्वती का रूप धारण करती हैं। विंध्यवासिनी देवी विंध्य पर्वत पर स्थित मधु तथा कैटभ नामक असुरों का नाश करने वाली हैं। मां विंध्यवासिनी को भगवती यंत्र की अधिष्ठात्री देवी भी माना जाता है।
कहा जाता है कि जो मनुष्य इस स्थान पर तप करता है, उसे अवश्य सिद्वि प्राप्त होती है। विविध संप्रदाय के उपासकों को मनवांछित फल देने वाली मां विंध्यवासिनी देवी अपने अलौकिक प्रकाश के साथ यहां नित्य विराजमान रहती हैं।
ऐसी मान्यता है कि सृष्टि आरंभ होने से पूर्व और प्रलय के बाद भी इस क्षेत्र का अस्तित्व कभी समाप्त नहीं हो सकता। यहां पर संकल्प मात्र से उपासकों को सिद्वि प्राप्त होती है। इस कारण यह क्षेत्र सिद्ध पीठ के रूप में विख्यात है। सबसे खास बात यह है कि यहां तीन किलोमीटर के दायरे में तीन प्रमुख देवियां विराजमान हैं। ऐसी मान्यता है कि तीनों देवियों के दर्शन किए बिना विंध्याचल की यात्रा अधूरी मानी जाती है। तीनों के केन्द्र में हैं मां विंध्यवासिनी। यहां निकट ही कालीखोह पहाड़ी पर महाकाली और अष्टभुजा पहाड़ी पर अष्टभुजी देवी विराजमान हैं। लगभग सभी पुराणों के विंध्य महात्म्य में इस बात का उल्लेख है कि 51 शक्तिपीठों में मां विंध्यवासिनी ही पूर्णपीठ है। नवरात्र के दिनों में मां के विशेष श्रृंगार के लिए मंदिर के कपाट दिन में चार बार बंद किए जाते हैं। सामान्य दिनों में मंदिर के कपाट रात 12 बजे से भोर 4 बजे तक बंद रहते हैं।
आदि शक्ति की शाश्वत लीला भूमि मां विंध्यवासिनी के धाम में पूरे साल श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। खास कर नवरात्र आरंभ होते ही विंध्यवासिनी धाम में भक्तों का रेला उमड़ पड़ता है। शारदीय और चैत्र नवरात्र दोनों अवसर पर यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। देश के कोने कोने से माता के भक्त इस शक्तिपीठ में माथा टेकने ज़रूर आते हैं। कहते हैं कि सच्चे दिल से यहां की गई मां की पूजा कभी बेकार नहीं जाती। हर रोज यहां हजारों लोग मत्था टेकते हैं और देवी मां का पूजन जय मां विंध्यवासिनी के जयकारे के साथ करते हैं।