एकता, सद्भाव, समरसता और समता का दीप जलाना है स्वामी चिदानन्द सरस्वती

नीदरलैण्ड/ आशीष तिवारी। एम्सटरडेम, नीदरलैण्ड के पीस पैलेस में आयोजित वैश्विक शान्ति संवाद में भारत का प्रतिनिधित्व स्वामी चिदानन्द सरस्वती और साध्वी भगवती सरस्वती ने किया। इस संवाद में विश्व के अनेक देशों से विभिन्न धर्मों के धर्मगुरूओं ने शिरकत की। दुनियाभर से आये धर्मगुरू इस तीन दिवसीय संवाद के माध्यम से सन्देश देना चाहते हैं कि यह ’शान्ति संवाद’ हिंसा के लिये न केवल रामबाण है बल्कि मानवीय अंतःकरण के सौन्दर्य की शोभा भी है। इसी परिपेक्ष में धर्मगुरूओं ने एम्सटरडेम, नीदरलैण्ड के पीस पैलेस में शान्ति, प्रेम और सद्भाव का दीप प्रज्जवलित कर उस ज्योति के साथ जुलूस निकाला जिससे की विश्व शान्ति का संदेश हर मानवीय अंतःकरण में समाहित हो सके।

शान्ति संवाद का मुख्य उद्देश्य है कि नस्ल, राष्ट्रीयता, लिंग, धर्म आदि के भेदभाव के बिना सभी के प्रति दयालुता व करूणा की भावना विकसित करना। वैश्वीकरण युक्त दुनिया में राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थायें आपस में परस्पर निर्भर है। अतः व्यक्तिगत हितों के बजाय आपसी सहयोग से ही श्रेष्ठ सेवायें प्रदान की जा सकती हैं इसलिये लोगों एवं राष्ट्रों के माध्यम से आपसी सहयोग की भावना को उच्च स्तर पर बढ़ाना इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य है। हमें उन सभी प्रयासों, कदमों एवं साधनों का समर्थन करना चाहिये जो मानव जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं तथा अंर्तराष्ट्रीय सन्धियों जैसे कि सतत विकास के लक्ष्य, जलवायु परिवर्तन, गरीबी उन्मूलन आदि को बढावा देते हैं। आय असमानता एवं शुद्ध जल की उपलब्धता से जुड़ी समस्याओं के निराकरण के लिये जरूरी प्रयत्न करना।
भारत का प्रतिनिधित्व करते हुये स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि ’हमने आज जो दीप प्रज्जवलित किया है वह केवल बाहर ही नहीं भीतर भी प्रकाशित होता रहे। अब समय आ गया है कि बाहर भी हमें सभी के दिलों में एकता, सद्भाव, समरसता और समता का दीप जलाना है और भीतर भी हमें शान्ति, दया, करूणा और प्रेम का दीप जलाना है। उन्होने कहा कि अब हमं मिलकर कार्य करने की जरूरत है और मिलकर पूरे समाज को अपनी सेवा से अपने सद्भाव से प्रकाशित करें, सेवा का दीप जले, सद्भाव और समता का दीप जले इसकी नितांत अवश्यकता है।’

साध्वी भगवती सरस्वती जी ने विश्व से आए मतावलम्बियों से चर्चा करते हुये हिंसा को समाप्त करने के लिये आध्यात्मिक प्रयासों पर जोर देते हुये कहा कि ’शाश्वत शान्ति की स्थापना गहन आध्यात्मिकता द्वारा ही हो सकती हैं। हिंसा व आंतक से शान्ति स्थापित नहीं हो सकती। हमें शान्ति पाने का प्रयास अपने हृदय में करना चाहिये तत्पश्चात विश्व में इसकों साझा करना चाहिये। जब हम एक दूसरे के हाथ पकड़ते है तो इस बन्धन को सारी दुनिया देखती है।

गौरतलब है कि इस संवाद का आयोजन नीदरलैण्ड की ब्रिजिट वान ब्यूरेन द्वारा किया गया। संवाद में भारत की ओर से स्वामी चिदानन्द सरस्वती, साध्वी भगवती सरस्वती, पीर शब्द कान, सूफी रूहानियत इण्टर नेशनल यू एस ए, जोनाथन ग्रेनोफ, ग्लोबल सेक्योरिटी काउन्सिल के अध्यक्ष, इमाम अहमद उमर इलियासी, दिल्ली, सलमान चिस्ती साहब अजमेर, भाई महेन्दर सिंह जी, लन्दन, मुर्शीद करीम बख्स विटवेन, नीदरलैण्ड, जल विशेषज्ञ हेंक केटेलार्स, अनगंगाक अंगकोरसुवाक ग्रीन लैण्ड, शेख तिजानी बेन उमर, घाना एवं विश्व के विभिन्न देशों के विशेषज्ञों, धर्मगुरूओं एवं मतावलम्बियों ने सहभाग किया।