श्रद्धा और विश्वास में बसते हैं भगवान शंकर एवं माँ पार्वती- सुधांशु जी महाराज

डोंगरगढ़/ नेहा मिश्रा। विश्व जागृति मिशन नयी दिल्ली के तत्वावधान में मिशन के डोंगरगढ़ मण्डल द्वारा आयोजित तीन दिवसीय विराट भक्ति सत्संग
महोत्सव का आज सायंकाल विधिवत समापन हो गया। विदाई सत्र दिव्य आरती और नागरिक अभिनंदन के साथ सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर श्री सुधांशु जी महाराज ने कहा कि ‘श्रद्धा और विश्वास’ बड़े शक्तिशाली तत्व हैं। इन्हें शिव व पार्वती की संज्ञा दी गई है। गोस्वामी तुलसी दास की रामचरितमानस के प्रथम काण्ड बालकाण्ड के प्रथम श्लोक में इसका बड़ा सुन्दर वर्णन किया गया है। परिपक्व अवस्था में ले जाने के लिए इन दोनों को साधना की समुचित गर्मी देनी पड़ती है और उसे उच्च तापमान पर ले जाना पड़ता है। निरन्तरता का इसमें बड़ा महत्व है। प्रयास छोटे हों लेकिन वे लगातार चलें, इसका महत्व ज़्यादा है। एकाग्रता एवं निरन्तरता इसकी दो प्रमुख कड़ियाँ हैं। उन्होंने कहा कि ज्ञान, भक्ति एवं ईश्वर की प्राप्ति श्रद्धा एवं विश्वास से ही होती है। व्यक्ति को इनसे सदैव जुड़े रहना चाहिए।
आज मध्याहनकाल छत्तीसगढ़ के विभिन्न अंचलों से आए 193 स्त्री-पुरुषों ने सन्तश्री सुधांशु जी महाराज से गुरुदीक्षा ग्रहण की। नवदीक्षितों को सम्बोधित  करते हुये श्रद्धेय महाराजश्री ने उन्हें सफल शिष्य बनने के कई सूत्र दिए और कहा कि नियम पालन, अनुशासन, व्यवस्था एवं प्रबंधन के चार गुण किसी को भी सफलता की ऊँचाइयों में ले जाने में समर्थ हैं।
इसके पूर्व छत्तीसगढ़ सरकार के अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष श्री रामजी भारती एवं मिशन के डोंगरगढ़ मण्डल प्रधान श्री एन.आर.देवाँगन सहित कई प्रमुख व्यक्तियों ने सन्तश्री सुधांशु जी महाराज का स्वागत सत्संग मंच पर किया। कार्यक्रम समापन के पूर्व सत्संग महोत्सव में सराहनीय सहयोग प्रदान करने के लिए बमलेश्वरी मंदिर ट्रस्ट समिति के अध्यक्ष श्री ब्रजरतन भैया, ग्राम ठाकुरटोला भोजन समिति, श्रीहरि नारद योग सेवा ट्रस्ट के प्रमुख आचार्य भोलेराम दिनकर एवं शहर पुलिस कोतवाल श्री सनत सोनवानी का सम्मान मिशन द्वारा किया गया।
सत्संग महोत्सव के संयोजक एवं मुख्य यजमान श्री गोपाल खेमुका एवं सन्तोष टेमरे ने सभी को आभार कहा। सत्संग महोत्सव के समस्त कार्यक्रमों का मंचीय संयोजन व संचालन विश्व जागृति मिशन के निदेशक श्री राम महेश मिश्र ने किया।