शिव शक्ति से जुड़ने के लिए वीरभद्र होना ज़रूरी-आचार्य सुधांशु जी महाराज

नागपुर। शिव कल्याणदाता है, शिव नीलकंठ हैं, भागीरथी गंगा को धारण करने वाले गंगाधर हैं, वह प्रेमाधार हैं, शिव का अर्थ है- भला अर्थात् भला करने वाली ईश्वरीय सत्ता।भला बनकर ही शिव की साधना की जा सकती है अन्यथा वह अनिष्ठकारी होती है, विनाशकारी होती है। शिवभक्त को भला होना यानी भद्र होना ज़रूरी है, साथ ही उसका वीर होना भी एक आवश्यक शर्त है। वीरभद्र को भगवान शंकर का प्रमुख गण कहा जाता है, अर्थात् शिव साधक में वीरता एवं भद्रता के दोनों गुण साथ-साथ विद्यमान हों।

यह उद्गार आज विश्व जागृति मिशन नागपुर मण्डल द्वारा रेशमबाग़ में आयोजित पाँच दिवसीय विराट भक्ति सत्संग महोत्सव के दूसरे दिवस के प्रातःक़ालीन सत्र की ध्यान कक्षा में आचार्य सुधांशु जी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने समूह-मन का ध्यान कराया और ‘’तन्में मन: शिव संकल्पमस्तु’’ पर आधारित विशेष संकल्प सभी साधकों व परिजनों को कराया। उन्होंने कहा कि मानस को सकारात्मक सोच से भरने की कला जीवन में आ जाना बड़ी बात है। उसके होने पर व्यक्ति ऊँचा उठता चला जाता है। नकारात्मकता एक प्रकार की बीमारी है, जो सोते-जागते मनुष्य को परेशान करती है। उन्होंने वैयक्तिक व्यक्तित्व से लेकर विश्व मस्तिष्क तक की यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डाला और कहा कि यदि व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, राष्ट्रीय एवं वैश्विक जीवन को सुखी बनाना है, तो नकारात्मकता के अवगुण को त्यागना ही पड़ेगा।

डॉ. अर्चिका सुधांशु की पुस्तक ‘ द योगिक लिविंग’ का हुआ विमोचन

श्री सुधांशु जी महाराज ने योग-ध्यानगुरु डॉ. अर्चिका सुधांशु द्वारा योग विज्ञान पर लिखित पुस्तक ‘द योगिक लिविंग’ का विमोचन इस अवसर पर किया। विश्व जागृति मिशन के निदेशक एवं प्रवक्ता श्री राम महेश मिश्र ने बताया कि यह ग्रन्थ व्यक्ति को एक योगी का जीवन जीने की ख़ासी प्रेरणा देगा। संगठन, सहकार एवं संघबद्धता को ‘योग’ की संज्ञा देते हुये उन्होंने कहा कि इस पुस्तक में अष्टाँग योग, ध्यान, सन्तुलित व पौष्टिक आहार एवं प्राकृतिक जीवन शैली का विस्तार से वर्णन किया गया है।

लाईफ़ पाथवे द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में आसनों एवं प्राणायाम आदि के लाभ बताए गए हैं। ग्रन्थ में ‘बाल-योग’ पर भी बड़ी सुन्दरता से प्रकाश डाला गया है तथा बालक-बालिकाओं के लिए विशेष योगासनों की व्यवस्था करते हुये उनका सटीक विवेचन किया गया है। ग्रन्थ में योग विद्या के सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक पक्षों का संयोजन बड़ी श्रेष्ठता के साथ किया गया है।

आचार्य सुधांशु जी महाराज ने आज नागपुर स्थित ‘दिव्य निर्मल धाम आश्रम’ का भ्रमण किया।उन्होंने कहा कि विश्व जागृति मिशन के नागपुर आश्रम ‘निर्मल धाम’ में राष्ट्रीय पर्यटन स्थल बनने की समस्त सम्भावनाएँ विद्यमान हैं। ज्ञातव्य है कि यहाँ प्रतिवर्ष लाखों व्यक्ति पहुँचते हैं। यहाँ विशाल पर्वत पर बारह ज्योतिर्लिंग स्थापित हैं तथा इसके कण-कण में दिव्यता के दर्शन आगंतुक को होते हैं।

सायंक़ालीन सत्र श्री सुधांशु जी महाराज द्वारा गाए प्रार्थना-गीत ‘’शरण में आ पड़ा तेरी, प्रभू मुझको भुलाना ना’’ से शुरू हुआ। उन्होंने प्रार्थना की शक्ति पर प्रवचन करते हुये उसे एक ताक़तवर हथियार बताया और कहा कि जब मनुष्य के पास कोई रास्ता और कोई चारा न हो, जब वह निराशा व हताशा के घोर अंधकार से घिर जाता है, तब प्रार्थना के माध्यम से वह ईश्वर की अमोघ का लाभ प्राप्त कर लेता है।

उन्होंने ‘शब्द’ के ज्ञान-विज्ञान पर चर्चा की और कहा कि शब्द ही किसी व्यक्ति को उठाता या गिराता है। शब्द से हुयी अपार हानि की कई इतिहास घटनाओं का ज़िक्र करते हुए महाराजश्री ने कहा कि ज्ञान, विद्या, ब्रह्म एवं अक्षर के मूल में शब्द ही तो है। उन्होंने सेवा और तप के आध्यात्मिक विज्ञान पर भी गहराई से प्रकाश डाला।

श्री सुधांशु जी महाराज ने जीवन में सन्तुलन बनाए रखने के सूत्र जिज्ञासुओं को दिए और कहा कि यह सन्तुलन भीतर से आता है, जिसे उपासना के माध्यम से जगाया जाता है। उन्होंने प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘स्वच्छ भारत अभियान’ की सराहना की और बताया कि विश्व जागृति मिशन ने ‘स्वच्छ भारत’ निर्माण का अभियान छेड़ा है। इसके लिए संचालित युगऋषि आयुर्वेद की जानकारी उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय को दी।

मिशन के निदेशक एवं प्रवक्ता श्री राम महेश मिश्र ने बताया कि रविवार १७ दिसम्बर को सामूहिक गुरूदीक्षा कार्यक्रम के पंजीयन शुरू हो गए हैं। मन्त्र दीक्षा प्रोग्राम पूर्वाहन ११: ३० बजे आरम्भ होगा। श्री मिश्र ने विराट भक्ति सत्संग महोत्सव की विशाल सभा का समन्वयन एवं संचालन किया। इसके पूर्व मुख्य यजमान श्री खेमचन्द एस. मेहरकुरे एवं बिट्ठल मेहर ने परिवार सहित व्यासपूजन किया। इस मौक़े पर नागपुर सहित महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों से आए ज्ञान-जिज्ञासु मौजूद थे। कार्यक्रम में पड़ोसी प्रान्तों मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के अलावा पंजाब, हरियाणा, दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश से आए श्रद्धालुओं ने भी भागीदारी की।