जय हो टिहरी! जय हो उत्तराखण्ड! जय हो भारत के उद्घोष के साथ टिहरी झील महोत्सव का दूसरा दिन भी रहा शानदार

ऋषिकेश/ सदाकत हुसैन। टिहरी झील महोत्सव में विदेश से आये सैलानियों ने परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती के सान्निध्य में योग, ध्यान, सत्संग, टिहरी झील भ्रमण एवं अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनन्द लिया साथ ही सभी ने उत्तराखंड की सुरम्य और आध्यात्मिक वादियों का आनन्द लिया। 
टिहरी झील महोत्सव का दूसरा दिन भी बहुत ही शानदार रहा। महोत्सव में सहभाग करने आये लोगों ने कहा कि इस स्थान को छोड़ कर जाने का मन नहीं कर रहा, कोई भी जाने का नाम नहीं ले रहा। सब को लगता है कि ’’अभी क्यों जायें छोड़कर कि दिल अभी भरा नहीं।’’ विदेश की धरती से आये कई लोग आज वापिस जाने वाले थे परन्तु टिहरी झील की सुन्दरता और महोत्सव का आकर्षण देखकर उन्हांेने कहा कि यहां पर दो दिन और रहेंगे। कुछ लोगों ने तो भविष्य में  अपने जन्मदिन और विवाह वर्षगाठ यही पर मनाने का मन बनाया। 
टिहरी झील महोत्सव को विदेश से आये कई लोगों ने जीवन की बेहतरीन यादगार पलों में से एक बताया और कहा कि हमने यहां पर बहुत ही लुत्फ उठाया। कुछ ने कहा कि यह हमारी आध्यात्मिकता की शुरूआत है।
विश्व के विभिन्न देशों से आये पर्यटकों से स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने, सक्रिय, सरल और सजग टिहरी स्वामी जी महाराज ने कहा कि टिहरी महोत्सव तो एक शुरूआत है यह “टिहरी लेक महोत्सव नहीं बल्कि अब टिहरी लाइफ महोत्सव बनेगा।” जो टिहरी वासियों के लिये एक नई रोशनी बनेगा, रोजगार और व्यापार का जरिया बनेगा।  उत्तराखण्ड का टिहरी झील महोत्सव पूरे विश्व के लिये आकर्षण का केन्द्र होगा।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने पुनः कहा कि 2020 में परमार्थ निकेतन में होने वाले अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के पश्चात टिहरी झील पर तीन दिवसीय योग महोत्सव मनाया जा सकता है। इससे विश्व के लोग यहां पर आयेंगे पहाड़ की संस्कृति को देखेंगे, जानेंगे तथा यहां के लोगों से मिलेंगे जिससे यहां के युवाओं और महिलाओं को बेहतर  अवसर प्राप्त हो सकते हैं।
स्वामी जी महाराज ने आज प्रातःकाल पूरे परिसर का पुनः भम्रण किया और देखा कि किस प्रकार ये सारी व्यवस्था की जा सकती हैं।
टिहरी महोत्सव में दक्षिण अमेरिका और सेन्ट्रल अमेरिका से आये आदिवासियों को तो इतना सुन्दर लगा और कहा कि कितनी सुन्दर है यह झील कितना निर्मल है यह जल; यहां की हवा, यहां के बोलते पहाड़ और पहाड़ों से निकलता सूर्य, स्वच्छ आकाश, गुनगुनाती और चहकते पक्षियांे का दल सब कुछ ही तो मनमोहक है। ’’टिहरी के द्वार आयेंगे बार-बार। टिहरी झील के किनारे झिलमिल ये सितारे देते हैं ईशारे, आईये बार-बार।’’ टिहरी से प्रस्थान करते हुये सभी ने कहा जय हो टिहरी! जय हो उत्तराखण्ड! जय हो भारत।