योग किसी संप्रदाय, जाति, धर्म की नहीं बल्कि योग जीवन जीने की कला है : राष्ट्रपति

मुंबई/ सुनील दुबे। द योग इंस्टीट्यूटः सद्भाव और एकता उत्सव का उद्घाटन भारत के राष्ट्रपति महामहिम श्री रामनाथ कोंविद, श्रीमती सविता कोंविद, परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज और डॉ. लोकेश मुनि समेत कई विशिष्ट अतिथियों ने किया। इस कार्यक्रम का आयोजन प्राचीन योग संस्थान योग इंस्टीट्यूट की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने पर आयोजित किया गया। 

इस मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि योग के बारे में झूठी धारणा बनाई और फैलाई जा रही है कि यह केवल कुछ लोगों या एक विशेष समुदाय का है। उन्होंने कहा कि योग सभी का है और सभी को जोड़ता है। उन्होंने कहा कि इस संस्थान ने योग को पूरी दुनिया में लोकप्रिय बनाकर बड़ी संख्या में लोगों को स्वस्थ रखने में अपना योगदान दिया है।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अति प्राचीन योग विद्या को समूचे विश्व ने स्वीकार किया है और अब इस योग को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली है। पिछले 100 वर्षों में इस संस्था ने योग विद्या को घर-घर में पहुंचाकर लोगों को स्वस्थ रखने का काम किया है। आगे भी इस संस्था ने समाज के विकास एवं स्वस्थ स्वास्थ्य के लिए योगदान देने की आवश्यकता है। योग विद्या सिर्फ शरीर ही नहीं, मन को भी स्वस्थ रखने का काम करता है। जब किसी व्यक्ति का स्वास्थ अच्छा होता है तब उसके परिवार का भी स्वास्थ्य अच्छा रहता है। वहीं जब परिवार का स्वास्थ्य अच्छा रहता है तब देश का भी स्वास्थ्य उत्तम होता है। इस तरह से योग विद्या की साधना से समूचा विश्व स्वास्थ्य जीवन का लाभ ले सकता है।

परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने द योग इंस्टीट्यूट: सद्भाव और एकता उत्सव के उद्घाटन अवसर पर कहा कि ’’ धर्म की जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका है लोग योगमय जीवन पद्धति के साथ-साथ धर्म का पालन करते हुये जीवनयापन करे। केवल आसन जीवन को आसान नहीं करेंगे, धर्म जीवन की मुश्किलों को आसान करता है। स्वामी जी महाराज ने कहा कि सच्चा योग तो प्रभु से खुद को जोड़ना है; आपनी शक्ति को समाज के साथ जोड़ना। योग परमार्थ है; योग स्वयं का समर्पण है। योग जोड़ता है और जो भी योग से जुड़ता है फिर वह जोड़ता ही चला जाता है।

जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा ’’योग जीवन पद्धति ही सच्ची साधना है। योगमय जीवन पद्धति ने समूचे विश्व को एक परिवार की तरह जोड़ कर रख है। उन्होेन कहा कि भारत और भारतीय संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम् की संस्कृति है; भारत की संस्कृति उदार संस्कृति है; सेवा, साधना और समसरता की संस्कृति है इस आत्मसात करना ही श्रेष्ठ जीवन है।

द योग इंस्टीट्यूट: सद्भाव और एकता उत्सव मे योग के साथ धर्म, विज्ञान, समरसता, सद्भाव और व्यवहारिक जीवन पद्धति पर चर्चा हुई। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री चिन्नानेनी विद्यासागर राव, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेन्द्र फडनवीस, आयुष मंत्री श्री श्रीपद् नाईक, योगा इंस्टीट्यूट मुम्बई की निदेशक डाॅ हंसा जयदेव योगेन्द्र, पद्मश्री भारत भूषण, गौर गोपाल दास, पूर्व सीबीआई निदेशक डाॅ कार्तिकेयन समेत देशभर से योग प्रेमी शामिल हुए।