गुरु में ही संपूर्ण संसार निहित है- महामण्डलेश्वर स्वामी असंगानन्द सरस्वती

ऋषिकेश 02 अगस्त। परमार्थ निकेतन के संस्थापक संरक्षक श्री स्वामी शुकदेवानन्द सरस्वती जी महाराज की पावन 53 वीं  पुण्यतिथि का 07 दिवसीय समारोह आज श्रीरामचरितमानस के अखण्ड पाठ व यज्ञ से विधिवत सम्पन्न हो गया। स्वामी शुकदेवानन्द ट्रस्ट के प्रबन्ध न्यासी महामण्डलेश्वर श्री स्वामी असंगानन्द सरस्वती समारोह की अध्यक्षता ने की, रायबरेली  से आये सन्त श्री स्वामी ज्योतिर्मयानन्द जी , स्वामी विश्वात्मा नन्द जी, पं0 वनवारी लाल शास्त्री जी, स्वामी विज्ञानानन्द जी, स्वामी केशवानन्द जी, स्वामी शिवानन्द जी आदि की उपस्थिति में समारोह सम्पन्न हुआ। प्रातः 09.00 बजे श्रीरामायण पाठ का समापन कर आरती, हनुमान चालीसा पाठ एवं सदगुरुदेव पूजन व समाथि मंदिर की दिव्य आरती का क्रम महामण्डलेश्वर स्वामी असंगानन्द सरस्वती जी एंव सन्त श्री स्वामी ज्योतिर्मयानन्द जी के सान्निध्य में सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर देश विदेश से आये भक्तों, श्रद्धालुओं व साधकों का मार्गदर्शन करते हुए महामण्डलेश्वर स्वामी असंगानन्द सरस्वती ने कहा कि गुरु ही शिष्य की भक्ति व मुक्ति के कारण बनते हैं। गुरु हमारे हृदय में परमात्मा के प्रति अनुराग जगाते हैं। परम पूज्य महामण्डलेश्वर सदगुरुदेव श्री स्वामी शुकदेवानन्द सरस्वती जी महाराज इस परम्परा के सच्चे सन्त थे।
सन्त श्री स्वामी ज्योतिर्मयानन्द जी ने कहा कि सद्गुरु सामान्य नहीं होते, वेे महाचेतना के शक्तिपुंज होते हैं, परमात्मा के प्रखर प्रतिनिधि होते हैं। स्वयं परमात्मा इनकी नियुक्ति करता है और उनकी भावी कार्य योजना बनाता है। सद्गुरु जनकल्याण योजना को लेकर धरती पर अवतरित होते हैं और कार्य को पूर्णता देकर पुनः वहीं भगवत् धाम वापस लौट जाते हैं।
श्री राम अनन्त तिवारी ने बताया कि 27 जुलाई से आरम्भ 02 दिवसीय अखण्ड रामायण पाठ आज विधिवत् सम्पन्न हो गया है। इस रामायण पाठ में परमार्थ निकेतन के साधकों, सेवकों तथा ऋषिकुमारों ने भाग लिया वहीं दूर दूर से पधारे भक्तों, श्रद्धालुओं ने भी सतत भागीदारी की। श्रद्धांजलि समारोह में ऋषिकेश के विभिन्न आश्रमों के सन्त पधारे इसी क्रम में यज्ञशाला में श्री रामायण यज्ञ हुआ कार्यक्रम का समापन सन्त भोजन व भण्डारे के साथ हुआ। समारोह में विभिन्न कार्यक्रमों का समन्वयन परमार्थ निकेतन के प्रबन्धक राम अनन्त तिवारी, नरेन्द्र बिष्ठ, लक्की सिंह रायबरेली से आये मानस पाठ माँ आनन्दमयी मानस मंण्ड़ल के मनोज मिश्रा, श्यामू शुक्ला, आशू श्रीवास्तव व सहयोगी टीम की विशेष उपस्थिति रही।