स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने हिन्दू आध्यात्मिक सेवा मेला मे की शिरकत, बोले- मेले सेवा के दर्शन है प्रदर्शन के लिये नहीं

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष आध्यात्मिक गुरू स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने इन्दौर में आयोजित हिन्दू आध्यात्मिक एवं सेवा मेले में सहभाग किया। स्वामी जी ने अन्नदाता किसान, पर्यावरण एवं भूमि वंदन पर प्रेरक उद्बोधन दिया। इस मेले का आयोजन हिन्दू आध्यात्मिक एवं सेवा फाउण्डेशन द्वारा किया गया। इसमें किसानों की समस्याओं के साथ हिन्दू आध्यात्मिकता के समक्ष उपस्थित सम-सामयिक चुनौतियांे के समाधान हेतु विशिष्ट अतिथियों ने विचार मंथन किया।
इस सेवा मेले में श्री कैलाश विजयवर्गीय जी, महामण्डलेश्वर कनकेश्वरी देवी जी, स्वामी ईश्वरानन्द जी महाराज, श्री गुणवन्त कोठारी जी, श्रीमती राजलक्ष्मी जी, श्री विनोद अग्रवाल, कृषि वैज्ञानिक एवं सैकड़ों की संख्या में किसान भाई उपस्थित थे।
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा ’हिन्दू धर्म घन्टी बजाने तक सीमित नहीं है बल्कि हिन्दू धर्म तो मानव के साथ प्रकृति की सेवा के लिये भी समर्पित हैं। हमारी ऋषि परम्परा ही सेवा की रही है हमारे ऋषियों ने सेवा के लिये अपने आप की आहुती दी है। हमें भी सेवा की शुरूआत करनी चाहिये और उसकी शुरूआत हमारी गलियों से करे क्योंकि घर के साथ हमारी गली भी साफ-सुथरी होनी चाहियें अतः गली को गोद ले लें। उन्होने कहा कि किसानों को गोद लेने का मतलब उनके सम्मान से है; उनके साथ मिलकर काम करने से है। अब समय आया है हम उनके लिये कुछ करें उनके लिये जियें जो पूरे देश के लिये जीता है। ’जय जवान जय किसान’ एक नारा नहीं था बल्कि एक संस्कृति थी अतः किसानों के लिये जिये उनके लिये खड़े हो जायें।
उन्होने कहा मेरे देश का किसान आत्महत्या नहीं करेगा; मेरे देश का किसान मरने के लिये पैदा नही हुआ है बल्कि मरती हुई जिन्दगी को एक नया जीवन देने के लिये पैदा हुआ है; मरती हुयी धरती को एक नया जीवन देने के लिये खड़ा हुआ है ये काम हमारे किसान भाई ही कर सकते है और हमें भी उनके साथ पर्यावरण संरक्षण के लिये खड़ा होना होगा। उन्होंने कहा कि हमारे पास प्लान ए और प्लान बी हो सकता है परन्तु प्लानेट एक ही है उस प्लानेट के लिये, अगर आप चाहते है कि आने वाली पीढि़याँ बचें; आपकी वर्तमान पीढ़ी बचे तो उसके लिये पर्यावरण की रक्षा जरूरी है इसलिये मेरी गली बदलेगी तो गांव बदलेगा अतः गली को को गोद लें ले ताकि हमारी गली का गंदा पानी क्षिप्रा में; नर्मदा में और गंगा में न जा सके। हमें अपनी प्राणवाहिनी नदियों प्रदूषण मुक्त करना है इसके लियेे खुद को जाग्रत करना होगा; खुद को झोंकना होगा। उन्होने कहा कि देश को स्वच्छ रखना केवल सरकारों का काम नहीं है, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेेन्द्र मोदी जी ने जो स्वच्छ भारत मिशन चलाया वह कोई सरकारी नारा नहीं है बल्कि उससे हर भारतीय को जुड़ना होगा। हम सेल्फी ले लेकिन सेल्फी के साथ सेल्फ को भी जोेेेेेड़े तभी तो देश को खड़ा करने में हम अपना योगदान दे सकते है।
स्वामी जी ने ऋषि परम्परा को याद करते हुये कहा कि ये आध्यात्मिक मेले सेवा के दर्शन है प्रदर्शन के लिये नहीं है। सेवा का संदेश प्रसारित करने के लिये है। उन्होने कहा भगवान जीवन दाता है और किसान अन्नदाता है; किसान, ब्रह्म की साधना के उपासक है क्योंकि अन्न ही ब्रह्म है। जैविक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिये कहा कि ’जैविक जीवन ही जीवंत जीवन है।’
इस मेले में सैकड़ों की संख्या में अन्नदाता किसान उपस्थित थें। कृषि वैज्ञानिकों ने किसान भाईयों को जैविक खेती का महत्व समझाया तथा कीटनाशक एवं खाद से होने वाले नुकसान के विषय में जानकारी प्रदान की।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा श्रीमती राजलक्ष्मी जी एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों को भेंट किया। स्वामी जी ने उपस्थित सभी को जैविक कृषि और जैविक जीवन की ओर बढ़ने का संकल्प काराया।