‘शिक्षक’ इस धरती का सबसे बड़ा पद है, गुरु पद पाकर गर्व का अनुभव करें -राम महेश मिश्र

नई दिल्ली/ नेहा मिश्रा। अच्छे लगते हैं वह शिक्षक जिन्हें अपनी क्लास की पहली बेंच से लेकर आखिरी बेंच तक के बच्चों का नाम पता होता है। जो उन बच्चों से भी उत्तर उगलवा लेते है जिन्हें उत्तर पता होता है लेकिन वो क्लास में बोलने से परहेज करते है।​ 
हाँ मन को खुशी देते है ऐसे शिक्षक जो कमजोर बच्चों को जस की तस हालत में छोडने के बजाय उन्हें मुख्यधारा में शामिल कर देते हैं। हाँ उन शिक्षकों का थोडा अतिरिक्त सम्मान करने का मन होता है जो परीक्षा कक्ष में हडबडी में गिरी पेन चुपचाप रख देते है बच्चों की टेबल पर।​ दोस्त की तरह लगते हैं वह शिक्षक जो उदास चेहरा देख बिना किसी लाग लपेट के पूछ लेते हैं बच्चों की परेशानी।​
ठट्ठा मार हँस लेते है जो शिक्षक अपने विद्यार्थियों के साथ। अक्सर उनकी यह सहजता दिल में सहेज लेते है बच्चे और कर लेते है पसंदगी की लिस्ट में उन शिक्षकों का क्रम थोड़ा और ऊपर।​
अक्सर वह शिक्षक हो जाते हैं बेहद प्रिय जो कॉपी में बडा सा लाल गोला बनाने की जगह लिख देते हैं सही शब्द या पंक्ति। जो खेल लेते हैं अपने विद्यार्थियों के साथ थोडी देर बैडमिंटन, रख जिनके कंधों पर बेतकल्लुफी से हाथ। साझा कर लेते हैं बच्चे क्लास का सुलझा उलझा अनुभव।
अक्सर वह शिक्षक पसंद किये जाने से भी ऊपर पसंद किये जाते हैं जो दे देते हैं बच्चों को स्वतंत्रता अपना दृष्टिकोण रखने की और डाल लेते हैं विद्यार्थी पर एक स्नेह व सम्मान भरी दृष्टि एक सरल मुस्कान के साथ।​
हाँ बरबस आकर्षित कर लेते हैं वह शिक्षक जो बच्चों के साथ पी लेते हैं चाय, कर लेते है देश व दुनिया पर खुलकर बहस।​ हाँ ऐसे शिक्षक बेहद अच्छे लगते हैं जिनका साथ महसूस करा देता है दोस्त, अभिभावक, अध्यापक, भाई, बहन जैसा रिश्ता।​ अक्सर बढ़ता ही जाता है इनका सम्मान, होते ही जाते हैं ये और अधिक… और अधिक…और अधिक प्रिय।​