तालीम का गढ़: जेवर की जामा मस्जिद

जेवर/ सदाकत अंसारी। कस्बे के मोहल्ला काजीबाड़ा में बड़ी जामा मस्जिद है। यह मस्जिद करीब 200 साल पुरानी है। इसके बारे में कहा जाता है कि जितनी इसकी ऊंचाई है, उतनी ही गहरी इसकी नींव है। इस मस्जिद को काजियों ने बनवाया था, लेकिन इसे असली रूप एक पशु व्यापारी ने दिया था। इसमें एक साथ लगभग एक हजार लोग नमाज पढ़ सकते हैं। मस्जिद में वक्त के साथ-साथ बदलाव होते रहे है लेकिन अंदर का भाग अब भी पहले जैसा है। एक साल पहले यहां नमाजियों के लिए सात एसी लगाए गए थे, ताकि नमाजियों व रोजदारों को गर्मियों में नमाज अदा करने में कोई दिक्कत न हो। इस मस्जिद में देश-विदेश से भी जमात आती है। अब ये दिनी तालिम का गढ़ बन गई है और मस्जिद को मरकज भी बना दिया गया है। मस्जिद में लोग दूर-दराज से नमाज पढ़ने आते हैं। मस्जिद में पिछले साल एसी लगाए गए थे, जिससे इस बार गर्मियों में लोगों को राहत मिल रही है। जुमे के दिन इस मस्जिद में नमाजियों की भीड़ काफी बढ़ जाती है। काफी लोग यहां दीनी मालूमात करने आते हैं। मस्जिद से जमात बनकर दूर-दराज के इलाकों में जाती है और लोगों को भलाई की राह दिखाती है।