स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने NCGG इंजीनियरों को जापान से आईए भगीरथ बनें का दिया संदेश

ऋषिकेश/ धनंजय राजपूत। परमार्थ निकेतन में सार्वजनिक स्वास्थ्य इंजीनियरिंग विभाग राजस्थान सरकार के 60 इंजीनियरों एवं भारत सरकार के उच्चाधिकारियों ने ’वाश गतिविधियों में विश्वास आधारित दृष्टिकोण विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला’ में सहभाग किया। इस कार्यशाला का आयोजन ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलांयस, नेशनल सेन्टर आॅफ गुड गवर्नेंस, भारत सरकार एवं गंगा एक्शन परिवार परमार्थ निकेतन के संयुक्त तत्वाधान में किया गया।

कार्यशाला के माध्यम से विशेषज्ञों ने बेहतर स्वच्छता और उचित स्वच्छता के बीच का अन्तर एवं विभिन्न धर्मों में वाश (वाटर, सेनिटेशन और हाइजीन) के महत्व के विषय में जानकारी दी। उन्होने बताया कि किस प्रकार धार्मिक संगठन, विभिन्न धर्मों के धर्मगुरू, धार्मिक संस्थायें समाज के लोगों को स्वच्छता के लिये प्रेरित कर सकती है। साथ ही जनसमुदाय को किस प्रकार समझाया जाये कि स्वच्छता का सम्बंध धार्मिकता और आध्यात्मिकता से है तथा स्वच्छता एक नैतिक एवं सामाजिक दायित्व है।

एनसीजीजी के कार्यक्रम निदेशक डाॅ बी एस बिष्ट के निर्देशन में आये इंजीनियरों के दल ने वाश विशेषज्ञों से जनसमुदाय को स्वच्छता के लिये प्रेरित और प्रभावित करने तथा समाज में वाश की स्थिति को बेहतर करने के गुर सीखे।

परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस के संस्थापक एवं गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने एनसीजीजी इंजीनियरो के दल का परमार्थ में अभिनन्दन करते हुये जापान से भेजे अपने संदेश में सभी को सम्बोधित करते हुये कहा, ’जापान में चारों ओर बर्फ ही बर्फ फैली हुई है, यहां पर अत्यधिक ठंड है लेकिन यहां पर राष्ट्र भक्ति, राष्ट्र प्रेम की जो उष्मा है वह अद्भुत है जिसका दर्शन हमें हर पल, हर क्षण देखने को मिलता है। अब समय आ गया है कि हम भी हमारे देश में अपनी-अपनी भक्ति करे लेकिन राष्ट्र भक्ति पहले हो; राष्ट्र प्रेम पहले हो। राष्ट्र प्रेम की उष्मा की ज्योति हमारे दिलों में हमेशा जगमगाती रहे।’ स्वामी जी ने कहा,  ’आज सभी ’’इंजीनियरों को भगीरथ बनने की जरूरत है’’। धरती पर भगीरथ पहले इंजीनियर थे जिन्होने भागीरथी गंगा को धरती पर लाया था। इसे भगीरथ का प्रयोग कहंे या तपस्या जो भी हो वह इतनी विलक्षण थी की आज भी गंगा हमारे पास है और भारत की भाग्य विधाता है। अब हमें प्रयास करना है कि गंगा माँ धरती पर हमेशा बनी रहे। ऐसा न हो कि सरस्वती एक नदी थी की तरह गंगा भी एक नदी थी का ऐतिहासिक रूप प्राप्त कर लें।  ऐसा न सुनना पड़े और आने वाली पीढ़ियों को ऐसा न पढ़ना पड़े कि गंगा अतीत की गोद में समा गयी अतः हम सभी को अपनी सामथ्र्य, शिक्षा एवं योग्यता के अनुसार नदियों, पर्यावरण एवं जल के संरक्षण के लिये कार्य करना होगा। जब देश की नदियों के पुनरूद्धार होगा तभी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रह सकता है।’

डाॅ बी एस बिष्ट ने कहा कि हम विगत चार वर्षों से राजस्थान सरकार के इंजीनियरों के नये बैच को स्वच्छता का प्रशिक्षण देने हेतु परमार्थ निकेतन लाते है। प्रतिवर्ष हमने यहां से स्वच्छता के नये आयामों के साथ राजस्थान राज्य की जल समस्याओं के आधार पर जल संरक्षण की नयी तकनीकियों की जानकारी प्राप्त की। डाॅ बिष्ट ने बताया कि राजस्थान राज्य के लगभग 19 जिलें, 13,5000 गांव जल संकट का सामना कर रहे है ऐसे में जल संरक्षण एवं संवर्धन की नयी तकनीक को अपनाना ही बेहतर माध्यम है।

श्री संजीव शर्मा अधिशासी अभियंता, ने चर्चा के दौरान बताया कि राजस्थान राज्य के पास सतही जल न के बराबर है वहां पर कोई भी हिमनदी नहीं है जिससे पूरा जोर भूजल पर ही पड़ता है ऐसे में जल को सहेजना का प्रयास ही जीवन दे सकता है।

डाॅ दिव्यांक त्यागी, सहायक अभियंता, श्री रामकेश मीणा अधिशासी अभियंता, सुश्री करिश्मा बेरवाल सहायक अभियंता, श्री राजेन्द्र कुमार लोहड़ा, अधिशासी अभियंता, श्री पवन अग्रवाल, अधिशासी अभियंता, श्री हरिराम अधिशासी अभियंता, श्री संजीव शर्मा अधिशासी अभियंता, श्री भगवान शाय जाजु, अधिशासी अभिंयता, श्री अंकुर मित्तल, सहायक अभियंता, श्री हरीश कुमार वर्मा, अधिशासी अभियंता, श्री केदार चन्द्र वर्मा अधिशासी अभियंता, श्री देवेन्द्र कुमार कोठारी, अधिशासी अभियंता, श्री विजय कुमार सिंघल, अधीक्षण अभियंता, श्री कर्णीप्रताप अधिशासी अभियंता, श्री भरत सिंह, अधिशासी अभियंता, श्री हिमांशु गोविल अधिशासी अभियंता एवं भारत सरकार के उच्चाधिकारियों ने सहभाग किया।

स्वामी जी महाराज ने राजस्थान सरकार के इंजीनियरों एवं भारत सरकार के उच्चाधिकारियों को आज के युग का भगीरथ बनने का आह्वान किया। साथ ही स्वच्छता, जल एवं पर्यावरण संरक्षण के लिये भगीरथी संकल्प करने हेतु प्रेरित किया। कार्यशाला के समापन अवसर पर दल के सभी सदस्यों ने साध्वी आभा सरस्वती, सुश्री नन्दिनी त्रिपाठी, लोरी, मारिया, ट्रीसा, श्री राजेन्द्र बोहरा, सुश्री श्रुति पंत, सैमुअल, जेम्स टोपो, आचार्य संदीप शास्त्री, परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमार एवं लद्दाख से आयी बौद्ध भिक्षुणियों के साथ विश्व में स्वच्छ जल की आपूर्ति हेतु वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी सम्पन्न की।

राजस्थान सरकार के इंजीनियरों एवं भारत सरकार उच्चाधिकारियों ने परमार्थ तट पर होेने वाली दिव्य गंगा आरती में सहभाग किया। डाॅ बी एस बिष्ट एवं अन्य अधिकारियों को साध्वी आभा सरस्वती जी एवं सुश्री नन्दिनी त्रिपाठी जी ने शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया। स्वामी जी महाराज ने राजस्थान सरकार के इंजीनियरों एवं भारत सरकार के उच्चाधिकारियों को अधिक से अधिक मात्रा तादाद में वृक्षारोपण करने के लिये प्रेरित किया। उन्होने कहा कि राजस्थान राज्य में न तो हिमालय है और न गंगा है अतः सभी को वृक्षारोपण के लिये भगीरथ की तरह दृढ़ संकल्प करना होगा। पौधारोपण कर पेड़ों का हिमालय खड़ा करना होगा ताकि अधिक से अधिक जल का संरक्षण किया जा सके। स्वामी जी की प्रेरणा से गंगा तट पर उपस्थित सभी ने हाथ खड़े कर वृक्षारोपण एवं जल संरक्षण का संकल्प किया।