बच्चों को दे शिक्षा के साथ स्वच्छता की दीक्षा-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश/ धनंजय राजपूत। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज एवं मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री, जल संसाधन और गंगा सफाई केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री सत्यपाल सिंह जी की दिल्ली में बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में शिक्षा के साथ वाटर करिकुलम ( पाठ्यक्रम ) को शामिल करना, मिड डे फ्रूट योजना, स्कूलों में जितने बच्चे उतने पेड, गंगा के तटों पर छायादार एवं औषधियुक्त पौधों का रोपण, हरित शवदाह गृह का निर्माण आदि विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
स्वामी जी ने कहा कि बच्चों को बचपन से ही जल, पेड़ एवं ऑक्सीजन के महत्व के विषय में जानकारी देना चाहिये ताकि वे इनके महत्व को समझे उन्हे बताये कि शरीर के विभिन्न अंग मस्तिष्क, लीवर और किडनी को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिली तो उनके क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना रहता है। उन्होने कहा कि हमारे शरीर में 90 प्रतिशत ऊर्जा ऑक्सीजन से आती है और 10 प्रतिशत भोजन से प्राप्त होती है। स्वस्थ शरीर में ऑक्सीजन का स्तर 99 प्रतिशत होना चाहिये अगर 96 प्रतिशत से कम हुआ तो अनेक बीमारीयों का सामना करना पड़़ता है। स्वस्थ्य मनुष्य एक दिन में लगभग 23 हजार बार साँस लेता है यदि ऑक्सीजन की मात्रा वातावरण से घट जायें तब क्या होगा यह विचारणीय प्रश्न है। उन्होने गोरखपुर में ऑक्सीजन की कमी के कारण घटी दिल दहला देने वाली घटना को भी याद किया।
स्वामी जी ने कहा कि जल भी मनुष्य की मूलभूत आवश्यकताओं में से एक हैै। स्वच्छ जल के अभाव के कारण कारण भारत में ही प्रतिदिन पांच वर्ष से कम उम्र के लगभग 1600 बच्चों की मौत हो जाती है। स्वच्छ जल के अभाव में जीवन तो क्या किसी भी सभ्यता की कल्पना तक नहीं की जा सकती। उन्होने कहा कि हम बच्चों को बेहतर शिक्षा, श्रेष्ठ संस्कार और उन्नत भविष्य देेने के लिये अथक प्रयास करते है परन्तु इन सब से भी ज्यादा जरूरी है स्वस्थ जीवन। इस ओर एक बार फिर विचार करें और अपने व अपने परिवार के लिये जिस प्रकार धन संग्र्रह करते है उसी प्रकार ऑक्सीजन का भी संग्रह करें; अपना ऑक्सीजन बैंक स्वयं बनायें।
स्वामी जी ने श्री सत्यपाल सिंह जी को हरित शवदाह गृह के विषय में जानकारी देते हुये कहा कि इस प्रणाली के द्वारा मात्र 120 किग्रा लकडि़यों में शव का दाह किया जा सकता है इससे कम लकड़ी, कम धुंआ और कम समय में दाहसंस्कार सम्भव है अतः यह प्रणाली विशेष कर देश की धार्मिक महत्व रखने वाली नदियों के किनारों को स्वच्छ रखने का बेहतर विकल्प है। उन्होने शिक्षण पाठ्यक्रम में स्वच्छता, जल एवं पर्यावरण संरक्षण को शामिल करने और जागरूकता के लिये इन विषयों पर प्रतियोगितायें आयोजित करने पर भी विचार विमर्श किया। उन्होने कहा कि गंगा एक्शन परिवार और जीवा इस दिशा में बेहतर कार्य कर रहे है और अगर सभी मिलकर इस दिशा में कार्य करे तो और भी बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे।