स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने ग्रीन इंजीनियरिंग के माध्यम से सतत विकास का कराया संकल्प

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस के सह संस्थापक एवं गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने ’द इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया, स्टेट सेन्टर देहरादून’ में आयोजित दो दिवसीय ’आल इंडिया सेमिनार आन साइन्टिफिक माइनिंग ऑफ रिवर बेड मैटेरियल एण्ड एनवार्नमेन्टल इम्पैक्ट इन हिल एण्ड फूटहिल्स रीजन’ के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सहभाग किया।

संगोष्ठी का शुभारम्भ स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, पर्यावरणविद्, पद्म श्री डॉ अनील प्रकाश जोशी, डॉ सैय्यद फारूख, पूर्व प्रमुख सचिव व्ही के बहुगुणा, डॉ ए के दिनकर जी, ए सी शर्मा जी, चेयरमेन, द इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनीयर्स इंडिया स्टेट सेन्टर देहरादून, श्री रणवीर सिंह चौहान एवं अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति मे दीप प्रज्जवलित कर किया गया।

आज के सत्र में भारत के विभिन्न प्रांतों के 200 से अधिक प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया जिसमें वैज्ञानिक, अभियन्ता, अध्यापक, वानिकी विशेषज्ञ, पेशेवर अभियन्ता, पर्यावरण विशेषज्ञ एवं नीति निर्माताओं ने भाग लिया।

इस कार्यक्रम का आयोजन द इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनीयर्स इंडिया स्टेट सेन्टर देहरादून, एनावायरनमेंट इंजीनियरिंग डिवीजन बोर्ड, इंडियन एसोसिएशन ऑफ साइल, वाटर संरक्षण एण्ड भारतीय मृद्रा एवं जल संरक्षण संस्थान देहरादून के संयुक्त तत्वाधान में हुआ।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य पहाड़ी एवं तलहटी वाली नदियों से अवैज्ञानिक रूप से रेत एवं बजरी के खनन से पर्यावरण, जल, मृदा, जलिय जीवन एवं वनों पर पड़ने वाले प्रभाव का वैज्ञानिक रूप समाधान करना।

कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि ’द इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनीयर्स इंडिया विश्व में ख्याति प्राप्त संस्थान है इस संस्थान ने बेहतरीन कामयाबियों को हासिल किया है तथा नायाब नमूने के पुल एवं सड़कों का निर्माण कर इस देश को सौगात दी है। उन्होने कहा कि अब समय आ गया है कि हम वैज्ञानिक रूप से अपनी नदियों को भी सवांरे और इसमें विज्ञान बहुत बड़ी भूमिका निभा सकता है क्योंकि वैज्ञानिक रूप से किया गया खनन और विकास पर्यावरण मित्र विकास होगा और यह विकास भविष्य के लिये असीम सम्भावनाओं के द्वार खोल सकता है।’

स्वामी जी ने कहा कि इंजीनियरिंग के माध्यम से हम समाज के लिये सेतु बना रहे है; सड़कों का निर्माण कर रहे है साथ ही अपनी भावनाओं के द्वार समाज के लिये समयदान कर सद्भावनाओं के सेतु भी बनायें और खुद भी समाज के लिये सेतु बनें; प्रेम के सेतु बनायें और ये तभी सम्भव हो सकता है जब हम समाज में सबको मिलकर और मिलाकर काम करें। इंजीनीयर समाज के लिये कुछ नया-नया गढ़ते है परन्तु वह गढ़ना केवल बाहरी स्तर पर ही नहीं बल्कि खुद को गढ़ने का कार्य भी करें। जब हम खुद को गढ़ते है तो जीवन में एक नयी सृष्टि का निर्माण होता है और उस भीतर के बदलाव के द्वारा बाहर भी सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है जिसका फायदा भी दूर तक होता है इसी पर हमें ध्यान देकर कार्य करने की जरूरत है। ’

चेयरमेन, द इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनीयर्स इंडिया स्टेट सेन्टर देहरादून, श्री रणवीर सिंह चौहान जी ने कार्यक्रम में सहभाग करने हेतु आये सभी प्रतिभागियों के प्रति अभार व्यक्त किया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने सभी को ग्रीन इंजीनीयरिंग के माध्यम से सतत विकास का संकल्प कराया सभी ने हाथ उठाकर संकल्प किया। पूज्य स्वामी जी ने कहा कि ग्रीन संकल्प करे साथ ही किसी भी फाइल पर सिग्नेचर तो करे साथ ही खुद को ग्रीन सिग्नेचर बनायें एवं श्री रणवीर सिंह चौहान जी को रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया। इस अवसर पर प्रोफेसर डी आर सेन, डॉ आशीष पाण्डे, डॉ  एस के मिश्रा, डॉ व्ही के मिश्र, डॉ भूवन जोशी, डॉ पी पी ओजस्वी, डॉ यू के मौर्य, डॉ व्ही के भट्ट एवं भारत के विभिन्न प्रांतों से आये विख्यात प्रोफेसर उपस्थित थे।