जन्मदिन विशेष: संत सानिध्य से परमेश्वर की पहचान ‘स्वामी चिदानंद सरस्वती’

एक घड़ी आधी घड़ी, आधौ में पुनि आध।
तुलसी संगत साधु के कटै कोटि अपराध ।।

सच्चे संत की महिमा का बखान सूर कबीर और तुलसी के मुखार बन्दुओं से निकली ऐसी तमाम पंक्तियों में सत् प्रतिशत झलकती है। यथार्थ में इन संतों द्वारा बताए गए ये लक्षण ही आधुनिक दौर में संत परंपरा की पहचान की कसौटी हैं। भारतभूमि में सदियों से संतों का वास है, लेकिन आज के इस भौतिकतावादी युग में सच्चे संत कम ही मिलते हैं, ढोंगी और पाखंडी लोगों ने भी संतों का चोला ओढ़ लिया है, जो इस परंपरा को दूषित और कलुषित भी कर रहे हैं। फिर भी न धरती वीरों से खाली है और न वसुंधरा पर संभावनाओं का अंत हुआ है। समाज को सत् और असत् का अंतर बताने के लिए आज भी अनगिनत संत मौजूद हैं।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती इस संत परंपरा में एक अहम स्थआन रखते हैं। जो कि एक हिन्दू आध्यात्मिक गुरू और सन्त हैं। वह मुनि की रेती स्थित ‘परमार्थ निकेतन आश्रम’ के संस्थापक और अध्यक्ष हैं। स्वामी जी भारतीय संस्कृति शोध प्रतिष्ठान, ऋषिकेश और पिट्सबर्ग के हिन्दू-जैन मन्दिर के भी संस्थापक एवं अध्यक्ष हैं। स्वामी चिदानंद सरस्वती को 1987 में हिंदू धर्म के 11-खंड विश्वकोष के लिए आधार तैयार करने का श्रेय मिलता है।

ऐसे स्मरणीय स्वामी जी का जन्म 3 जून, 1952 को हुआ था। स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने संस्कृत और दर्शनशास्त्र में मास्टर डिग्री हासिल की और कई भाषाओं का गहन अध्ययन किया । आज वह कई भाषाओं में धाराप्रवाह बोलते हैं । वह ग्लोबल इंटरफेथ वाश एलायंस के सह-संस्थापक भी हैं । यह दुनिया की पहली अंतर्राष्ट्रीय इंटरफेथ पहल है, जो विश्व के सभी धर्मों को एकजुट करती है। उनकी जीवनी “गॉड्स ग्रेस: द लाइफ एंड टीचिंग्स ऑफ़ पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती” को 2012 में मंडला पब्लिशिंग ने प्रकाशित किया । 
संत परंपरा की ये विशेषता है, कि सद्भाव से ओत-प्रोत माहौल वहीं बन जाता है, जहां संत वास करते हैं । ऐसा स्वामी के साथ रहकर महसूस किया गया है । चिदानंद सरस्वती कई मानवतावादी और पर्यावरण संगठनों के संस्थापक व सह-संस्थापक हैं । जो गंगा नदी और इसकी सहायक नदियों को संरक्षित करने के लिए ‘गंगा एक्शन परिवार’ सहित, ‘इंडिया हेरिटेज रिसर्च फ़ाउंडेशन, जो शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, युवा कल्याण और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करता है । ‘दिव्य शक्ति फाउंडेशन’, जो कि विधवा और ग़रीब महिलाओं और बच्चों को शिक्षा और सहायता प्रदान करता है। गायों और कुत्तों को सुरक्षा प्रदान करता है; ‘ग्लोबल इंटरफेथ वॉश एलायंस सुरक्षित पेयजल, स्वच्छता और उचित स्वच्छता तक पहुंच प्रदान करने के लिए काम करता है । इतना ही नहीं ‘प्रोजेक्ट होप’, एक छत्र संगठन है, जो कि आपदा राहत और दीर्घकालिक पुनर्वास दोनों प्रदान करता है ।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती फ़िलहाल एलिजाह इंटरफ़ेथ संस्थान के लिए विश्व धार्मिक नेता के बोर्ड मेंबर हैं। पूज्य स्वामीजी का धर्म एकता है, और वह संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक, विश्व आर्थिक मंच और धर्म की संसद के साथ-साथ शांति के लिए धर्म सहित कई अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों और संसदों में हिस्सा ले चुके हैं। KICIIDID  जेरुसलम में हिंदू-यहूदी शिखर सम्मेलन, वेटिकन और अन्य कई लोगों द्वारा हिंदू-ईसाई संवाद में भी वह उपस्थित रहे। वह दुनिया भर में लगातार विश्व शांति तीर्थयात्रा के गुरू भी रहे।
पुज्य स्वामीजी को विश्व शांति के राजदूत पुरस्कार, महात्मा गांधी मानवतावादी पुरस्कार, हिंदू का वर्ष पुरस्कार, प्रमुख व्यक्तित्व आकाश सहित अनगिनत पुरस्कार दिए गए हैं। सच्चे संतों का सानिध्य पाकर निरा पाखंडी और पापी भी कोटिश: अपराधों से तौबा करके नवजात इंसान की तरह परमेश्वर का कृपा पात्र बन सकता है।
लेखक – शाहिद ख़ान, वरिष्ठ पत्रकार