कुरीतियों को संगम की डुबकी में ही डुबो देना ही श्रेष्ठ जीवन है – स्वामी चिदानन्द सरस्वती

प्रयागराज/ बुशरा असलम। अरैल क्षेत्र संगम के पावन तट पर आज संगम महाआरती का शुभारम्भ किया। आरती का उद्घाटन पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री केशरीनाथ त्रिपाठी जी, परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, साध्वी भगवती सरस्वती, हरिजन सेवक संध के अध्यक्ष श्री शंकर सान्याल, मेला कमिशनर डॉ आशीष कुमार गोयल ने किया।
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री केशरीनाथ त्रिपाठी ने कहा कि “समुद्र मंथन के समय निकले अमृत की एक बुंद प्रयाग में भी गिरी थी वह केवल अमृत की बुंद नहीं थी बल्कि यह बुंद थी देश के अध्यात्म की, इस देश के संस्कृति की, इस देश के सर्वश्रेष्ठ मनोभावों को अमरत्व प्रदान करने वाली बुंद थी। आज उसी संस्कृति के आधार पर, उसी संस्कार के आधार पर हम अनादिकाल से कुम्भ मेले को मनाते चले आ रहे है। उन्होने कहा कि हर 6 वर्ष और 12 वर्ष में लगने वाला कुम्भ हमारी प्रेरणा को ईश्वर से जोड़ता है। हमारे अन्दर श्रद्धा का भाव जागृत करता है। हम यहां संगम जो स्नान करते है वह हमारा संगम में स्नान ही नहीं है बल्कि हमारे हृदय की शुद्धि का माध्यम है। हम स्नान के माध्यम से अपने को ईश्वर से जोड़ने की कोशिश करते हैं और इसका परिणाम होता है कि हमारे हृदय के अन्दर सात्विकता का भाव जगने लगता है। हम जय माँ गंगे कहते है तो हमारा हृदय पवित्र हो जाता है इसी पवित्रता के भाव से हम ईश्वर से जुड़ने की कोशिश करते है तो हमारे अन्दर जितने सात्विक संस्कार है वह अपने आप उपजते है और हम उसे अपने व्यवहारिक जीवन में उपयोग करते है ताकि हमारा समाज सुन्दर समाज के रूप में विकसित हो। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी जी का संदेश स्वच्छता, समरसता, शान्ति, सद्भावना यही गुण है जो समाज को सुदृढ बनाता है। उन्होने ये भी कहा कि इस देश को सशक्त बनाने वाला कोई तत्व है तो वह हमारी आस्था है। इस देश को मजबूत और एक रखने वाला कोई तत्व है तो वह हमारी आस्था है। कुम्भ एक अक्षुण्य त्यौहार है।
संगम आरती उद्घाटन अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि यह आरती केवल माँ गंगा व संगम की नहीं बल्कि यह तो माँ भारती की आरती है। अपनी संस्कृति की आरती है। अपने संस्कारों की आरती है जिससे हम सभी को जुड़ना है। उन्होने बताया कि 1999 में आरम्भ की वाराणसी की विश्व प्रसिद्ध एवं भव्य गंगा आरती की शुरूआत दलाई लामा, पूज्य शंकराचार्य, स्वर्गीय दादा वासवानी, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज और अन्य विश्व प्रसिद्ध हस्तियों ने इस दिव्य आरती की शुरूआत की थी उसके पश्चात प्रयागराज और माँ गंगा के अन्य तटों पर भी आरती का शुभारम्भ हुआ। बनारस की आरती आज इनक्रेडिबल इण्डिया में स्थान प्राप्त है जिसने विश्व में आरती की संस्कृति का संदेश दिया है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि “हमारे वेदों ने, उपनिषदों ने, ऋषियों ने बहुत प्यारा संदेश दिया” असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय मृत्योर्मा अमृतं गमय, आईये अन्धकार से प्रकाश की ओर चले। हम अपने जीवन में जो भी अगर – मगर की संस्कृतियों का संस्कार है उसे संगम की डुबकी में ही डुबो दे और एक आस्था के साथ एक निश्चय के साथ और निश्चयात्मक बुद्धि के साथ अमृत्स्य पु़त्राः हम अमृत के पुत्र है इस भाव से आगे बढ़े और इसी भाव से आगे बढ़ते हुये अपने को पहचाने और फिर स्वयं में स्थित हो जाये इसी का नाम है स्वस्थ होना।
स्वामी जी महाराज ने कहा कि स्वच्छ भारत का अर्थ केवल सड़कों को स्वच्छ करना नहीं है बल्कि स्वच्छ भारत का अर्थ है कि हमारे अन्दर की भी सफाई हो ताकि हम ठीक से स्वस्थ रह सके तथा हमारे अन्दर सकारात्मक विचारों का संचार हो सके। जब हम इस प्रकार से स्वस्थ होंगे ; स्वच्छ होंगे तभी भारत समृद्ध भी होगा और प्रबुद्ध भी होगा। इसी प्रबुद्धता के साथ हम संगम की इस यात्रा में संगम के संदेश के साथ आगे बढ़ेंगे तथा इसे अपने गांवों और शहरों तक ले जायेंगे।
प्रयागराज कुम्भ मेला आयुक्त डॉ आशीष गोयल जी ने कहा कि कुम्भ मेला में सभी आयुवर्ग के लिये बहुत कुछ है। हमारे मुख्यमंत्री जी की परिकल्पना थी कि कुम्भ मेला दिव्य और भव्य हो। मेले में दिव्यता तो साधुसंतों के आगमन से आती है और भव्यता का प्रयास हमने किया है कि मेला भव्य होना चाहिये सुरक्षित होना चाहिये इस पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होने कहा कि इस बार मेला में देखने के लिये बहुत कुछ है अध्यात्म के साथ स्वस्थ मनोरंजन के इंतजाम भी किये गये है।
स्वामी जी महाराज ने आयुक्त कुम्भ मेला डॉ आशीष गोयल जी, अन्य उच्चाधिकारी, अधिकारी एवं कुम्भ मेला प्रशासन की तारीफ की उन्होंने कहा कि संगम मेला का जो प्रथम शाही स्नान कराया वह सचमुच शाही स्नान के साथ सफाई स्नान भी था। इतनी सफाई थी कि मन गर्व से भर उठा। इस मौके पर कुम्भ फोटो फेस्टिवल के समापन अवसर पर सर्वोत्तम फोटोग्राफ को पुरस्कृत किया गया।

स्वामी जी महाराज ने संगम के तट से देश की सभी नदियों के तटों को स्वच्छ, सुन्दर, हराभरा और प्रदूषण मुक्त बनाये रखने का संकल्प लिया इस अवसर पर भारत के विभिन्न प्रांतों से आये हरिजन सेवक संघ के पदाधिकारी गण, कुम्भ फोटो फेस्टिवल में आये युवागण, विश्व के अनेक देशों से आये श्रद्धालुओं ने सहभाग किया। संगम आरती में भारत के अलग अलग राज्यों दिल्ली, गोवा, उत्तराखण्ड, राजस्थान, बैंगलोर, हैदराबाद, दार्जीलिंग, लेह, पंजाब, पुदुचेरी, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, बिहार, असम, उड़िसा, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, गुजरात, झारखण्ड, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश और दुनिया के कई देशों यथा अमेरीका, ब्राजील, मलेशिया, साइबेरिया, आस्ट्रेलिया, सिंगापुर, मैक्सिको, अर्जेन्टीना के श्रद्धालुओं ने शिरकत की।