‘सुख का सीधा संबंध साधना और सत्संग से है’- स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के पावन गंगा तट पर श्री सत्यसाईं बाबा के अनुयायियों का दल साधना शिविर हेतु पहुुुंचा। इस दल में भारत तथा विश्व के तथा कर्नाटक, मुम्बई, तमिलनाडु, चेन्नई, बेंगलुरू, सिंगापुर, स्वीडन, श्रीलंका, मलेशिया, अमरीका, थाईलैण्ड एवं अन्य देशों से आये अनुयायियों ने सहभाग किया।
इस ध्यान साधना शिविर में विदेशी साधक भी भारतीय संस्कार और भारतीय वेशभूषा में रंगे हुये दिखें। यह तीन दिवसीय साधना शिविर श्री मधुसूदन नायडू जी, श्री नरसिंहमूर्ति एवं श्री श्री निवासन जी के मार्गदर्शन में सम्पन्न होगा।
आज परमार्थ गंगा तट पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष एवं ग्लोबल इण्टरफेथ वाॅश एलायंस के सह-संस्थापक स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, श्री मधुसूदन नायडू जी, जिनके बारे में प्रसिद्ध है कि साईं बाबा उनके माध्यम से श्री सत्य साईं बाबा अपना संदेश देते है एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों ने परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश पहुचँ कर अतीव प्रसन्नता व्यक्त की। स्वामी जी ने श्री मधुसूदन नायडू जी को शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया।
श्री मधुसूदन नायडू जी ने कहा कि ’साधना अगर परिष्कृत, स्वच्छ एवं दिव्य वातावरण की जाये तो विशेष फलदायी होती है और ध्यान क्रिया पर तो स्थान का विशेष प्रभाव पड़ता है। उन्होने कहा कि यह क्षेत्र ऋषियों की तपस्थली है, परमार्थ गंगा तट दिव्यता से युक्त है एवं शान्ति दायक स्थान है यहां पर की गयी साधना से जीवन में विलक्षण परिवर्तन हो सकता है; यह स्थान आत्मोत्कर्ष के लिये उपयुक्त है। उन्होने कहा  कि साधना के यह तीन दिन आत्मोन्नति के है जिसके माध्यम से जीवन को ऊर्जावान बनाया जा सकता है।’यहाँ आकर साईं भक्तों को अपार आनन्द मिलता है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि श्री सत्य साईं बाबा जी ने ’लव आॅल, सर्व आॅल, अर्थात सबको प्यारा करो, सबकी सेवा करो’ का जो सूत्र दिया है उसका अनुकरण करते हुये अपनी साधना को पीड़ित मानवता, प्रकृति, पर्यावरण और जीवनदायिनी नदियों के संरक्षण में लगायें यही श्री सत्य साईं बाबा को हमारी ओर से सच्ची श्रंद्धाजलि होगी। उन्होने उपस्थित सभी साधकों एवं अनुयायियों से आहृवान किया की वर्तमान समय में प्रदूषण जैसी वैश्विक समस्या का समाधान करने के लिये सभी को मिलकर अपनी सामथ्र्य एवं ऊर्जा का उपयोग कर इस विकराल समस्या का समाधान करना होगा यही तो है सबको प्रेम करना तथा लव आॅल और सर्व आॅल। हम भगवान की पुजा तो करते है अब पर्यावरण की भी रक्षा करें यही सबसे बड़ा प्रकृति को तोहफा होगा और मानवता के लिये उपहार होगा । स्वामी जी ने कहा कि ध्यान साधना भीतरी वातावरण को स्वच्छ, स्वस्थ एवं समुन्नत बनाती है परन्तु इसके लिये हमें बाहरी वातावरण को भी स्वच्छ रखना होगा और कहा कि सत्य की शुरुआत अपने से करें और सत्य मिल जाए तो सभी जीवों, नदियों, जल, पर रक्षा करें।
स्वामी जी ने कहा कि साधना के द्वारा मनुष्य ’इनर सेल्फ’ को भर कर आध्यात्मिक उन्नति के शिखर तक पंहुच सकता है। परन्तु मनुष्य अपनी अल्मारियों के शेल्फ को; अलमारियों को  भरने में पूरा जीवन लगा देते है और इन सब को भरते-भरते कई बार इनर सेल्फ खाली ही रह जाता है अर्थात् हम खुद भीतर खाली हो जाते हैं। साधना के माध्यम से इनर सेल्फ की रिक्तता को भरकर जीवन में अनेक सकारात्मक परिवर्तन किये जा सकते है और फिर  उसे प्रकृति और पर्यावरण की सेवा में लगाये यही है तो ’लव आॅल, सर्व आल’।
स्वामी जी ने कहा कि हर दिन 10 मिनट ध्यान किया जाए तो पूरे दिनभर की ऊर्जा मिलती है। इसका नियमित अभ्यास करने से याद करने की क्षमता और एकाग्रता बढ़ती है। बीमारियां भी दूर ही रहती हैं। साथ ही आध्यात्मिक शक्ति का भी विकास होता है। यही जीवन को सफल बनाती है।