जब रामायण के जरिए संस्कृत के महत्व को समझाया था सुषमा स्वराज ने….

नई दिल्ली। भारत की पूर्व विदेश मंत्री और भारतीय जनता पार्टी की दिग्गज नेता सुषमा स्वराज की पहचान प्रखर वक्ता और कुशल राजनेता के तौर पर थी। उनकी भाषण शैली का मुरीद हर कोई था। एक बार उन्होंने अपने भाषण के दौरान अपने संस्कृत ज्ञान से विद्वानों का चकित कर दिया था। दरअसल, यह वाकया वर्ष 2012 का है, जब साउथ इंडिया एजुकेशन सोसाइटी की तरफ से उन्हें एक अवॉर्ड दिया गया था। मुंबई में आयोजित इस कार्यक्रम में देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर से संस्कृत के विद्वान शामिल हुए थे। सुषमा स्वराज के अलावा यह अवार्ड अभिनेता अमिताभ बच्च्चन और कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा को भी दिया गया था।

अवार्ड लेने के बाद सुषमा स्वराज ने संस्कृत पर भाषण दिया था। अपने भाषण के दौरान उन्होंने बताया था कि संस्कृत दुनिया की सबसे वैज्ञानिक भाषा है। उन्होंने यह भी कहा कि कई सौ साल पहले भारत के कई हिस्सों में संस्कृत भाषा ही बोली जाती थी। उन्होंने कहा कि यह संस्कृत भाषा ही है जिसने पूरे विश्व को वसुधैव कुटुम्बकम बताया।

सुषमा स्वराज ने इस दौरान वहां मौजूद संस्कृत के जानकारों से अपील किया था कि संस्कृत को समृद्ध करें और संस्कृत को आधुनिकता से जोड़ें। यहां तक कि सुषमा स्वराज को अवार्ड में जो राशि मिली थी, उन्होंने उसी संस्था को यह राशि देते हुए कहा कि इसे संस्कृत को समृद्ध करने में लगाएं। सुषमा स्वराज के इस भाषण और उनके संस्कृत ज्ञान की भी काफी चर्चा हुई थी। सुषमा स्वराज ने ऐसे ही कई मौकों पर अपनी जबरदस्त भाषण शैली से विरोधियों को भी मुरीद बना दिया था। कठिन से कठिन बात भी वह बड़े ही शालीन शब्दों में कह देती थीं।