देश का एकमात्र ऐसा सूर्य मंदिर जिनकी पांव पखारती हैं खुद मोक्षदायिनी मां गंगा

पटना/ पंकज कुमार। दिन रविवार है यानि सूर्य देव का दिन। तो चलिए आपको लिए चलते हैं बाढ़ अनुमंडल मुख्यालय से करीब 13 किलोमीटर दूर स्थित पंडारक गांव , जहां साक्षात भगवान भास्कर विराजमान हैं।

यहां के बारे में कहा जाता है प्रसिद्ध सूर्य मंदिर में पूजा करने से कुष्ठ रोग से मुक्ति मिलती है। इस मंदिर में सालों भर भक्तों का तांता लगा रहता है। पुण्यार्क सूर्य मंदिर गंगा किनारे स्थित एकमात्र मंदिर है। मंदिर के निर्माण को लेकर प्रचलित जनश्रुति के अनुसार श्रीकृष्ण के पुत्र साम्ब ने कुष्ठ के श्राप से मुक्ति को लेकर भगवान भास्कर की अराधना की थी।

भगवान सूर्य ने प्रसन्न होकर साम्ब़ से वर मांगने के लिए कहा। साम्ब ने रोग मुक्ति की प्रार्थना की। सूर्य देव के आशीर्वाद से साम्ब कुष्ठ से मुक्त हुए। इसके बाद साम्ब द्वारा भगवान सूर्य के मंदिर का निर्माण कराया गया था। पंडारक के सूर्य मंदिर में विराजमान सूर्य की प्रतिमा सात घोड़े वाले रथ पर सवार सूर्य की प्रतिमा है। पुण्यार्क सूर्य मंदिर का गर्भ गृह सूर्य के चक्के से ढका हुआ है। मंदिर के पुजारी ने बताया कि इस मंदिर में पूजा करने से शरीर की व्याधियां दूर होती हैं।

यहां के स्थानीय  निवासी बबन शर्मा बताते हैं कि यहां सूर्य भगवान  की पूजा अर्चना करने के लिए असम, प.बंगाल, उड़ीसा, यूपी और खाफी दूर दराज से लोग आते हैं। 

पंडारक सूर्य मंदिर 1934 में आए भूकंप के बाद क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद ग्रामीणों के सहयोग से इसका जीर्णोद्धार कराया गया।1973 में इस सूर्य मंदिर में संगमरमर लगाए गए। बाहरी सौंदर्यीकरण का काम कराया गया। पंडारक सूर्य मंदिर की व्यवस्था का संचालन ग्रामीणों द्वारा बनाई गई कमेटी द्वारा किया जा रहा है। छठ व्रत पर मंदिर परिसर में विशेष तैयारी की जाती है।