विस्मिल, रोशन सिंह व अशफ़ाक उल्ला की जन्मभूमि है शाहजहाँपुर- सन्तश्री सुधांशु जी महाराज

परमानन्दपुर/ नेहा मिश्रा। परम पिता परमात्मा को केवल सत्य ही पसन्द है। असत्य प्रभु को कत्तई स्वीकार नहीं। उन्हें झूठ से बेहद चिढ़ है। सत्य, श्रद्धा एवं विश्वास की जड़ें बड़ी गहरी होती हैं।?आज ज़रूरत है कि हम इस त्रिशक्ति को अपने जीवन में धारण करें।

यह उदगार आज प्रातःकाल प्रख्यात सन्तश्री सुधांशु जी महाराज ने उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर जिले के तिलहर अंचल स्थित परमानन्दपुर गाँव में आयोजित विशाल सत्संग सभा में व्यक्त किए। उन्होंने त्रिदेवों ब्रह्मा, विष्णु, महेश की एतिहासिक घटनाओं की चर्चा करते हुये कहा कि शिवलिंग में तीनों की शक्तियाँ समाहित हैं। उन्होंने कहा कि विष पीने वालों को ही महादेव कहा जाता है। उन्होंने उनकी भक्ति की सरल व सहज विधि उपस्थित जनसमुदाय को सिखलाईं।

भगवान शिव के विश्व व्यापी स्वरूप का ज़िक्र करते हुये उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान, ईरान, मिस्र आदि अनेक देशों में शिवलिंगों के अवशेष विग्रह आज भी मिलते हैं। उन्होंने युवतियों-कन्याओं व युवकों से शिव-आराधना करने का आहवान किया और नशों का त्याग करने तथा मिलजुलकर रहने की प्रेरणाएँ दीं।

मिशन की परमानन्दपुर सत्संग समिति के प्रधान श्री राम किशोर गंगवार ने श्रद्धेय सुधांशु जी महाराज के प्रति हृदय की गहराई से आभार व्यक्त करते हुये कहा कि बरेली सत्संग महोत्सव के उपरान्त उन्होंने कुछ घण्टों के लिए परमानन्दपुर आकर न केवल इस गाँव का बल्कि शहीद नगरी शाहजहाँपुर का मान बढ़ाया है। यह जनपद विश्व जागृति मिशन का ऋणी है और त्रिपुरारी भगवान शिव का यह स्थान परमानन्दपुर समाज व देश को मज़बूती देने के लिए आगे बढ़कर काम करेगा।

आनन्दधाम नयी दिल्ली से वाया बरेली परमानन्दपुर पहुँचे मिशन निदेशक श्री राम महेश मिश्र ने सत्संग सभा का मंचीय समन्वयन व संचालन किया। तिलहर क्षेत्र सहित शाहजहाँपुर, खीरी-लखीमपुर, हरदोई, बरेली, मुरादाबाद एवं मेरठ आदि जिलों से आए ज्ञान-जिज्ञासुओं ने सत्संग समारोह में भागीदारी की।