‘’सब्र कर बन्दे दिन तेरे बदल जाएँगे, आज हंसने वालों के चेहरे उतर जाएँगे’’- सन्तश्री सुधांशु जी महाराज

कानपुर। विश्व जागृति मिशन नयी दिल्ली एवं कानपुर मण्डल के संयुक्त तत्वावधान में सेण्ट्रल पार्क शास्त्रीनगर में आयोजित तीन दिवसीय विराट् दिव्य भक्ति सत्संग महोत्सव का आज सायंकाल विधिवत समापन हो गया। बीते शुक्रवार को प्रातःकाल आरम्भ हुए सत्संग समारोह के विदाई सत्र में मिशन प्रमुख आचार्य सुधांशु जी महाराज ने मिशन के स्थानीय कार्यकर्ताओं को इस अंचल में विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रमों एवं सेवा गतिविधियों को तेज़ करने का आहवान किया। कानपुर मण्डल के प्रधान मास्टर आर.पी. सिंह सहित प्रमुख प्रतिनिधियों ने श्रद्धेय महाराजश्री का नागरिक अभिनंदन किया।

इस अवसर पर आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता परमात्मा का सन्देश ही नहीं, भगवान का दिव्य गीत-संगीत भी है।उन्होंने कहा कि गीता कर्तव्य की दीक्षा देती है, धर्म-धारण करने की प्रेरणा देती है, अविचल रहकर जीवन पथ पर आगे बढ़ना सिखाती है और शरणागत को संरक्षण देती है। गीता इसी देह में परम-तत्व को प्राप्त करने की शिक्षा देती है। उन्होंने कहा कि कभी धरती पर सभी मानव देव-कोटि के हुआ करते थे।आज इसमें काफ़ी कमी आ गयी है। बचपन में हर व्यक्ति देव-श्रेणी का ही होता है। शिशु का बोलना संगीत जैसा होता है। उसका मन आनन्द में टिका होता है। वह तितली और फूल आदि देखकर खिलखिला उठता है। उसके दोनों कान व आँखें भगवान की ओर लगे होते हैं। हमें छोटे बच्चों से शिक्षा लेनी चाहिए।

श्री सुधांशु जी महाराज ने कहा कि नकारात्मक चिन्तन व्यक्ति को अधोगति की ओर ले जाता है। नकारात्मक बातें व्यक्ति के अवचेतन मन में गहरे तक नकारात्मकता को भर देती हैं। फिर वैसी ही परिस्थितियाँ जीवन में बनती चली जाती हैं। सकारात्मक चिन्तन व्यक्ति के ‘औरा’ को मज़बूत बना देता है। उन्होंने देश की सभी माताओं को प्रेरणा दी कि वे बच्चों को सकारात्मक सोचने और सदा ऊँचा उठने की प्रेरणा दें। उन्होंने विचारों की ताक़त पर विस्तार से प्रकाश डाला और कहा कि श्रेष्ठ विचार कर्म को प्रेरित करके हमसे सत्कर्म करा लेते हैं। फलतः व्यक्ति जीवन में ऊँचाइयाँ पाता चला जाता है। उन्होंने कहा कि कल्पना सृजन का शुभारम्भ है।

आज सत्संग कार्यक्रम में प्रेरक भजन-गीत भी सुनाए गए। कश्मीरी लाल चुग, आचार्य महेश शर्मा, आचार्य अनिल झा, राम बिहारी एवं महेश सैनी के भजनों ने सभागार का वातावरण बेहद ख़ुशनुमा बना दिया। वाद्य यंत्रों पर श्री प्रमोद राय, चुन्नी लाल तंवर एवं राहुल आनन्द ने सुन्दर सी संगति दी। सत्संग महोत्सव का समापन दिव्य आरती के साथ हुआ।

दिव्य सत्संग महोत्सव के मुख्य संयोजक श्री मनोज शास्त्री ने बताया कि सिद्धिधाम आश्रम, बैकुंठपुर, कानपुर के आचार्य रजनीश भट्ट एवं आचार्य महेश शर्मा के अलावा रामनाथ अग्रवाल, ऊषा मक्कड, चाँदनी चतुर्वेदी, प्रतिभा कटियार एवं राम शंकर चौऋषिया आदि अनेक निष्ठावान कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम में सराहनीय योगदान किया।

सचेंदी के राजा हिन्दू सिंह द्वारा सदियों पूर्व बसाए गए कान्हपुर (अब कानपुर) महानगर में सोल्लास सम्पन्न दिव्य भक्ति सत्संग महोत्सव के समस्त मंचीय कार्यक्रमों का संचालन एवं समन्वयन विश्व जागृति मिशन, आनन्दधाम, नयी दिल्ली के निदेशक श्री राम महेश मिश्र ने किया। उन्होंने श्री प्रयाग शास्त्री के नेतृत्व में आनन्दधाम से आए स्टालों के संचालकों के प्रति आभार कहा।