कर्म की लिप्तता से बचते हुए कमलपत्रवत् जीवन जीना चाहिए- सुधांशुजी महाराज

नागपुर। महावीर उद्यान प्रांगण में चल रहे विराट भक्ति सत्संग महोत्सव के तीसरे दिन अध्यात्मवेत्ता श्री सुधांशु जी महाराज ने श्रीमद्भगवतगीता में भगवान श्रीकृष्ण के ‘समय की महत्ता’ पर दिए गए सन्देशों पर विशेष चर्चा की। उन्होंने समय को सबसे बड़ा देवता बताया। श्री सुधांशु जी महाराज ने कहा कि मानव जीवन परमेश्वर द्वारा दिया गया एक अनुपम उपहार है। इसका एक-एक क्षण बड़ा ही मूल्यवान है। समय की अतीव महत्ता बताते हुए उन्होंने कहा कि समय का सही नियोजन करने वाले व्यक्ति ही जीवन में ऊँचे उठते हैं। इतिहास केवल उन्हीं को याद रखता है। इसलिए जीवन के एक-एक पल का सदुपयोग करते हुए आगे बढ़ना चाहिए।

कर्मयोग पर उदबोधन करते हुए मिशन प्रमुख ने राजा जनक की भाँति कर्म को अपने उद्धार का माध्यम बनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि कर्म की लिप्तता से बचते हुए कमलपत्रवत् जीवन जीना चाहिए। मोह इस लिप्तता को बढ़ाता है। हैरत की बात यह है कि मोह प्रेम जैसा ही दिखता है। मोह प्रेम जैसा दिखता तो है लेकिन वैसा होता नहीं। अतः बच्चों को साधन एकत्र करके देने के स्थान पर उन्हें शिक्षा, संस्कार, धर्म इत्यादि देना चाहिए। उन्होंने अपनी संतानों को धर्म का वारिस बनाने को कहा।

आनंदधाम नई दिल्ली से आये स्वास्थ्य सेवाओं के स्टॉल प्रभारी श्री विष्णु चौहान ने बताया कि मिशन मुख्यालय पर करुणासिंधु अस्पताल, युगऋषि आरोग्य धाम एवं द व्हाइट लोट्स हॉस्पिटल नामक तीन अस्पतालों के जरिए वंचित वर्ग के लाखों लोगों को चिकित्सा सेवाएँ प्रदान की जा रही है। उन्होंने ध्यान-योग गुरु डॉ. अर्चिका दीदी के नेतृत्व में आगामी 16 से 26 जून की तिथियों में आयोजित कैलास मानसरोवर यात्रा की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 21 जून को विश्व भर में मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस साल 2017 से पहली बार कैलास मानसरोवर के उच्च हिमालयी क्षेत्र में सम्पन्न कराया जा रहा है। उन्होंने शिवभक्तों को कैलाश यात्रा का निमन्त्रण दिया।