सरकार ने द्वीप रोस, नील और हैवलाॅक का नाम बदलकर सुभाषचन्द्र बोस, शहीद द्वीप और स्वराज द्वीप रखा

ऋषिकेश। केन्द्र सरकार अंडमान निकोबार द्वीप समूह के तीन द्वीपों द्वीप रोस, नील और हैवलाॅक का नाम बदलकर सुभाषचन्द्र बोस, शहीद द्वीप और स्वराज द्वीप रखा। आज का यह समारोह भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में आयोजित किया गया जिसमें परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने शिरकत की।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि आज द्वीपों के नाम ही नहीं बदले बल्कि इन द्वीपों से एक नया दीप जलाया। यह दीप संस्कृति का; संस्कारों का है जिससे आने वाली पीढ़ियां इस परिवर्तन की लहर को जी सके।
इस अद्भुत प्रयास के लिये स्वामी जी महाराज ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की सराहना की कि वे नये ढ़ंग से नई चीजों लाकर, सभी को परोसकर अपने संस्कारों, संस्कृति और अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने के लिये हर समय प्रयास करते रहते है। उन्होंने कहा कि यह भारत का सौभाग्य है कि भारत के पास कर्मठ, कर्तव्य परायण, निष्ठावान और कर्मयोगी प्रधानमंत्री एक प्रधानसेवक के रूप में मिले है जिन्होने अनेक डायनामिक परिवर्तन किये है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने बताया कि आजाद हिन्द फौज का सबसे पहले ध्वजारोहण श्री सुभाषचन्द्र बोस जी ने अंडमान निकोबार द्वीप समूह मंे पोर्ट ब्लेयर में किया था। अंडमान निकोबार द्वीप समूह का इतिहास अनेक विशिष्टताओं से भरा हुआ है।
स्वामी जी महाराज ने कहा कि नाम परिवर्तन का जो कार्य 1947 में होना चाहिये था वह आज हुआ, लेकिन हुआ और इसके लिये मैं भारत सरकार को और भारत के यशस्वी और ऊर्जावान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को अनेकों साधुवाद, बधाईयां और धन्यवाद देता हूँ।
आज ऐतिहासिक दिवस है इसके लिये वैश्विक दिल चाहिये। स्वामी जी महाराज ने कहा कि दिन तो बड़ा है लेकिन हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी के पास दिल भी बड़ा है उन्होने सकारात्मक परिवर्तनों की बयार लायी है यही बयार अपने वतन में बहार लायेगी। उन्होने कहा कि पांच वर्ष में 500 काम, तो मैं समझता हूँ 15 वर्षो में 5000 काम होंगे जो एक नये भारत की ओर, एक नई दिशा की ओर और एक नये विश्व की ओर भारत को लें जायेंगे।
1943 में सुभाषचन्द्र बोस जी ने जहां पर पहला ध्वज पहराया था आज उसी स्थान पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने आदरणीय श्री इन्द्रेश कुमार जी, स्थानीय उपायुक्त अन्य उच्चाधिकारी एवं श्री सुभाषचन्द्र बोस जी के परिवार से श्री चन्द्र कुमार बोस एवं श्री वीर सावरकर जी के परिवार के सदस्यों ने सहभाग किया। स्वामी जी ने कहा कि जिन शहीदों ने आजादी के लिये अपना जीवन बलिदान दिया वे सभी बलिदानी किसी संत से कम नहीं है आज हम उन सभी को नमन करते है।
वर्ष 1943 में जहां पर श्री सुभाष चन्द्र बोस जी ने देश को आजाद कराने के लिये ध्वज लहराया था ठीक उसी स्थल और उसी समय पर ध्वज लहराने के साक्षी हुये विशिष्टगण तथा सभी ने ध्वज को नमन किया। रोंगटे खड़े करने वाली यातनाओं को सहते हुये देशवासियों को जीवन व जवानी प्रदान करने हेतु स्वयं का बलिदान करने वाले सभी शहीदों, क्रांतिकारियों को नमन किया तथा पूरे भारत से शहीदों के परिवार से जो परिवारजन आये थे उन सभी को स्वामी जी महाराज ने दिलासा देते हुये कहा कि हम सभी मिलकर इस आजादी को बनाये रखे। स्वामी जी ने भारत के प्रधानमंत्री जी के द्वारा जो सभी को साथ लेकर चलने की, सब के विकास की, सही व साफ नियत की तथा सुरक्षित और सतत विकास की मुहिम चलायी है उसमें अपना सहयोग देने हेतु देशवासियों का आह्वान किया।
स्वामी जी महाराज ने कहा कि इस परिवर्तन को हृदय से स्वीकार करें और भारत की गौरवमयी संस्कृति से जुड़ें रहे