जीवन को जीवंत बनाने का माध्यम है योग-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता एवं ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलांयस के सह-संस्थापक स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने डॉ अग्रवाल हास्पिटल एंड जीन रिसर्च फाउण्डेशन, बैंगलोर में आयोजित प्रथम स्टेम सेल सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में सहभाग किया।

स्टेम सेल सम्मेलन का उद्घाटन स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, साध्वी भगवती सरस्वती, प्रख्यात वैज्ञानिक एवं चिकित्सक डॉ गंगाधर, अमेरीका के पीएचडी साइंस एजुकेशन प्रोफेसर डॉ नॉर्मन ब्राउन, जीन थेरेपी और स्टेम सेेल के प्रसिद्ध प्र्र्रोफेसर एवं डॉ गेरार्ड वगेमकर, श्री यू टी खादर जी, नीति आयोग, डॉ व्ही के सारस्वत, क्रिकेटर श्रीसंत, न्यायाधीश अमित सरोही, डॉ भूपेन्द्र सिंह, प्रेसिडेन्ट (आई एस जी सी टी)  डॉ सुनिता राणा अग्रवाल ने दीप प्रज्जवलित कर किया। इस अवसर पर स्वामी जी ने आयोजनकर्ताओं को शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया।

क्रिकेटर श्रीसंत ने स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज से भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। देश-विदेश से आये चिकित्सकों, विशेषज्ञों, नीति आयोग के डॉ व्ही. के. सारस्वत और क्रिकेटर श्रीसंत द्वारा स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज को ’विशेष पुरस्कार’ से नवाजा गया। साध्वी भगवती सरस्वती जी को उनके द्वारा किये जा रहे उत्कृष्ट सेवा कार्यों के लिये ’सेवा पुरस्कार’ प्रदान किया गया। इस सम्मेलन में क्रिकेटर श्रीसंत को भी पुरस्कृत किया गया।

स्वामी जी ने योग फॉर वेलनेस विषय पर दोनों दिन के सत्र में उद्बोधन दिया। उन्होने शरीर और मस्तिष्क की कोशिकाओं पर मंत्र, योग, ध्यान और संगीत के प्रभाव को आध्यात्मिक और वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर समझाया।

गंगा एक्शन परिवार के प्रमुख स्वामी चिदान्नद सरस्वती जी ने कहा ’सफल और स्वस्थ जीवन के लिये स्टेªस मैनेजमेंट नितांत आवश्यक है और स्टेªस मैनेजमेंट की औषधि है ’योग’। ’योग’ केवल एक औषधि ही नहीं बल्कि समग्र जीवन पद्धति है; जीवन को जीवंत बनाने का माध्यम है। उन्होने विश्व के विभिन्न देशों से आये विशेषज्ञों और डॉक्टरों से कहा कि जहां पर भी जायें योग और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को प्रसारित करें ताकि जनसमुदाय इस ओर आकर्षित हो सके।’

 

जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा ’ ध्यान, स्व को जानने की विद्या है; अर्न्तमन की यात्रा है; तनावमुक्त जीवन का आधारस्तंभ है। इसकेे माध्यम से तन, मन और आत्मा के मध्य एक गहरा सम्बंध स्थापित किया जा सकता है। मानसिक शान्ति, आंतरिक ऊर्जा, प्रेम, करूणा, धैर्य एवं भावनात्मक प्रबलता के लिये बेहद कारगर है ध्यान। ध्यान के माध्यम से शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक संतुलन स्थापित कर श्रेष्ठ जीवनयात्रा का आनंद लिया जा सकता है और आनंदयुक्त जीवनयात्रा ही स्वस्थ जीवन का राज है।’ कार्यक्रम के समापन अवसर पर पूज्य स्वामी जी ने आयोजन कर्ताओं को इस सम्मेलन के सफलतापूर्वक आयोजन के लिये धन्यवाद देते हुये रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया तथा उपस्थित सभी विशेषज्ञों को वृक्षारोपण का संकल्प कराया।

इस सम्मेलन में देश-विदेश से विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों ने सहभाग किया तथा मानव शरीर एवं कोशिकाओं को प्रभावित करने वाले कारकों एवं उससे होने वाले बदलाव को विषय में जानकारी दी। स्टेम सेल के विषय में डॉ सतीश, स्टेम सेल इन कैंसर पर डॉ नॉर्मन ब्राउन, ध्यान का मस्तिष्क पर प्रभाव डॉ साध्वी भगवती सरस्वती, ऑटोलॉगस स्टेम सेेल डॉ गेरार्ड वगेमकर, ईरान से आये, जीन थेरपी इन सर्जरी डा सईद असर, ब्लड सेल बैंक डॉ डब्ल्यु साल्वमूर्ति, अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी को डॉ सारस्वत, डॉ सुनीता आर अग्रवाल, डॉ विलियम सेल्वमूर्ति, अमेरीका से आये डॉ स्टीफन लॉयड, डॉ टेफीनी लॉयड, डॉ परमजीत सिंह, डॉ शिव उमापति, डॉ संजय बेदी, कमिशनर आफॅ पुलिस टी सुनील कुमार, डॉ अनुराधा नाथ, डॉ दिव्या जैन,  और अनेक विश्व प्रसिद्ध विशेषज्ञों ने सहभाग किया।