श्रीकृष्ण ने गीता में ईश्वर को प्रिय व्यक्ति के गुणों का किया है वर्णन- सुधांशुजी महाराज 

जालन्धर/ नेहा मिश्रा। श्रीमदभगवदगीता जीवन विद्या की शिक्षा देने वाला एक सम्पूर्ण ग्रन्थ है। गीता के १२वें अध्याय के विशेष आठ श्लोकों की उपमा अमृताष्टक से की गयी है। इन श्लोकों में प्रभु श्रीकृष्ण ने ईश्वर को प्रिय व्यक्ति के गुणों का वर्णन विस्तार से किया है। इन गुणों को अपनाने वाला मनुष्य भगवान को सर्वाधिक प्रिय होता है।

यह उद्गार आज जालन्धर महानगर के साईं स्कूल परिसर में चल रहे विराट भक्ति सत्संग महोत्सव के दूसरे दिवस की सन्ध्या वेला में उपस्थित हज़ारों ज्ञान-जिज्ञासुओं को सम्बोधित करते हुए विश्व जागृति मिशन के संस्थापक-संरक्षक सन्तश्री सुधांशु जी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि बैररहित जीवन, प्रेमपूर्ण जीवन, करुणामय जीवन, मैत्रीपूर्ण जीवन, निरहंकारी जीवन, समत्व से भरे जीवन, स्वयं में सन्तुष्ट जीवन परमेश्वर को अत्यधिक पसन्द है।दूसरे को क्षमा करने की सामर्थ्य रखने वाले और दृढ़निश्चयी व्यक्ति के साथ सदैव ईश्वर की कृपाएँ रहती हैं। श्री सुधांशु जी महाराज ने गीता में दिए गए सद्गुणों को प्रयासपूर्वक अपनाकर परमात्मा का प्रियपात्र बनने का आह्वान किया।

मिशन प्रमुख ने व्यवहार विद्या के अनेक सूत्र सभागार में मौजूद स्त्री-पुरुषों को सिखलाए तथा स्वच्छ, स्वस्थ, संस्कारित, स्वावलंबी परिवार एवं समाज के निर्माण के लिए काम करने का आग्रह किया। परोपकार के कार्यों में उन्होंने वृक्षारोपण को सबसे बड़ा काम कहा और पंजाबवासियों से अपील की कि वे आगामी मानसून में अधिक से अधिक पौधरोपण करें और उनकी सेवा करके उन्नत वृक्ष बनाएँ।

स्वस्थ भारत निर्माण के लिए उन्होंने ‘युगऋषि आयुर्वेद अभियान’ के तहत विकसित १७२ उत्पादों की भी चर्चा की और बीमारियों से बचने के लिए उनका उपयोग दैनिक जीवन में करने का आह्वान सभी से किया। उन्होंने जीवन में दृढ़ता एवं जिजीविषा की वृद्धि के लिए इन उत्पादों को बड़ा महत्वपूर्ण कहा। बताया कि युगऋषि आयुर्वेद में प्राप्त आर्थिक सहयोग को अनाथ (देवदूत) बच्चों की शिक्षा पर लगाया जा रहा है।

साहित्य एवं स्टाल प्रभारी श्री प्रयाग शास्त्री ने बताया कि सभी युगऋषि उत्पाद जालन्धर लाए गए हैं। उन्होंने बताया कि चारदिनी ज्ञानयज्ञ में आए लोग इन लाभदायी चीज़ों के अलावा साहित्य, वृद्धजन सेवा, गोसेवा, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा सेवा, धर्मादा सेवा आदि की गतिविधियों का लाभ उठा रहे हैं और उनसे जुड़ रहे हैं।

मिशन के जालन्धर प्रधान श्री सुरेन्द्र चावला ने जानकारी दी कि रविवार को मध्याहनकाल श्री सुधांशु जी महाराज सैकड़ों नर-नारियों को मन्त्रदीक्षा देंगे। उन्होंने जालन्धरवासियों से शनिवार व रविवार को पूर्वाहन 8.30 से 11 बजे तथा सायंकाल 4.30 से 7 बजे के सत्रों में भाग लेने का अनुरोध किया। बताया- दोनों दिन प्रातःकाल के सत्र में योग एवं ध्यान की कक्षाएँ सम्पन्न होंगी।