संस्कारों से ही संस्कृति जीवंत है, भगवान् राम का चरित्र सुसंस्कारों की शिक्षा है-मुरलीधर जी

कारसेवकपुरम, अयोध्या। कारसेवकपुरम में चल रही श्री राम कथा के छठे दिन आज धनुष भंग के बाद परशुराम जी का आगमन जब राजा जनक के दरबार में हुआ तो लक्ष्मण जी ने परशुराम जी को वास्तविकता को बताते हुए कहा कि सम्मान करना कायरता की पहचान नहीं है वरन वरिष्ठों के प्रति आदर और संस्कारों की पालना है । श्री राम मंदिर निर्माण के निमित्त श्री सतीश वैष्णव अध्यक्ष, अखिल भारतीय वैष्णव ब्राह्मण सेवा संघ द्वारा आयोजित श्री राम कथा में आज कथा व्यास श्री मुरलीधर महाराज ने बताया कि राजकुमार राम ने जब महर्षि विश्वामित्र जी की आज्ञा पाकर राजा जनक के संताप को मिटाने के लिए धनुष भंग किया तो परशुराम जी वहां आ पहुंचे और उन्होंने राजा जनक से धनुष भंग करने का कारण और करने वाले के बारे में पूछा जिसका उत्तर लक्ष्मण जी ने शौर्य और सम्मान के साथ दिया । साथ ही राम जी ने स्वयं को दोषी बताते हुए परशुराम से दंड का अनुग्रह किया । लेकिन परशुराम जी ने समझ लिया कि भगवान् के सिवा इस धनुष को कोई छू भी नहीं सकता और उन्होंने अपने को  भगवान् राम को समर्पित कर दिया । अपने अस्त्र-शस्त्र उन्हें सौंप कर तपस्या के लिय निकल गए । इस प्रकार भगवान् राम ने वरिष्ठो के सम्मान का परिचय देते हुए भारतीय संस्कारों की पलना का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया ।

जनकपुर में उत्सव मनाया गया और राजा दशरथ को राम विवाह की सूचना दी गई । अयोध्या और जनकपुर वासी खुशियों से नाचने गाने लगे । जहाँ राजा जनक ने दशरथ जी का स्वागत सम्मान किया और बारात की अगवानी की । चारों भाइयों का विवाह राजा जनक ने अपने भतीजियों से करवाया । कोहबर और बारात के स्वागत सम्मान की परम्पराए आज भी राम कथा से जीवंत हैं ।

आज की कथा के आरम्भ में प्रसिद्द भजन गायक अनूप जलोटा जी के कृपा पात्र शिष्य श्री सत्येन्द्र पाठक प्रतापगढ़ से आकर भजनों से सभी को मन्त्र मुग्ध कर दिया । आज की आरती में मनिरामदास छावनी के श्री महंत श्री कमल नयन दास जी महाराज, श्री सुनील रामवत सूरत, श्री महादेव जी, श्री महेश जी वैष्णव जयपुर, डी. सी. पी. किरण जी, श्री महावीर जी जयपुर, श्री रामदास जी उदैपुर और सतीश जी के परिवार ने की ।