व्यक्तिगत कार्यों से ऊपर संत, धर्म, राष्ट्र और संस्कृति रक्षा के लिए ही भगवान अवतार लेते हैं-श्री मुरलीधर जी

कारसेवकपुरम, अयोध्या। कारसेवकपुरम अयोध्या में 21 अप्रैल से चल रही श्री राम मंदिर निर्माण के निमित्त श्रीराम कथा में आज चौथे दिन भगवान श्री राम की बाल लीलाओं का अद्भुत वर्णन कथा व्यास श्री मुरलीधर जी ने किया । आज की मनोहारी कथा में अयोध्या वासियों को उत्सव मनाते हुए दिखाया जिसमें कथा श्रवण करते भक्त नाच उठे । मुरलीधर महाराज जी बताया कि 1 माह तक अयोध्या में मानो सूर्य रुक सा गया हो । जन्मदिन से ही विप्रों को दान, दक्षिणा और विभिन्न उत्सवों का आयोजन पूरे समय चलता रहा । भगवान शिव भी काकभुसुंडि जी के साथ रामलला के दर्शन का मोह मन में लेकर अयोध्या पहुंचे और किस प्रकार उन्होंने राम लला के दर्शन किये, आज की अद्भुत कथा से भक्त भाव विभोर हो उठे ।

महर्षि विश्वामित्र जी द्वारा महाराज दशरथ से यज्ञ रक्षा के लिए श्री राम, लक्ष्मण का मांगना और अंततोगत्वा दशरथ जी का उनके साथ राम, लक्ष्मण को भेजना । विश्वामित्र जी के साथ उनके आश्रम जाकर यज्ञ रक्षा से पूर्व ताड़का आदि राक्षसों का वध करना । गौतम आश्रम में जाते हुए माता अहिल्या का उद्धार करना आज की कथा के प्रमुख बिंदु रहे । मुरलीधर जी ने कहा कि व्यक्तिगत कार्यों से ऊपर संत, धर्म, राष्ट्र और संस्कृति रक्षा के लिए ही भगवान अवतार लेते हैं।उसके बाद महर्षि विश्वामित्र द्वारा राम, लक्ष्मण को जनकपुर के लिए धनुष यज्ञ के लिए जाना और उनका कहना कि आज एक यज्ञ तो पूर्ण हुआ अब दूसरे यज्ञ के लिए मैं आपको लेकर चलता हूं बड़ा मनोहारी प्रस्तुति करण आज की कथा का हुआ। आज की कथा में महंत श्री ब्रजमोहनदास जी महाराज, रामबल्लभ कुंज के अधिकारी श्री राजकुमार दास जी, विश्व हिंदू परिषद के श्री पंकज जी और आयोजक श्री सतीश वैष्णव जी के परिवार ने भव्य आरती की ।