कथा के माध्यम से ही संक्रमणों के बाद भी संस्कृति बची है वी.एच.पी. अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष कोकजी

कारसेवकपुरम अयोध्या। कारसेवकपुरम, अयोध्या में आयोजित नौ दिवसीय रामकथा महोत्सव में तीसरे दिवस की कथा में भगवान श्री राम के जन्म की कथा को व्यासपीठ से रखते हुए संत श्री मुरलीधर जी महाराज ने कहा कि जब भक्तों का प्रेम बढ़ जाता है तब निर्गुण निराकार ब्रह्म सगुण साकार रूप में मनुष्य जन्म के रूप में अवतार लेता है उन्होंने मानस के माध्यम से भगवान राम के अवतरण के सभी कारणों को सप्रसंग समझाया, नारद जी के श्राप के कारण को विस्तार रूप में परिभाषित करते हुए संत की महिमा का बखान भजनों के माध्यम से किया ! राम जन्म की कथा को विस्तार से रखते हुए उन्होंने बताया कि सभी देवताओं द्वारा विष्णु भगवान की स्तुति करने पर आकाशवाणी हुई कि आप सबके प्रेम में पड़कर मैं रघुकुल में महाराजा दशरथ के  घर अवतरित होऊंगा, महाराजा दशरथ के जब कोई संतान नहीं हुई तो उन्होंने इस बात को अपने गुरु से निवेदन किया, गुरु ने पुत्रकामेष्टि यज्ञ करवाया, तीनों रानियां, गर्भवती हुई और चैत्र शुक्ल पक्ष, नवमी तिथि, वार मंगलवार, अभिजीत मुहूर्त में राजा दशरथ के घर प्रभु श्री राम का अवतरण हुआ, इस अवसर पर महाराज जी के द्वारा गाई गई वंदना “भए प्रकट कृपाला दीन दयाला कौशल्या हितकारी” पर सभी भक्तों नाचने के लिए मजबूर हो गए!  प्रभु श्रीराम के जन्म के बाद “अवध में आनंद भयो जय कौशल्या लाल की…… जैसे भजन के ऊपर पूरा पांडाल झूम उठा, उस समय का आनंद देखते ही बनता है !

वी.एच.पी. अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री विष्णु सदाशिव कोकजी ने आज कथा श्रवण के बाद कहा कि कथा के कारण ही संक्रमणों के बाद भी भारतीय संस्कृति बची है और कथा ही संस्कृति के प्रवाह को गतिमान रख सकती है ! स्वामी श्री अवधेश जी कहा कि कथा हमारी परम्परा है, हमारी जीवन शैली है, कथा है तो राम हैं, राम राज्य है ! राम कथा न होती तो हम और आप भी इस स्थान पर संभवत नहीं होते ! राम कथा से हमारी संस्कृति जीवंत है ! आज की कथा में वी.एच.पी. के कार्याध्यक्ष श्री अलोक कुमार, संगठन मंत्री श्री विनायक राव देशपांडे, प्रबंध समिति सदस्य श्री दिनेश जी, प्रान्त संगठन मंत्री भोलेंद्र जी ने आरती की !