संशय से नहीं विश्वास से परिवार में सुख शांति मिल सकती है, विश्वास ही परिवार का आधार है-मुरलीधर जी

कारसेवकपुरम, अयोध्या। अखिल भारतीय वैष्णव सेवा संघ मुंबई के राष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश वैष्णव द्वारा अपने स्वर्गीय माता पिता की इच्छा- श्री राम मंदिर का निर्माण शीघ्र हो, के निमित्त कारसेवकपुरम में आयोजित श्रीराम कथा के दूसरे दिन कथा व्यास श्री मुरलीधर जी ने शिव पार्वती प्रसंग में आज भक्तों को सती के संशय के बारे में बताया । उन्होंने कहा कि महर्षि अगस्त के आश्रम में भगवान शिव और मां सती श्रीराम कथा सुनने पहुंचे तो उन्हें श्री राम के प्रति संदेह हुआ और संदेह से श्रद्धा समाप्त हो जाती है । श्रद्धा के अभाव में कथा का सुनना और न सुनना बराबर ही है । मानस में वर्णन है की कथा सुनने तो मां सती और भगवान शिव दोनों ही आए थे लेकिन “सुनी महेश परमसुख मानी” चौपाई है अर्थात भगवान शिव ने ही वह कथा सुनी मां पार्वती के नाम का उल्लेख कथा श्रवण में नहीं है । क्योंकि उन्हें सर्वप्रथम श्रीराम पर ही संदेह था ।

कथा व्यास श्री मुरली मुरलीधर जी ने दक्ष प्रजापति का वर्णन करते हुए कहा कि दक्ष पद-प्रतिष्ठा पाकर अहंकारी हो गए और उन्होंने इसी कारण अपने यज्ञ में बेटी सती और दामाद शिव को भी निमंत्रण नहीं दिया । सती अपने मायके का मोह नहीं छोड़ पाई और बिना निमंत्रण के ही दक्ष यज्ञ में अपने मायके आ पहुंची । बिना निमंत्रण आने पर उनका सम्मान और सत्कार ना होने से सती को अपमान महसूस हुआ और यज्ञ कुंड में अपने को भस्म कर लिया । फलस्वरूप भगवान शिव उनके शरीर को लेकर भूलोक में घूमने लगे और जहां जहां उनके अंग गिरे वहां वहां शक्तिपीठ बन गए । अंततोगत्वा सती ने हिमाचल के घर पुनर्जन्म लिया और घोर तपस्या के बाद शिव के साथ उनका विवाह विवाह हुआ ।

आज की कथा का मुख्य सार बताते हुए उन्होंने कहा कि गृहस्थ एक तपोवन है जिसमें संयम, सहिष्णुता और धैर्य से एक दूसरे के सामंजस्य और विश्वास से परिवार को चलाना चाहिए । संशय से वैमनस्य और असुरक्षा का भाव बढ़ता है । पति-पत्नी में आपसी विश्वास ही परिवार की सुख शांति का आधार है ।

आज अखिल भारतीय वैष्णव सेवा संघ मुंबई के उपाध्यक्ष श्री दीनदयाल वैष्णव, डा. आर. एस. वैष्णव, मोहन जी, विष्णु दत्त जी, कुलदीप गृहस्थी, बंटी वैष्णव, ओम जी इंदौर, अनिल भाई देवपुरी, बाबूलाल जी, प्रशांत महंत, विवेक दास हरीश गृहस्थी और उत्तर प्रदेश उपाध्यक्ष श्री सुरेश वैष्णव ने आरती कर कथा को विराम दिया । कल के प्रसंग में भगवान श्री राम के जन्म की कथा का वर्णन होगा ।