सात्विक और शाकाहारी व्यक्ति से पशु-पक्षी भी महसूस करते हैं अपनापन- सुधांशु जी महाराज

नई दिल्ली। बिया बसरी बड़ी ऊँची साधक थी, बड़ी ऊँची आत्मा वाली सन्त थी। उसे कहा गया कि धर्मग्रन्थों में लिखा है कि ईश्वर से प्यार करो और शैतान से नफ़रत। ज़रा सोचो! राबिया ने उस समय क्या कहा होगा? क्या उसने ‘शैतान से नफरत करो’ वाली पंक्ति को मान लिया होगा या उसे काट दिया होगा? नहीं-नहीं! उसने ऐसा नहीं किया था।

मैं आपको बताऊँ! राबिया ने सन्त के उस सुझाव-उस निर्देश के उत्तर में क्या जवाब दिया था? राबिया ने कहा था-“अपने रब से, अपने मालिक से प्यार करते-करते मेरे अंतर्मन में इतना प्यार भर गया है कि मुझे अब न अब कोई शैतान नजर आता है और न ही किसी के प्रति घृणा उपजती है। बन्धुओं, मानवी सात्विकता की यह सबसे ऊँची कसौटी है।

ऊपर लिखा परामर्श देने वाले भारी सन्त हसन ने कहा था- राबिया! तू हमेशा बड़े प्रेम से मधुर गीत गाती है; अपने रब, अपने मालिक के लिए। तू प्रभु के गीत गाती है और उसकी बंदगी करती है; तू बड़ी ऊँची है, तू बड़ी गहरी है। जब तू ये गीत गाती है, तब तेरे आस-पास पशु-पक्षी आकर खड़े हो जाते हैं, लेकिन जब हम करीब आ जाते हैं, तब वो पक्षी डरकर वहाँ से भाग जाते हैं। राबिया! क्या वो तेरे से परिचित हैं? तेरे पालतू जीव हैं?

राबिया ने कहा था- लगता है आप मांस खाते हैं! यदि आप माँस खाते हैं तो उससे आपकी वृत्तियॉं और संस्कार ख़राब हो जाते हैं, जो पशु-पक्षियों को डरा देते हैं। आपके शरीर से प्रकट होने वाली किरणें पशु-पक्षियों के ऊपर बहुत दूर से प्रभाव डालती हैं , जिसके कारण वो आपके समीप आने पर दूर चले जाते हैं। मैं घृणा, द्वेष, वैर, विरोध आदि को मिटाकर बैठी हुई हूँ और मांस आदि का प्रयोग नहीं करती, इसलिए वे मुझसे भय नहीं खाते। वे समझते हैं कि जंगल में बहुत सारे पशु-पक्षी रहते हैं और उनके बीच में दो-चार पक्षी कहीं दूर देश से भी आकर बैठ जाते हैं तो उनका कोई भी विरोध नहीं करता, उनसे कोई झगड़ा नहीं करता। उसी प्रकार जब मैं इनके समीप आती हूँ या मेरे गीत सुनकर वे मेरे पास आते हैं तो वे भी समझते हैं कि हमारे बीच का ही कोई जीव आकर हमारे बीच बैठ गया है। राबिया ने हसन से कहा- हे सन्त पुरुष! इसीलिए ये पशु-पक्षी बड़े नेह से, बड़े प्यार से मेरे साथ बैठते हैं और भरपूर अपनापन महसूस करते हैं।

दुनिया के सभी महापुरुषों ने शाकाहार और सात्विकता का समर्थन किया है। मेरा आह्वान है कि आप इन दोनों को अपनी ज़िन्दगी का अविभाज्य हिस्सा बनाएँ।

लेखक विश्व जागृति मिशन के संस्थापक हैं।