क्या सभी एससीएसटी, शिकायत करने वाले, ‘राजा हरिश्चन्द्र’ हैं?

नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने क्या एससीएसटी एक्ट खत्म कर दिया है? बिलकुल नहीं। केवल यही तो कहा कि, शिकायत आने के बाद, तुरन्त गिरफ्तारी नहीं होगी। पहले सत्यता की जाँच होगी। यदि तथ्य सही होगा, तो गिरफ्तारी अवश्य होगी। जमानत भी दी जा सकती है।इतनी न्यायकारी बात का विरोध आखिर क्यों? क्या हमारे देश में अंग्रेजों का शासन है?

न वकील, न दलील,
जब चाहो गिरफ्तार कर लो!
जब तक चाहो जेल में रखो!!
जब चाहो फाँसी पर चढ़ा दो!!!

क्या सभी एससीएसटी, शिकायत करने वाले, सारे ‘राजा हरिश्चन्द्र’ हैं?

ये जो कहें बस वही सही है? किसी की सुनवाई नहीं होगी। जिसको चाहेंगे, जेल भिजवा देंगे! यह कहाँ का न्याय है भई? इसका विरोध तो समझदार व न्याय के पक्षधर सभी वर्गों-दलों को ख़ुद आगे आकर करना चाहिए था।

क्या सारे सवर्ण सामूहिक आत्महत्या कर लें? ऐसा बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर जी और यह क़ानून लाने वाले श्री राजीव गांधी जी बिलकुल भी नहीं चाहते थे। यदि कोई कहता है कि उनकी भी यही मंशा थी, तो कृपा कर इस अभागे देश को बताया जाय। तब यह देश कोई और मार्ग तलाशेगा। ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:’ के विश्वहितकारी मन्त्र का सदा से जप करते रहे इस राष्ट्र को सभी मार्ग तलाशना आता है।

इस देश ने आज़ादी के बाद से आज तक भारी-भरकम अंक पाए सुयोग्य को दरकिनार कर तिहाई अंक तक प्राप्त करने वाले अपने भाई-बहिनों को शासक-प्रशासक तक स्वीकारा है और सबको समुचित सम्मान दिया है। सवर्णों ने प्रयास किया है कि सभी ऊपर उठें, आगे बढ़ें, सब योग्य बनें, सबकी संतानें प्रगति करें। इतनी बड़ी भावना का पग-पग पर तिरस्कार करना ज़रा सी भी उचित बात नहीं।

संविधान सभी को न्याय देने के लिये है, देश के प्रधान न्यायाधीश ने सबको न्याय देने और संविधान की मूल आत्मा को मरने नहीं देने के लिए एक पहल की है। भारी दुःख है, कि सब राजनैतिक दल, बड़े-बड़े राजनेता, कथित चिन्तक सब सर्व-न्याय के ख़िलाफ़ खड़े होने लगे, प्रतिक्रियायें देने लगे। शायद एक-दो दिन में देश के लोकप्रिय प्रधानमन्त्री सहित केन्द्र सरकार भी उसी पक्ष में खड़े दिखे।

प्रार्थना है कि हम सब संविधान का साथ दें, न्याय का साथ दें, CJI का साथ दें, इस राष्ट्र का साथ दें। क्षणिक स्वार्थों को तिलांजलि दें।

यह अपील केवल सवर्णों से ही नहीं की जा रही, अपने सभी SC/ST साथियों से की जा रही है। साथ ही साथ भारत में निवास कर रहे समस्त भाइयों-बहिनों तथा विश्व भर में इस ऋषि-राष्ट्र के सांस्कृतिक दूत की भूमिका निभा रहे समस्त भारतवंशियों से भी गम्भीर दोराहे पर खड़ा यह देश भावभरा आह्वान कर रहा है।

सब आगे आएँ, देश का साथ दें, न्याय का साथ दें, संविधान का साथ दें।

हमारी भारत सरकार, क़ानून मन्त्रालय, हमारे सम्माननीय प्रधानमन्त्री जी, मा. क़ानून मन्त्री जी, वरिष्ठ न्यायविद, माननीय उच्चतम न्यायालय नीचे अटैच लगभग डेढ़ साल पहले की उत्तर प्रदेश की एक ‘प्रासंगिक ख़बर’ को भी गहराई से संज्ञान लें। इस न्यूज़ का मतलब यह नहीं है कि दलित भाई-बहिनों पर अत्याचार नहीं होते। लेकिन, यह भी ध्यान रहे कि इस क़ानून का दुरुपयोग करके सवर्णों पर भी ढेरों अत्याचार होते हैं। अन्य अनेक मामलों में भी वे बुरी तरह सताए जाते हैं। स्वार्थी न बनकर सर्वहित की सोचें और भारतवर्ष को ग़लत मार्ग पर ले जाने से रोकें, मौक़ा-परस्त लोगों के साथ कत्तई खड़े न हों।

साभार- अमर उजाला फोटो और राम महेश मिश्र, संरक्षक, आल इंडिया जर्नलिस्ट यूनियन ( WhatsApp wall)